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Earth: पृथ्वी के भीतर 2,700 KM गहराई में बहती हैं ठोस चट्टानें, वैज्ञानिकों ने डी लेयर के रहस्य से उठाया पर्दा

Fri, 13 Jun 2025 05:30 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 13 Jun 2025 05:30 AM IST
सार

पृथ्वी की सतह से 2,700 किमी नीचे की डी लेयर में ठोस चट्टानें धीरे-धीरे बहती हैं। ईटीएच ज्यूरिख के वैज्ञानिकों ने पाया कि पोस्ट-पेरोव्स्काइट क्रिस्टल के संरेखण से भूकंपीय तरंगों की गति बदलती है। यह खोज भूगर्भ विज्ञान की पुरानी पहेलियों को सुलझाने में अहम मानी जा रही है।

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Solid rocks flow 2,700 KM deep inside the Earth, scientists unveiled the mystery of D layer
पृथ्वी - फोटो : Freepik

विस्तार

पृथ्वी के अंदर लगभग 2,700 किलोमीटर नीचे बहती हुईं ठोस चट्टानें वास्तव में भूगर्भीय चमत्कार हैं। ये पूरी तरह द्रव नहीं होतीं, लेकिन इतने ताप और दाब में लचीली हो जाती हैं कि वे सालों, दशकों या लाखों वर्षों में धीरे-धीरे बहने लगती हैं और यही प्रक्रिया पृथ्वी को सजीव बनाए रखती है। यानी भूकंप, ज्वालामुखी और प्लेटों की हलचलें यह जरूर बताती हैं कि पृथ्वी सिर्फ सतह पर नहीं, बल्कि अंदर से भी जिंदा है।  
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अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने भूगर्भ विज्ञान की दशकों पुरानी पहेलियों को हल करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है। ईटीएच ज्यूरिख के वैज्ञानिकों के इस शोध के केंद्र में है पृथ्वी की एक रहस्यमयी परत (डी लेयर) जो मेंटल और कोर के बीच है और करीब 2,700 किमी नीचे पाई जाती है। दशकों से यह जानने की कोशिश हो रही थी कि क्यों भूकंप से उठने वाली तरंगें इस परत से गुजरते समय अचानक अपनी गति व व्यवहार बदल देती हैं।
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अब खुला राज, बहती हैं ठोस चट्टानें
ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल और प्रयोगशाला परीक्षणों के जरिए यह साबित किया है कि पोस्ट-पेरोव्स्काइट क्रिस्टल एक निश्चित दिशा में संरेखित (एलाइन) होते हैं। जब ये क्रिस्टल समान दिशा में जुड़ते हैं तो तरंगों को कम प्रतिरोध मिलता है और वे तेजी से यात्रा करती हैं। यह अनोखी संरचना तभी बनती है जब ठोस चट्टानें पृथ्वी में धीरे-धीरे बहती हैं। ठीक वैसे जैसे सतह पर नदियां बहती हैं।

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अब खुला राज, बहती हैं ठोस चट्टानें
ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल और प्रयोगशाला परीक्षणों के जरिए यह साबित किया है कि पोस्ट-पेरोव्स्काइट क्रिस्टल एक निश्चित दिशा में संरेखित (एलाइन) होते हैं। जब ये क्रिस्टल समान दिशा में जुड़ते हैं तो तरंगों को कम प्रतिरोध मिलता है और वे तेजी से यात्रा करती हैं। यह अनोखी संरचना तभी बनती है जब ठोस चट्टानें पृथ्वी में धीरे-धीरे बहती हैं। ठीक वैसे जैसे सतह पर नदियां बहती हैं।
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