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यूरिया घोटाला: विशेष अदालत ने खारिज की सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट, 22 साल की देरी पर उठाए सवाल, लगाई कड़ी फटकार
Sun, 03 Apr 2022 07:46 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 03 Apr 2022 07:46 PM IST
सार
सीबीआई ने जिस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी वह चार जून 1997 को दर्ज किया गया था। यह मामला एक लाख मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति से जुड़ा हुआ था। सीबीआई ने कहा है कि मामले में कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है, जिसे अदालत ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यह रिपोर्ट 22 साल की देरी से दाखिल की गई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
यूरिया घोटाले से संबंधित एक मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट एक विशेष अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने एजेंसी से रिपोर्ट फाइल करने में 22 साल की देरी की जांच करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि इस तरह की गलती दोबारा न हो। विशेष न्यायाधीश सुरिंदर एस राठी ने कहा कि इस मामले में आखिरी बार जांच साल 1999 में सीबीआई ने की थी। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि एजेंसी ने रिपोर्ट रोक रखी थी, जो कानूनी रूप से अस्वीकार्य है।
न्यायाधीश राठी ने आगे कहा कि सीबीआई निदेशक को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए भी कार्रवाई करनी चाहिए कि न्याय के साथ इस तरह का व्यवहार दोबारा न होने पाए।
अदालत ने कहा, 'इस मामले में सीबीआई की ओर से आखिरी जांच 1999 में हुई थी और कोई भी इस बात को नहीं समझ पा रहा है कि क्यों उस रिपोर्ट को रोक कर रखा गया और ऐसा करने से किस उद्देश्य की प्राप्ति हुई।'
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इसके साथ ही न्यायाधीश ने सीबीआई की भ्रष्टाचार विरोधी इकाई 1 के संयुक्त निदेशक को आदेश दिया कि मामले की जांच करें और एक रिपोर्ट जमा करें। उन्होंने कहा, यह इस अदालत के लिए चिंता की बात है और सीबीआई निदेशक को भी चिंता होनी चाहिए। न्यायाधीश ने कहा, 'साफ है कि जब मौजूदा अंतिम रिपोर्ट दायर की गई थी जब अधिकारी और संबंधित पुलिस अधीक्षक ने 22 साल की देरी के बारे में चर्चा करना जरूरी नहीं समझा। जबकि उनके पास इसका अवसर था। ऐसी चुप्पी कानूनी रूप से अस्वीकार्य है।'
सीबीआई ने 19 मई 1996 को यूरिया घोटाले में मामला दर्ज किया था। इसके आरोपियों पर एक आपराधिक साजिश के तहत राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड (एनएफएल) के साथ 133 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप था। मुख्य मामले में एनएफएल के कई अधिकारियों, कारोबारियों और पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के भतीजे बी संजीव राव को दोषी करार दिया गया था।
जांच एजेंसी ने अपनी एफआईआर में एनएफएल के पूर्व प्रबंध निदेशक सीके रामकृष्णन व कार्यकारी निदेशक डीएस कंवर, हैदराबाद स्थित साईं कृष्णा इंपेक्स के मुख्य कार्यकारी एम संबाशिव राव और अमेरिका स्थित अलबामा इंटरनेशनल इंक के एस नुथी को नामजद किया था। सीबीआई ने जनवरी 2021 में इनके खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी और कहा था कि मामले में कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। अदालत ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि हमें इस निष्कर्ष विश्वसनीय प्रतीत नहीं होता है।
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न्यायाधीश राठी ने आगे कहा कि सीबीआई निदेशक को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए भी कार्रवाई करनी चाहिए कि न्याय के साथ इस तरह का व्यवहार दोबारा न होने पाए।
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अदालत ने कहा, 'इस मामले में सीबीआई की ओर से आखिरी जांच 1999 में हुई थी और कोई भी इस बात को नहीं समझ पा रहा है कि क्यों उस रिपोर्ट को रोक कर रखा गया और ऐसा करने से किस उद्देश्य की प्राप्ति हुई।'
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इसके साथ ही न्यायाधीश ने सीबीआई की भ्रष्टाचार विरोधी इकाई 1 के संयुक्त निदेशक को आदेश दिया कि मामले की जांच करें और एक रिपोर्ट जमा करें। उन्होंने कहा, यह इस अदालत के लिए चिंता की बात है और सीबीआई निदेशक को भी चिंता होनी चाहिए। न्यायाधीश ने कहा, 'साफ है कि जब मौजूदा अंतिम रिपोर्ट दायर की गई थी जब अधिकारी और संबंधित पुलिस अधीक्षक ने 22 साल की देरी के बारे में चर्चा करना जरूरी नहीं समझा। जबकि उनके पास इसका अवसर था। ऐसी चुप्पी कानूनी रूप से अस्वीकार्य है।'
सीबीआई ने 19 मई 1996 को यूरिया घोटाले में मामला दर्ज किया था। इसके आरोपियों पर एक आपराधिक साजिश के तहत राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड (एनएफएल) के साथ 133 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप था। मुख्य मामले में एनएफएल के कई अधिकारियों, कारोबारियों और पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के भतीजे बी संजीव राव को दोषी करार दिया गया था।
जांच एजेंसी ने अपनी एफआईआर में एनएफएल के पूर्व प्रबंध निदेशक सीके रामकृष्णन व कार्यकारी निदेशक डीएस कंवर, हैदराबाद स्थित साईं कृष्णा इंपेक्स के मुख्य कार्यकारी एम संबाशिव राव और अमेरिका स्थित अलबामा इंटरनेशनल इंक के एस नुथी को नामजद किया था। सीबीआई ने जनवरी 2021 में इनके खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी और कहा था कि मामले में कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। अदालत ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि हमें इस निष्कर्ष विश्वसनीय प्रतीत नहीं होता है।