{"_id":"5c34b9bebdec2256e517f58e","slug":"sp-seeks-54-percent-reservation-for-backward-rjd-opposes-general-reservation","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपा ने पिछड़ों के लिए मांगा 54 फीसदी आरक्षण, राजद ने किया आरक्षण का विरोध","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सपा ने पिछड़ों के लिए मांगा 54 फीसदी आरक्षण, राजद ने किया आरक्षण का विरोध
Tue, 08 Jan 2019 08:24 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 08 Jan 2019 08:24 PM IST
विज्ञापन
राम गोपाल यादव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्यसभा में सवर्णों के आरक्षण को लेकर बिल अभी पेश नहीं हुआ है लेकिन समाजवादी पार्टी ने अभी पिछड़ों के लिए 54 फीसदी आरक्षण की मांग उठाकर अड़ंगा डाल दिया है। सपा नेता प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा कि वे सामान्य जातियों के आरक्षण के कतई खिलाफ नहीं है न ही बिल का विरोध कर रहे हैं लेकिन जब सरकार 50 फीसदी तय आरक्षण की सीमा बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन करने जा रही है तो उसमें पिछड़ों को आरक्षण 27 फीसदी का दुगना यानि 54 फीसदी हो।
विज्ञापन
दूसरी ओर राजद ने बिल के विरोध की बात कही है। राज्यसभा में सांसद मनोज झा ने कहा कि सरकार बिना दस्तावेजों और तथ्यों के लिए संविधान संशोधन बिल ला रही है जिसके हम विरोधी है। उनका कहना है कि मंडल कमीशन की रिपोर्ट थी जिसमें जातियों और उनकी आबादी का हवाला दिया गया था। अभी जब जाति के आधार पर जनगणना हुई है तो सरकार सामने क्यों नहीं ला रही है उसे डर है। पिछड़ा वर्ग की आबादी भी बढ़ी है। वर्तमान आरक्षण में 1931 की जनगणना को आधार बनाया गया था तो कुल 52 फीसदी बनता था जबकि आरक्षण 27 फीसदी दिया गया।
विज्ञापन
उस समय उसे भी कमजोर किया गया। उनका कहना है राजद इस बिल के खिलाफ में सड़क से संसद तक सरकार को परेशान करेगी। सरकार आरक्षण को मनुवादी दृष्टि से देखने की कोशिश कर रही है। सांसद जयप्रकाश ने कहा कि बिल धोखा है और हम इसके तरीके के विरोधी हैं। सरकार जाति के आधार पर बंटवार कर रही है। सरकार अगर दस फीसदी देती है तो एससी एसटी, ओबीसी जिमसें मुस्लिम और दलित क्रिश्चियन भी शामिल हैं उन्हें 85 फीसदी आरक्षण दे।
विज्ञापन