चीन की घुसपैठ पर कौन बोल रहा 'झूठ': सीमा विवाद पर मोदी सरकार से क्यों टकराना चाहती हैं सोनिया गांधी
संसद के मौजूदा सत्र में लोकसभा सदस्य चिराग पासवान ने पूछा, गत तीन वर्षों के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रकाश में आए घुसपैठ के मामलों की संख्या कितनी है। गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रामाणिक ने बताया कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर 128, भारत-बांग्लादेश सीमा पर 1787, भारत-नेपाल सीमा पर 25, भारत-भूटान सीमा पर जीरो, भारत-म्यांमार सीमा पर 133 और भारत-चीन सीमा पर 'जीरो' मामले रहे हैं...
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भारतीय सीमा में चीन की घुसपैठ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के अलग-अलग दावे हैं। घुसपैठ को लेकर कौन 'झूठ' बोल रहा है, इस सवाल का जवाब दोनों तरफ से मिल रहा है। सोनिया गांधी कहती हैं कि देश की सीमाओं पर बड़ी चुनौतियां हैं, मगर संसद में इस मसले पर विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। सत्र के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा, पिछले तीन वर्ष में चीन सीमा पर कोई भी घुसपैठ नहीं हुई है। यानी चीन की तरफ से घुसपैठ के मामलों की संख्या 'जीरो' है। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी लगातार इस मसले को उठाती रही है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के मुताबिक, कोर कमांडर स्तर की बैठकों के 13 दौर पूरे होने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। चीनी सैनिक बेशर्मी से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे जवान सीमाओं पर उन्हें बहादुरी से रोक रहे हैं। उत्तराखंड, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन ने क्या किया है, अब ये किसी से छिपा नहीं है। सरकार झूठ पे झूठ बोले जा रही है।
पड़ोसियों के साथ संबंधों पर पूर्ण चर्चा हो: सोनिया गांधी
संसद के सेंट्रल हॉल में कांग्रेस पार्टी के संसदीय दल की बैठक में अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, यह असाधारण है कि देश की सीमाओं पर जो चुनौतियां आने वाली हैं, सरकार उस पर चर्चा करने का कोई अवसर तक नहीं दे रही है। इस तरह की चर्चा, सामूहिक इच्छाशक्ति और संकल्प को प्रदर्शित करने का एक अवसर होता है। सरकार, ऐसे मुश्किल सवालों का जवाब नहीं देना चाहती। देश की सीमाओं से जुड़े मसलों पर स्पष्टीकरण मांगना, विपक्ष का अधिकार और कर्तव्य है। ऐसे मामले में मोदी सरकार बहस के लिए समय आवंटित करने से इनकार करती है। सरकार को देश की सीमाओं की स्थिति और अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों पर पूर्ण चर्चा करानी चाहिए।
चीन सीमा पर घुसपैठ के मामले तो जीरो हैं: गृह मंत्रालय
संसद के मौजूदा सत्र में लोकसभा सदस्य चिराग पासवान ने पूछा, गत तीन वर्षों के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रकाश में आए घुसपैठ के मामलों की संख्या कितनी है। गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रामाणिक ने बताया कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर 128, भारत-बांग्लादेश सीमा पर 1787, भारत-नेपाल सीमा पर 25, भारत-भूटान सीमा पर जीरो, भारत-म्यांमार सीमा पर 133 और भारत-चीन सीमा पर 'जीरो' मामले रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के नेता पवन खेड़ा कहते हैं, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लद्दाख में डेढ़ साल से विवाद खत्म नहीं हुआ है। गतिरोध बढ़ता ही जा रहा है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन का नाम लेने से परहेज कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ही तो कहा था कि 'भारतीय क्षेत्र का एक इंच भी नहीं' दिया गया। अब दोनों देशों के बीच सैन्य वार्ता के 13 दौर पूरे हो चुके हैं। उसमें क्या चर्चा हुई है, देश को बताएं। दूसरी तरफ सेना प्रमुख ने कहा, चीन यहां रहने के लिए है।
