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Somnath Swabhiman Parv: स्वाभिमान है सौराष्ट्र में प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ, पूरे वर्ष होंगे अध्यात्मिक आयोजन
Tue, 06 Jan 2026 08:13 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 06 Jan 2026 08:13 AM IST
सार
गुजरात के सौराष्ट्र स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग- सोमनाथ विध्वंस से पुनरुत्थान तक की जीवंत गवाही देता है। इस साल श्रद्धालुओं की आस्था के इस केंद्र पर अटूट आस्था के 1,000 वर्ष का उत्सव मनाया जाएगा। सोमनाथ मंदिर में 8 जनवरी से स्वाभिमान पर्व शुरू होगा। 11 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें शामिल होंगे।
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पीएम मोदी सोमनाथ मंदिर से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
गुजरात का सोमनाथ मंदिर सिर्फ पत्थरों से निर्मित एक कलात्मक इमारत या पूजा का स्थान भर नहीं है बल्कि भारतीय सभ्यता का सबसे जीवंत उदाहरण है। 1026 में पहली बार विदेशी आक्रांताओं ने इस पर हमला किया। इसके बाद भी निशाना बनाया गया लेकिन हिंदू समाज की सभ्यतागत आस्था को तोड़ने की कोशिशें कामयाब नहीं हुईं।
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सोमनाथ मंदिर को पहले से कहीं ज्यादा भव्य स्वरूप प्रदान किया। विध्वंस से पुनरुत्थान तक 1,000 वर्षों के इसी सफर पर 8 से 11 जनवरी तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत 11 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। वर्ष 2026 इस वजह से भी बेहद खास है कि क्योंकि यह मंदिर के आधुनिक पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ है। 1951 में इसकी आधुनिक प्राण प्रतिष्ठा सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों का नतीजा थी।
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इस दोहरे उपलक्ष्य में मंदिर में पूरे साल भर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्देश्य भारत की सभ्यतागत विरासत, शाश्वत तीर्थस्थल के विनाश और पुनरुद्धार की गाथा और राष्ट्रीय स्वाभिमान को प्रदर्शित करना है। मंदिर में विशेष पूजा, महाआरती और आध्यात्मिक प्रवचन होंगे। 1026 में महमूद गजनी के आक्रमण से लेकर मौजूदा विजय गाथा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रकाशन और डिजिटल कंटेंट साझा किया जाएगा।
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विनाश और पुनर्निर्माण का एक लंबा इतिहास
1299 ईसवी में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति अलाफ खान ने फिर से मंदिर को तोड़ दिया और उसके टुकड़े दिल्ली ले गए। एक बार फिर हिंदू शासकों ने इसे दोबारा बनवाया। n 1394 में गुजरात के गवर्नर मुजफ्फर खान ने फिर तोड़ा। इसके बाद ढांचे को संभवत: फिर से बनाया गया जिसे 1459 ईसवी में महमूद बेगड़ा ने फिर अपवित्र कर दिया। n 1669 ईसवी तक यह फिर आस्थावान हिंदुओं का पवित्र तीर्थस्थल रहा, जब औरंगजेब ने देश के अन्य हिंदू मंदिरों के साथ इसे भी तोड़ने का आदेश दिया। 1702 में औरंगजेब ने सोमनाथ मंदिर को धराशायी करने का आदेश दिया और 1706 में यहां मस्जिद का निर्माण किया गया।
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महमूद गजनवी ने सबसे पहले किया था हमला
स्वतंत्रता सेनानी केएम मुंशी ने सोमनाथ के इतिहास को बेहद विस्तृत ढंग से लिखा है, जिसके मुताबिक महमूद गजनवी ने सबसे पहले मंदिर इस मंदिर पर आक्रमण किया। महमूद गजनवी 18 अक्तूबर 1025 को सोमनाथ पर धावा बोलने के इरादे से आगे बढ़ा और करीब 80 दिन बाद 6 जनवरी 1026 को किलेबंद मंदिर शहर पर हमला किया। मंदिर बचाने में करीब 50 हजार रक्षकों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसके बाद महमूद ने मंदिर को लूटा, गर्भगृह को अपवित्र किया, और शिवलिंग को तोड़ दिया।
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अहिल्याबाई होल्कर ने फिर से रखी नींव
इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने सोमनाथ की पवित्र परंपरा को पहचाना और 1783 में पास में ही एक नया मंदिर बनवाया। इसे फिर किसी विनाश से बचाने के लिए लिंग को ऊपरी मंदिर के ठीक नीचे एक गुप्त भूमिगत मंदिर में रखा गया। यह मंदिर सिर्फ एक पूजास्थल नहीं था बल्कि भारतीय समाज, धर्म, विज्ञान और संस्कृति का एक व्यवस्थित केंद्र रहा है। 11वीं सदी के फारसी विद्वान अल बिरूनी ने अपनी किताब अल-हिंद में लिखा है, यह विद्वानों, कलाकारों, संगीतकारों, नर्तकियों और कारीगरों का घर था और भारत को पूर्वी अफ्रीका और चीन से जोड़ने वाले समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। बिरूनी ने मंदिर के अकूत खजाने का जिक्र भी किया है, जिसका शिखर सोने का था, मूर्तियां बेशकीमती रत्नों से जड़ी थीं।