फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   special story on Jayalalitha popularity

बाढ़ के गुस्से ने बहाई जयललिता की लोकप्रियता

Tue, 10 May 2016 08:37 PM IST
विनोद अग्निहोत्री/ चेन्नई
विनोद अग्निहोत्री/ चेन्नई Updated Tue, 10 May 2016 08:37 PM IST
विज्ञापन
special story on Jayalalitha popularity

विधानसभा चुनाव में जब अब महज कुछ दिन रह गए हैं,तब धुर दक्षिण के राज्य तमिलनाडु की सियासी तस्वीर लगभग साफ होने लगी है। जिस तरह चुनावों केशुरुआती दौर में जयललिता की पार्टी एआईडीएमके जीत पक्की मानी जा रही थी,मतदान की तारीख करीब आते आते अब मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है। कुछ महीने पहले आई चेन्नई की भीषण बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन उसमें राहत को लेकर हुई बदइंतजामी से पैदा हुआ लोगों के गुस्से की बाढ़ में जयललिता की लोकप्रियता बह गई लगती है।

विज्ञापन


चेन्नई और उसके आसपास क्षेत्रों में जितने भी लोगों से बात होती है, सबकी नाराजगी स्पष्ट दिखाई देती है। चेन्नई में पले बढ़े और मुंबई में अपना व्यवसाय कर रहे शंकर कहते हैं बाढ़ से पहले दीवार पर लिखा था कि जयललिता की सत्ता में फिर वापसी होगी। लेकिन बाढ़ के पानी के साथ वह संभावना भी बह गई है।
विज्ञापन


खासकर वो मतदाता जो एआईडीएमके के कट्टर समर्थक नहीं हैं, लेकिन डीएमके की बजाय एआईडीएमके को वोट देना चाहते थे, लेकिन अब उनका मन बदल गया है। उन्हें अब यह तय करना है कि वह डीएमके कांग्रेस गठबंधन के साथ जाएं या वाम दलों, विजय कांत की डीएमडीके और वाईको की पार्टी एमडीएमके के गठबंधन को वोट दें।
विज्ञापन
विज्ञापन


भाजपा भी इन मतदाताओं पर नजरें गड़ाए हुए और नरेंद्र मोदी केसुशासन के नारे को गरम करने में जुटी है। इस सत्ताविरोधी रुझान को भुनाने केलिए भाजपा का हमला भी डीएमके से ज्यादा एआईडीएमके पर है।

ऑटो चालक के.श्रीनिवासन से पूछने पर जवाब मिलता है कि वह डीएमके कांग्रेस गठबंधन को वोट देंगे, क्योंकि राज्य में सत्ता बदलनी चाहिए। श्रीनिवासन कहते हैं कि बाढ़ में जिस तरह तमिलनाडु में तबाही मचाई उस समय लगता था राज्य में कोई सरकार ही नहीं है।

पिछले कई चुनावों में एआईडीएमके को वोट दे चुके जयललिता के समर्थक प्रकाश का कहना है कि वह एआईडीएमके को वोट देना चाहते हैं,लेकिन पार्टी में अम्मा के बाद कोई दूसरा नेता नहीं है जो आगे कमान संभाल सके।

जबकि डीेमके में करुणानिधि के बाद उनके बेटे स्टालिन ने मोर्चा संभाल लिया है। एआईडीएमके को वोट देने की बात कहते हुए भी प्रकाश कहते हैं कि उन्हें डीएमके कांग्रेस गठबंधन की जीत की संभावना दिखाई देती है।

तमिलनाडु में करीब नौ से दस फीसदी मुसलमान और चार फीसदी ईसाई हैं। हालाकि नतीजों पर इनका बहुत प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि इनकी आबादी बिखरी हुई है। लेकिन द्रविड़ राजनीति करने वाले दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इनके मतों को खासी अहमियत देते हैं। इसलिए दोनों ही भाजपा से निश्चित दूरी बनाकर रखते हैं।


अल्पसंख्यकों का रुझान भी इस बार एआईडीएमके को परेशानी में डाल रहा है। तिरुत्तनी में मस्जिद के इमाम मोहम्मद बिलाल कहते हैं कि भले ही करुणानिधि बुजुर्ग और उम्रदराज़ हो गए हैं, लेकिन वह बेहद बुद्धिमान और बड़े नेता हैं। लोग उन्हें फिर एक बार सत्ता सौंप सकते हैं। पास ही खड़े उमर और निजामुद्दीन भी हां में हां मिलाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed