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विशेष बातचीत: प्यार के किराना घराने में कैसे पहुंची नफरत की आग

Wed, 15 Jun 2016 02:24 AM IST
अनूप ओझा/ अमर उजाला
अनूप ओझा/ अमर उजाला Updated Wed, 15 Jun 2016 02:24 AM IST
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special interview of padmabhushan channulal mishra in context of kairana shamli
सुरों के जरिए हमेशा आपस में प्यार सिखाता रहा है किराना घराना - फोटो : सुनील कुमार सिंह/ अमर उजाला
इन दिनों उत्तर प्रदेश के शामली जिला स्थित कैराना और कांधला से पलायन की खबरें आ रही हैं लेकिन इनका इतिहास बिल्कुल भी वैसा नहीं रहा है जैसा कि वर्तमान दिख रहा है। इसी संदर्भ में अमर उजाला के अनूप ओझा ने किराना घराने से तालीम लेने वाले जान-माने ठुमरी गायक पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र से बातचीत की। पेश है कुछ अंश:
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जिस कसबे की स्वर साधना ने हिंदुस्तानी संगीत की दुनिया में किराना घराने के रूप में शोहरत हासिल की, उस बस्ती में नफरत की आग किसने लगा दी। मुझे अच्छी तरह याद है कि वहां आपसी प्रेम, सदभाव और एकता के सुर गूंजते रहे हैं। हिंदू-मुसलमान का फर्क तो वहां कभी रहा ही नहीं। मेरे गुरु उस्ताद अब्दुल गनी खां साहब वहीं के थे।
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16 साल मुजफ्फरपुर (बिहार) में उनके घर में ही रह कर मैंने ख्याल गायन की तालीम ली है। किराना से निकली प्यार की खुशबू सारे जहां में फैल रही है। उसे बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। रंगदारी और असुरक्षा को लेकर कैराना के लोगों के घर छोड़ने, पलायन करने के पीछे वजहें कुछ और होंगी। इसका पता लगाया जाना चाहिए।
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मेरी जानकारी में किराना घराने में कभी हिंदू-मुसलमान का भेद नहीं रहा।  किराना घराने के उस्ताद मुसलमानों को भी सिखाते थे और उसी लगन और निष्ठा के साथ हिंदू कलाकारों को भी। इस घराने से निकल कर हिंदू कलाकारों ने भी देश में नाम किया और मुलमानों ने भी। इसी घराने से गायकी की तालीम लेने वाली चोटी की महिला कलाकारों में गंगूबाई हंगल, केसर बाई हिंदू थीं, जबकि रौशन आरा बेगम मुसलमान। इसी घराने ने अब्दुल करीम खां, अब्दुल वहीद खां, अब्दुल मजीद खां और अब्दुल हक खां जैसे उस्तादों ने भारत रत्न भीमसेन जोशी को भी पैदा किया और पं. सवाई गंधर्व को भी। सुरेश बाबू माने भी इसी घराने के तराशे हुए चमकते हीरे रहे हैं।



मेरे किराना घराने से जुड़ने की की कहानी भी दिलचस्प है। मेरे पिता पं. बद्री प्रसाद मिश्र मुजफ्फरपुर में रहकर तबला बजाते थे। उनकी इच्छा थी कि मैं गायन सीखूं। इसके लिए उन्होंने राजा दरभंगा के दरबारी गायक अब्दुल गनी खां साहब को मेरे लिए गुरु के रूप में चुना। तब तक अब्दुल गनी किराना से आकर मुजफ्फरपुर शिफ्ट हो गए थे। आठ वर्ष की उम्र में मैं उस्ताद गनी खां के पास पहुंचा और 16 साल तक उनके पास रहकर ख्याल गायन की तालीम ली।

