फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Sonia Gandhi turns Selja Kumari and Bhupinder Singh Hooda into political alliance

शैलजा के घर से हुड्डा की बेटी की डोली की विदाई अब दिखाएगी सियासी रंग

Thu, 05 Sep 2019 07:04 AM IST
आसिम खान विनोद अग्निहोत्री
विनोद अग्निहोत्री Published by: आसिम खान Updated Thu, 05 Sep 2019 07:04 AM IST
विज्ञापन
Sonia Gandhi turns Selja Kumari and Bhupinder Singh Hooda into political alliance
कुमारी शैलजा, भूपेंद्र सिंह हुड्डा (फाइल फोटो)

कुमारी शैलजा के घर से उठी भूपेंद्र सिंह हुड्डा की बेटी की डोली ने 15 साल पहले दोनों के बीच रिश्तों की जो इबारत लिखी थी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उसे आज हरियाणा कांग्रेस के इन दोनों धुर विरोधी नेताओं के सियासी गठबंधन में बदल दिया। पार्टी की दशा दुर्दशा से कल तक निराश रहने वाले हरियाणा के कांग्रेसी भी मानने लगे हैं कि शैलजा और हुड्डा की जोड़ी अगर सही ढंग से काम कर गई तो विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के ही बीच सीधा मुकाबला होगा। 

विज्ञापन

हुड्डा होंगे जाटों की पहली पसंद

क्योंकि चौटाला परिवार की आपसी लड़ाई की वजह राज्य के 27 फीसदी जाटों की पहली पसंद अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही होंगे और वहीं प्रदेश की करीब 20 फीसदी दलित आबादी में कुमारी शैलजा और उनके पिता की लोकप्रियता कांग्रेस के परंपरागत दलित जनाधार को एकजुट कर सकती है। लोकसभा चुनावों की करारी हार और अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद से सन्निपात में आई कांग्रेस ने आज अपने एक बड़े पेंच को सुलझा लिया है। 

विज्ञापन


यह पेंच हरियाणा को लेकर था, जहां लंबे समय से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच लगातार टकराव जारी था और जिसका खामियाजा लोकसभा चुनावों में भी पार्टी के सफाए के रूप में सामने आया। इसके बाद भूपेंद्र सिंह हुड़डा लगातार हरियाणा में कांग्रेस अध्यक्ष को बदलने का दबाव बना रहे थे और इधर कुछ महीनों से उनके तेवरों से लग रहा था कि अगर हाईकमान ने नहीं सुनीं तो वह अपना रास्ता अलग भी कर सकते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने न सिर्फ हुड्डा को मना लिया बल्कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन करके कुमारी शैलजा को कमान सौंप कर कांग्रेस के परंपरागत दलित जनाधार को भी अपने साथ जोड़े रखने का दांव चल दिया है। साथ ही हुड्डा को विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का नेता और राज्य चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाकर जाटों को साधने की भी कोशिश की है। हरियाणा की राजनीति में आम तौर पर कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक दूसरे का धुर विरोधी माना जाता है।

दस वर्ष केंद्र की यूपीए सरकार के दौरान शैलजा केंद्रीय मंत्री थीं, तो हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री और अक्सर उनके बीच टकराव की खबरें मीडिया में आती रहती थीं। यहां तक कि हुड्डा के विरोधी दूसरे कांग्रेसी नेता भी शैलजा के साथ गोलबंद होते रहे हैं। लेकिन यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि 2004 में हुड्डा की बेटी की शादी जब दिल्ली में हुई थी तो खुद शैलजा ने आगे बढ़कर हुड्डा से आग्रह किया था कि यह शादी सुनहरी वाग रोड स्थिति उनके सरकारी आवास से होगी और हुड्डा ने उसे माना और उनकी बेटी अंजलि की शादी भी शैलजा के घर से हुई और डोली में बैठकर अंजलि विदा भी वहीं से हुई। इसलिए हुड्डा और शैलजा के बीच रिश्तों की इस पुरानी डोर को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सियासी समझदारी में बदल दिया है।
 

कांग्रेस को मिली ऑक्सीजन

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक यह इसलिए मुमकिन हो सका क्योंकि पार्टी की कमान सोनिया गांधी के हाथों में है, अगर राहुल गांधी के हाथ में होती तो उनकी नई नवेली कोटरी अशोक तंवर को बदलने की बजाय हुड्डा और शैलजा को ही किनारे लगाती भले ही विधानसभा चुनाव में पार्टी दहाई से इकाई सीटों पर निबट जाती। लेकिन अब बदले समीकरण से कांग्रेस को आक्सीजन मिल गई है और अगर पार्टी ने अपने पत्ते ठीक से चले तो मुकाबला भी भाजपा और कांग्रेस के ही बीच सीधा होगा।