बाराहोती के निकट तक चीनी घुसपैठ देखी गई थी: खेड़ा
पवन खेड़ा ने कहा, चीनी सैनिक बेशर्मी से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे जवान सीमाओं पर उन्हें बहादुरी से रोक रहे हैं। अभी कुछ ही दिन हुए हैं कि जब उत्तराखंड में टुन जून ला दर्रे को पार करते हुए बाराहोती के निकट तक चीनी घुसपैठ देखी गई थी। अरुणाचल प्रदेश में तवांग पर चीनी सैनिक आ जाते हैं। हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में तो चीन ने लॉजिस्टिक सुविधा का इंतजाम कर लिया है। आर्टिलरी यूनिट और एक वायु रक्षा बेस भी स्थापित हो गया है। मतलब, चीन ने वहां पर व्यापक बुनियादी ढांचे का निर्माण कर लिया है। उत्तरी क्षेत्रों में भारत के सामरिक हितों के लिए ये एक बड़ा संभावित खतरा है। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि एलएसी पर जो स्थिति बिगड़ी थी, वह चीन द्वारा यथास्थिति को बदलने के एकतरफा प्रयासों और द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन के कारण हुई थी।
केंद्र सरकार लगातार झूठ बोल रही है: कांग्रेस पार्टी
देश की सीमाओं की रक्षा को लेकर कांग्रेस पार्टी ने कई बार केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी ने कहा है, मोदी सरकार ने देश से झूठ क्यों बोला कि किसी भी चीनी ने भारतीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया है। 100 से अधिक चीनी सैनिकों ने उत्तराखंड में टुन जून ला दर्रे को पार करते हुए बाराहोटी के पास भारतीय संप्रभु क्षेत्र में 5 किलोमीटर के क्षेत्र में प्रवेश कर लिया था। 30 अगस्त, 2021 को चीन के सैनिक तीन घंटे से अधिक समय तक वहां कैसे रहे। क्या यह सरकार और इसकी एजेंसियां, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने में विफल नहीं हुई हैं। इसके बाद भी सरकार कह रही है कि घुसपैठ का कोई मामला सामने नहीं आया। पवन खेड़ा के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में लद्दाख से उत्तराखंड तक और सिक्किम से अरुणाचल प्रदेश तक घुसपैठ हुई है। चीन, एलएसी के साथ अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। वह भारतीय क्षेत्र में बार-बार घुसपैठ कर रहा है। प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री चुप क्यों हैं। चीनी घुसपैठ के निहितार्थ अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले डेपसांग और दौलत बेग ओल्डी सेक्टर पर सरकार कुछ साफ नहीं बता रही है।
चर्चा करने के लिए तैयार नहीं पीएलए
अगस्त में 12वें दौर की सैन्य वार्ता के बाद, इस बात पर आपसी सहमति बनी थी कि गोगरा क्षेत्र से दोनों देशों के सैनिक पीछे हटेंगे। इससे विपरीत चीन को दौलत बेग ओल्डी सेक्टर के साथ बड़े पैमाने पर सेना को मजबूत करने का मौका मिल गया। कांग्रेस पार्टी के अनुसार, वहां भारी संख्या में पीएलए ने अपने सैनिक तैनात कर दिए, बल्कि हथियार प्रणाली को भी उन्नत कर लिया। वहां पर अब उन्नत एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली भी मौजूद है। इसे डेमचोक सेक्टर के साथ तैनात किया गया है। यह 400 किमी के क्षेत्र में हवाई जहाजों के लिए खतरा है। यहां से लगभग पूरा जम्मू और कश्मीर और लद्दाख कवर हो सकता है।
क्लीन चिट वापस लें मोदी: कांग्रेस नेता
इस रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस पार्टी ने पीएम मोदी से चीन को दी गई क्लीन चिट वापस लेने की मांग की है। पिछले साल जून में अरुणाचल प्रदेश से भाजपा सांसद तपिर ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिख चेतावनी दी थी कि चीन ने देश की सीमा में घुसपैठ की है। लेकिन पीएम और गृहमंत्री ने उन दावों को खारिज कर दिया। अब आज 17 महीने हो चुके हैं, लेकिन मोदी ने चीन को क्लीन चिट दे रखी है। ये क्लीन चिट ही भारत के इतिहास का एक काला अध्याय है क्योंकि चीन ने पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल किया है।