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नाबालिग बेटी से रेप: मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने पिता को सुनाई 25 साल के कठोर कारावास की सजा, जानें पूरा मामला

Tue, 05 Apr 2022 07:20 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुम्बई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुम्बई Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 05 Apr 2022 07:20 PM IST
सार

नाबालिग बेटी से रेप के मामले में मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने आरोपी पिता को 25 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने ये फैसला पीड़िता की दादी की शिकायत के आधार पर दिया है।

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special court has sentenced Man to 25 years rigorous imprisonment for raping minor daughter in mumbai
कोर्ट का आदेश। - फोटो : amar ujala

विस्तार

महाराष्ट्र की एक विशेष अदालत ने नाबालिग बेटी का बालात्कार करने के मामले में पिता को 25 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही विशेष कोर्ट ने न्याय मांगने के लिए नाबालिग की दादी की सराहना भी की है। विशेष न्यायधीश भारती केले ने पिछले सप्ताह हुई सुनवाई के दौरान आरोपी को पाक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया था। इस मामले में विस्तृत आदेश मंगलवार को उपलब्ध कराया गया।

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इस मामले में सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि न्याय मांगने के लिए पीड़िता की दादी की सराहना की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने इस बात की परवाह किए बिना कि इस उम्र में उसे आरोपी के बच्चों की देखभाल करनी पड़ेगी, न्याय की गुहार लगाई। 
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जानकारी के अनुसार, इस मामले में पीड़िता की दादी ने जानकारी होने के बाद शिकायत दर्ज कराई थी। पीडिता अपनी दादी-बाबा, पिता और चाचा-चाची और दो भाई-बहनों के साथ रहती थी। उसकी मां ने सात साल पहले पारिवारिक विवादों के कारण आरोपी पिता के साथ रहना छोड़ दिया था। 
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इसके साथ ही न्यायाधीश ने कहा कि एक पिता सुरक्षा, विश्वास और प्यार की नींव रखता है। वह अपनी बेटी के जीवन को सुरक्षित बनाता है, लेकिन पीड़िता के पिता ने खुद उसे असहनीय पीड़ा दी है। उन्होंने कहा कि बचपन की पीड़ा उसे जीवन भर के लिए कष्ट देगी।  इस दौरान कोर्ट ने जोर देकर कहा कि आरोपी अधिक उदारता का पात्र नहीं है, क्योंकि उसके द्वारा किया गया अपराध जघन्य है जो पीड़िता यानी उसकी बेटी के जीवन को पूरी तरह से प्रभावित करता है।

इस दौरान आरोपी के वकील ने अदालत में उसका पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी ने अपनी बेटी को लड़कों के साथ खेलने और बात करने से रोका था। इसलिए, उसके और आरोपी के बीच अक्सर झगड़ा होता था। इसी को लेकर मामले में उसे फंसाया गया है।

इसके अलावा आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि लगभग सात से आठ व्यक्ति 10 बाई 10 के कमरे में रह रहे थे, ऐसे में पीड़िता द्वारा बताई गई घटना को अंजाम देना असंभव है। 


सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोपी ने खुद कोई कारण नहीं बताया कि उसकी बेटी और मां उसके खिलाफ क्यों बयान दे रहे थे। अदालत ने कहा कि पीड़िता ने खुद ये बयान दिया है कि उसका किसी दूसरे व्यक्ति के साथ कोई संबंध नहीं था। इसलिए, आरोपी के बचाव का यह तर्क कि उसे पीड़ित के प्रेम प्रसंग के कारण झूठा फंसाया गया है उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं होता है। 

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