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सुप्रीम कोर्ट: युवक ने बताईं अपने बचपन की दर्दनाक घटनाएं, कहा- मां मुझे पीटती थी और बाथरूम में बंद कर देती थी

Mon, 11 Apr 2022 10:49 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 11 Apr 2022 10:49 PM IST
सार

तलाक के एक मामले में एक युवक ने सुप्रीम कोर्ट को अपने बचपन की दर्दनाक घटनाओं के बारे में बताया। उसने बताया कि उसकी मां किस तरह से उसे बुरी तरह मारा पीटा करती थी।

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son recounts traumatic childhood in Supreme Court saying I was beaten up and locked in bathroom by my mother news in Hindi
Supreme Court - फोटो : PTI (File)

विस्तार

'मुझे पीटा जाता था। मुझे घंटों तक बाथरूम में बंद कर दिया जाता था। मैं अपनी मां से बात नहीं करना चाहता...' ये बातें सुप्रीम कोर्ट में एक युवक ने अपने बचपन की दर्दनाक स्मृतियों के बारे में बताते हुए कहीं। इस युवक के माता-पिता दो दशक से तलाक की लड़ाई में फंसे हुए हैं। 

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न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की पीठ ने युवक को समझाने की कोशिश की कि वह अपनी मां से बात करे। पीठ ने युवक और उसके माता-पिता से चैंबर में 45 मिनट से अधिक समय तक बातचीत भी की। पीठ एक वैवाहित विवाद के मामले में सुनवाई कर रही थी। 
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मामले में पति तलाक चाहता है और पत्नी इसका विरोध कर रही है। महिला की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि उसे अपने बेटे से बात करने की अनुमति मिलनी चाहिए, जो अपने पिता के साथ रहता है। न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने युवक से कहा कि वह अपनी मां से बात करे।
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27 साल के युवक ने अदालत को बताया कि जब मैं केवल सात साल का था तब मेरी मां मुझे अक्सर पीटा करती थी और बाथरूम में बंद कर देती थी। उसने कहा कि मां से बात करता हूं तो वो सब डरावनी बातें मुझे फिर से याद आ जाती हैं। मेरे पिता ने कभी मुझ पर हाथ नहीं उठाया।

महिला के अधिवक्ता ने कहा कि युवक गलत बातें बता रहा है और ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। पीठ ने कहा कि युवक अब 27 साल का है और उसे बातों की समझ है। वहीं, युवक के पिता की वकील ने कहा कि उसकी मां ने अपने बेटे की कस्टडी पाने के लिए कभी कोई कोशिश नहीं की।


दोनों की शादी साल 1998 में हुई थी। साल 2002 में पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक मांगा था और अलग रहने लगा था। अदालत ने कहा कि हम एक महीने बाद फिर से युवक और उसके माता-पिता से मिलेंगे। 

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