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दक्षिण राज्यों से आई खुशखबरी, मातृ मृत्यु दर में हासिल किया वैश्विक लक्ष्य

Sat, 18 Jul 2020 08:14 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 18 Jul 2020 08:14 AM IST
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Southern states achieve UN Sustainable Development Goals target of bringing down Maternal Mortality Ratio
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

भारत के दक्षिणी राज्यों ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के 70 से नीचे मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) लाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। ऐसा 2016-18 के लिए नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के निष्कर्ष से पता चलता है। 2016-18 में अखिल भारतीय एमएमआर 113 पर रहा। 2014-16 और 2015-17 में भारत का एमएमआर क्रमशः 130 और 122 रहा था।

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राज्यों की बात करें तो केरल में सबसे कम 43 एमएमआर रहा। वहीं असम में सबसे ज्यादा 215 रहा। 'अधिकार प्राप्त कार्रवाई समूह' (जिसमें बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं) और असम में 161 एमएमआर था। एमएमआर में क्षेत्रीय परिवर्तन होते हैं। एमएमआर के दीर्घकालिक रुझान दिखाते हैं कि उच्च एमएमआर वाले राज्यों की स्थिति में सुधार हुआ है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मातृ मृत्यु को गर्भवती होने के दौरान या गर्भावस्था की समाप्ति के 42 दिनों के भीतर महिला की मृत्यु, गर्भावस्था की अवधि के दौरान, गर्भावस्था या उसके प्रबंधन से संबंधित किसी भी कारण से मृत्यु हो जाने के तौर पर परिभाषित किया है। इसमें दुर्घटना या आकस्मिक कारण शामिल नहीं हैं।

एमएमआर हर 1,00,000 जीवित बच्चों के जन्म के दौरान होने वाली मातृ मृत्यु संख्या है। उदाहरण के तौर पर असम की एमएमआर रेंज 133-297 है जबकि केरल की 10-77 है। भारत में 20 से 29 वर्ष के बीच वाली 65 प्रतिशत मांओं की मृत्यु हो जाती है। वहीं एसआरएस के डाटा के अनुसार गैर-मातृ मृत्यु दर में इस आयु-समूह की महिलाओं की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत है।

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