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Shinzo Abe Shot Dead: भारत में कितने महफूज हैं मौजूदा पीएम और पूर्व प्रधानमंत्री? जानें कितना मजबूत होता है इनकी सुरक्षा का घेरा?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 09 Jul 2022 06:43 PM IST
सार

एसपीजी में लंबे समय तक रहे एक पूर्व अधिकारी बताते हैं, सुरक्षा का मुद्दा बहुत संवदेनशील होता है। सार्वजनिक तौर से इस पर ज्यादा बात ठीक नहीं है। चर्चा, जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की हत्या को लेकर हो रही है, तो भारत सहित सभी देशों में इस मुद्दे पर चिंतित होना लाजमी है। संभव है कि शिंजो आबे की सुरक्षा में कई खामियां रही हों...

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special protection group security cover of PM is very tight which is 5 layer, Close Protection Team of the SPG deployed very closest to the PM
पीएम मोदी का सुरक्षा घेरा - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की सार्वजनिक स्थल पर हत्या कर दी जाती है। उनके सुरक्षा कर्मियों के बीच से हमलावर, पूर्व पीएम 'शिंजो आबे' पर निशाना साधने में कामयाब हो जाता है। भारत के मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्रियों का सुरक्षा घेरा कितना मजबूत है, ये विषय चर्चा में है। निजी सुरक्षा के मामले में 'कौन' कमजोर कड़ी हो सकता है?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप 'एसपीजी' के पास है। दूसरी ओर पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह की सुरक्षा, सीआरपीएफ को सौंपी गई है। इनके अलावा पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा, उनकी सुरक्षा स्थानीय पुलिस देखती है। 2019 से पहले पूर्व पीएम और उनके परिजनों को एसपीजी सुरक्षा मिलती रही है। बाद में यह नियम बनाया गया कि एसपीजी, केवल मौजूदा प्रधानमंत्री को ही मिलेगी। इसी कड़ी में डॉ. मनमोहन सिंह के साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली गई थी। अब इनके पास सीआरपीएफ का सुरक्षा घेरा है।

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आबे की सुरक्षा के नहीं थे पुख्ता इंतजाम

एसपीजी में लंबे समय तक रहे एक पूर्व अधिकारी बताते हैं, सुरक्षा का मुद्दा बहुत संवदेनशील होता है। सार्वजनिक तौर से इस पर ज्यादा बात ठीक नहीं है। चर्चा, जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की हत्या को लेकर हो रही है, तो भारत सहित सभी देशों में इस मुद्दे पर चिंतित होना लाजमी है। संभव है कि शिंजो आबे की सुरक्षा में कई खामियां रही हों। जैसे वीडियो देखने को मिल रहे हैं, उसके बाद यही कहा जा सकता है कि वहां पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। हमलावर, बिल्कुल करीब से फायर कर देता है। मतलब, सुरक्षा की जितनी परतें होनी चाहिए थीं, संभवतया उतनी नहीं रही हों। पूर्व पीएम का हमलावर, बिना किसी बाधा के कैमरामैन बनकर वहां तक पहुंच जाता है। ये सुरक्षा चूक ही तो है।

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भारत में अगर मौजूदा पीएम या पूर्व पीएम का कार्यक्रम होता है, तो उसके लिए स्पेशल मीडिया पास जारी होते हैं। इंडोर कार्यक्रम है तो वहां एक तय समय के बाद प्रवेश बंद कर दिया जाता है। कौन कितनी दूरी पर रहेगा, ये सब पहले से ही तय होता है। पीएम का सुरक्षा घेरा बहुत पुख्ता होता है। उसे भेद पाना आसान नहीं होता। यह घेरा कम से कम पांच स्तरीय होता है। खतरे के मुताबिक, इसे बढ़ाया घटाया भी जा सकता है। पीएम के सुरक्षा घेरे में सबसे निकट एसपीजी की 'सीपीटी' यानी क्लोज प्रोटेक्शन टीम होती है। उसके बाद एसपीजी की ही दूसरी टीम का नंबर आता है। यह कुछ दूरी पर तैनात रहती है। इसके बाद पैरामिलिट्री और पुलिस रहती है। चौथी परत में भी पैरामिलिट्री के जवान होते हैं। पांचवें नंबर पर सिविल पुलिस आ जाती है। इसकी ड्यूटी अपेक्षाकृत ऊंची बिल्डिंगों से नजर रखना, आदि रहती है।

तीन परतों में होती है पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा

पूर्व प्रधानमंत्रियों के पास जो सुरक्षा रहती है, खासतौर से डॉ. मनमोहन सिंह के मामले में, उसमें भी तीन परतें शामिल होती हैं। पहली परत में सीआरपीएफ की 'सीपीटी' रहती है। इसमें वे जवान होते हैं, जिन्होंने पहले एसपीजी या एनएसजी में सेवा दी हो। दूसरी परत में भी सीआरपीएफ होती है। तीसरी परत में सिविल पुलिस और पैरामिलिट्री, दोनों के जवान रहते हैं। पीएम या पूर्व पीएम का जहां कहीं भी कार्यक्रम होता है, वहां के इलाके को पूरी तरह सैनिटाइज कर दिया जाता है। डायस और पब्लिक के बीच दूरी रहती है। किसी भी जोखिम से निपटने के लिए कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा बलों की एडवांस तैनाती की जाती है।


 

पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा, इस मामले में कमजोर कड़ी हो सकते हैं। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लोकल पुलिस के पास रहती है। जब डॉ. मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा वापस ली गई थी, तो उस वक्त भी एचडी देवगौड़ा के पास स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप का घेरा नहीं था। वे लंबे समय से बिना एसपीजी के ही रह रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि एसपीजी या कोई दूसरी एजेंसी किसी वीवीआईपी को सुरक्षा दे रही है तो भी उसे पब्लिक के बीच मनमर्जी करने से बचना चाहिए। सुरक्षा घेरा तोड़कर, पब्लिक के बीच पहुंचना, कई बार बड़े जोखिम का कारण बन सकता है।

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