मैं किराना कसबे में कभी गया नहीं लेकिन वहां की खुशबू से परिचित रहा हूं। गनी खां साहब मुझे पुत्र की तरह प्यार करते थे। उनकी पत्नी हुश्ना बेगम रोटी बनाकर जब इंतजार करती रहती थीं और कहती थीं कि उस्ताद अब तो खा लो, घंटे भर हो गए रियाज करते। तो वह कहते थे कि बेगम बच्चे से काम बहुत लेती हो, जरा थोड़ा और सिखा लेने दो।

यूं ही बदनाम नहीं है कैराना, थाने की हिस्ट्रीशीट देती है गुंडा-गर्दी की गवाही

special interview of padmabhushan channulal mishra in context of kairana shamli
आइएसआई एजेंट इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा भी है कैराना कोतवाली से हिस्ट्रीशीटर
अपराध की दुनिया में कैराना यूं ही बदनाम नहीं हो गया। अब दहशत के चलते यहां से लोगों के पलायन पर भले ही कितनी राजनीति क्यों न की जाए, लेकिन कैराना थाने का आपराधिक रिकार्ड ही यहां की गुंडागर्दी की तस्दीक करने के लिए काफी है। देश विरोधी मंसूबों के चलते खुफिया एजेंसी की नींद उड़ाने वाला इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा भी कैराना कोतवाली से हिस्ट्रशीटर हैं। इन दोनों के साथ ही कैराना कोतवाली में 109 हिस्ट्रीशीटर दर्ज है।

आजादी के बाद से बेशक हिंदू-मुस्लिम सौहार्द को लेकर अन्य कस्बों को कैराना ने नसीहत मिली। कैराना के हालत नब्बे के दशक के बाद खराब हुए। इस दौरान यहां से गठरी उद्योग के माध्यम से इकबाल काना दिलशाद मिर्जा आदि का पाकिस्तान से  संपर्क हुआ तो सिलसिला चलने लगा। उसके बाद इन्होंने कैराना के लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनको पाकिस्तानी एजेंट बनाया और अपना नेटवर्क बढ़ाया। बाद में इकबाल काना तो पाकिस्तान जाकर सेट हो गया और आज तक देशविरोधी गतिविधियों में शामिल है।

कोतवाली में इकबाल काना तथा उसके साथियों के खिलाफ हिस्ट्रीशीट भी खोली गई। 2000 के बाद तो कैराना में गुंडागर्दी बढ़ती चली गई। देश का सबसे हाईलाइट मामला प्रतीक दीवान अपहरण कांड कैराना से जुड़ा और यहीं से उसकी बरामदगी की गई।

इसके अलावा दिल्ली तथा अन्य राज्यों में नकली नोटों की खेप पकड़ी जाना हो या फिर बार्डर पर हथियार पकड़े जाना, हमेशा से खुफिया एजेंसियों की रडार पर कैराना के रहने का कारक बना रहा। देखते ही देखते ही कैराना कोतवाली में हिस्ट्रीशीटरों की बाढ़ आ आ गई। आज कोतवाली में दर्ज हिस्ट्रीशीटरों की संख्या 109 है। 

मुकीम की हिस्ट्रीशीट नहीं है
2013 में रंगदारी न देने के कारण दो व्यापारियों की हत्या कर देने वाले मुकीम गैंग की न तो कैराना में हिस्ट्रीशीट है और न ही यह गैंग यहां पर रजिस्टर किया गया। हालांकि मुकीम गैँग के कई मामले कैराना के साथ कांधला में भी हैं। उधर, कोतवाली प्रभारी एमएस गिल के अनुसार यह गैंग सहारनपुर से रजिस्टर है।  कैराना कोतवाली में फुरकान गैंग रजिस्टर है, इसके अलावा मुकीम गैंग वाजिद उर्फ काला अभी तक फरार हैं।

12 हिस्ट्रीशीटर ही भीतर, बाकी बाहर
बदमाशी का गढ़ कैराना में आज भी देखा जो तो 109 हिस्ट्रीशीटर में मात्र 12 हिस्ट्रीशीटर ही जेल के अंदर हैं और बाकी अभी भी फरार है या फिर बाहर हैं। (ब्यूरो/ अमर उजाला शामली से रिपोर्ट)

बिना वारदात के कानून व्यवस्था कैसे बिगड़ी : डीआईजी

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कैराना मामले में पुलिस पर उठ रहे सवाल पर डीआईजी ने दिया बयान - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

 देशभर में चर्चा का केंद्र बन चुके कैराना पलायन प्रकरण में डीआईजी डा. एके राघव ने कैराना में कानून व्यवस्था की बिगड़ी हालत से साफ इनकार किया। उनका कहना है कि जब पिछले दो-तीन साल में किसी तरह की वारदात ही नहीं हुई तो कानून व्यवस्था को बिगड़ा हुआ कहा जाना ठीक नहीं है।

कैराना मामले में पुलिस पर उठ रहे सवाल पर अमर उजाला से अनौपचारिक बातचीत में डीआईजी का कहना है कि पुलिस अपना काम मुस्तैदी से कर रही है। ऐसे में कानून व्यवस्था की समस्या का कोई मामला आता ही नहीं है। जब दो साल में कोई घटना या वारदात नहीं हुई तो कानून व्यवस्था को कौन बिगड़ा हुआ मानता है।

पुलिस को वहां एक डंडा भी नहीं चलाना पड़ा और न ही किसी तरह का तनाव ही हुआ। उनका कहना है कि दो साल पहले दो व्यापारियों की हत्या कैराना में हुई थी। पुलिस ने इस वारदात के बाद मुस्तैदी से काम कर बदमाशों को सलाखों के पीछे पहुंचाया था।

उन्होंने बताया कि पुलिस के ही भरोसे पर दोनों व्यापारियों का परिवार अब भी कैराना में रह रहा है। कैराना में सक्रिय एक गैंग के 25 बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। उस पूरे गैंग की कमर तोड़ने के लिए बदमाशों को यहां से दूर पूर्वांचल की जेलों में शिफ्ट किया गया। वहां आपराधिक गतिविधियों पर लगाम कसी जा चुकी है।

कैराना प्रकरण की आंच बागपत तक पहुंची

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कैरान प्रकरण में सत्यापन की फाइल की फोटो - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
वहीं कैरान और कांधला की आग प्रदेश के बागपत जिले में पहुंच चुकी है। यहां के हसनपुर जिवानी गांव में रहने वाले एक समुदाय के लोगों का आरोप है कि गांव के दूसरे समुदाय के युवकों ने उन्हें सात दिन में गांव छोड़कर जाने का फरमान सुनाया है। उन्होंने एसपी दफ्तर पहुंचकर मामले की शिकायत एएसपी को दी। एएसपी ने रमाला थाना प्रभारी को मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

एएसपी से मिलने पहुंचे गांव के मोहम्मद हनीफ, मोहम्मद हारुण, सलीम, दिलशाद, वहीद आदि ने कहा कि वे गांव के बाहरी छोर पर रहते हैं। गांव के नरेंद्र, राहुल, अक्षय और एक बाहरी युवक हरेंद्र अपने साथियों के साथ उनके परिवार की महिलाओं से छेड़छाड़ करते हैं। उनके घरों के बाहर शराब पीकर वे हुड़दंग मचाते हैं और रोकने पर गाली-गलौज करते हैं।

आरोप है कि उनका कहना है कि कैराना प्रकरण में उनके समुदाय के लोगों पर अत्याचार हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, आरोपियों ने चेतावनी दी है कि सात दिन के अंदर गांव नहीं छोड़ा तो उनको खत्म कर दिया जाएगा। इसके चलते वे दहशत में हैं।

हारुण का कहना है कि आरोपियों ने उनके घर में घुसकर पिता अब्दुल वहीद, पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट की। घटना की रमाला थाने में शिकायत की गई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस संबंध में एएसपी अजीजुल हक का कहना है कि गांव के कुछ लोगों ने शिकायत की है। रमाला थाना प्रभारी को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। ब्यूरो/ अमर उजाला बागपत की रिपोर्ट)
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