हुड्डा और शैलजा की नियुक्तियों से हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस जाटों और दलितों का मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा को कांग्रेस और इनेलो के दोनों धड़ों के बीच जाट वोटों के बंटवारे और अपने साथ गैर जाट वोटों के ध्रुवीकरण, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ईमानदार साफ सुथरी छवि, अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने से पैदा हुई राष्ट्रवादी भावना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करिश्माई छवि के बल पर दूसरी बार अपनी सरकार बनाने का पूरा भरोसा है। बताया जाता है कि हरियाणा कांग्रेस में सियासी वर्चस्व को लेकर चलने वाली लड़ाई में कांग्रेस मीडिया विभाग के संयोजक रणदीप सुरजेवाला भी एक ध्रुव हैं। 

सुरजेवाला का बढ़ता गया कद 

रणदीप के पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला कभी हरियाणा में कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे और लंबे समय तक वह कांग्रेस की किसान सेल के अध्यक्ष भी रहे। लेकिन भजनलाल के बाद जिस तरह भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कद बढ़ा और शमशेर सिंह सुरजेवाला की उम्र बढ़ी उससे वह पीछे छूट गए। रणदीप सुरजेवाला ने बतौर युवक कांग्रेस अध्यक्ष कांग्रेस की युवा राजनीति में अपने आक्रामक तेवरों से और इनेलो अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला के खिलाफ चुनाव लड़कर अपनी जुझारू छवि बनाई और जैसे जैसे कांग्रेस में राहुल गांधी की भूमिका बढ़ी रणदीप सुरजेवाला का कद भी बढ़ा और जल्दी ही वह कांग्रेस की आवाज बन गए। 

राहुल से निकटता और अपने बढ़े हुए कद के बाद रणदीप को हरियाणा में हुड्डा के विकल्प के तौर पर भी देखा जाने लगा। राहुल की टीम के नए रणनीतिकारों ने हरियाणा की राजनीति में हुड्डा परिवार के वर्चस्व को तोड़ने के लिए ही युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे अशोक तंवर को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनवाया। कहा जाता है कि तंवर को रणदीप सुरजेवाला का आशीर्वाद और संरक्षण मिलता रहा। लेकिन तंवर अपेक्षित नतीजे नहीं दे पाए और खुद रणदीप भी जींद उपचुनाव में बुरी तरह हार गए। इससे हुड्डा ने हाईकमान पर अपना दबाव बढ़ा दिया।

हुड्डा से हुई सोनिया की लंबी बातचीत

लेकिन लोकसभा चुनावों में सोनीपत से भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रोहतक से उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा की हार ने उनकी आवाज को भी कमजोर किया। इधर कांग्रेस में राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद तीन महीने तक नए अध्यक्ष को लेकर रस्साकसी चलती रही। आखिर जब सोनिया गांधी ने फिर से कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला तो उन्होंने लगातार हरियाणा में सभाएं कर रहे हुड्डा को बुलाकर लंबी बातचीत की और फिर शैलजा और हुड्डा के बीच आपसी समझदारी बनी, जिसके बाद शैलजा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल का नेता और प्रदेश चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाया गया।

शैलजा को अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने दलितों की नाराजगी से भी खुद को बचा लिया। क्योंकि अगर दलित अशोक तंवर को हटाकर हुड्डा या किसी और गैरदलित को प्रदेश पार्टी की कमान दी जाती तो उस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगता और बसपा इसे विधानसभा चुनाव में मुद्दे के रूप में उछालती, जिसका नुकसान हो सकता था।

लेकिन शैलजा न सिर्फ दलित हैं बल्कि महिला भी हैं और उनके पिता भी हरियाणा कांग्रेस के कद्दावर दलित नेता रहे हैं। इसलिए अंबाला से लेकर सिरसा तक के इलाके में शैलजा का आधार है और प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पूरे हरियाणा में दलितों में शैलजा के जरिए कांग्रेस अपनी पैठ बनाने की कोशिश करेगी जबकि रोहतक सोनीपत हिसार की जाट पट्टी से लेकर पूरे हरियाणा में जाटों के बीच हुड्डा कांग्रेस के खेवनहार बनेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed