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Yasin Malik: यासीन मलिक को सुप्रीम कोर्ट में देख हैरान हुए जज, सॉलिसिटर जनरल ने गृह सचिव को लिखा पत्र
Fri, 21 Jul 2023 09:54 PM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 21 Jul 2023 09:54 PM IST
सार
जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख यासीन मलिक की शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया। उसको भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यासीन मलिक की मौजूदगी पर नाराजगी जाहिर की
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यासीन मलिक
- फोटो : ANI
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विस्तार
जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख यासीन मलिक की शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया। उसको भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यासीन मलिक की मौजूदगी पर नाराजगी जाहिर की और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे बड़ी चूक बताते हुए कहा, ऐसे तो यासीन फरार भी हो सकता था।
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अगर यासीन को मार दिया जाता तो
सॉलिसिटर जनरल ने गृह सचिव को पत्र में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट में यासीन मलिक की मौजूदगी एक गंभीर सुरक्षा चूक थी, वह भाग सकता था या उसे जबरन ले जाया जा सकता था या उसे मार दिया जा सकता था। गृह सचिव को लिखे अपने पत्र में आगे कहा कि अगर कोई अप्रिय घटना होती तो सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ जाती।
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सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यासीन मालिक के मामले की गंभीरता को देखते हुए जब तक सीआरपी कोड की धारा 268 के तहत आदेश लागू है तो जेल अधिकारियों के पास उसे जेल परिसर से बाहर लाने की कोई शक्ति नहीं थी और न ही उनके पास ऐसा करने का कोई कारण था।
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हर कोई रह गया हैरान
सॉलिसिटर जनरल ने आगे कहा कि इस सुरक्षा चूक को गंभीर मामला मानते हुए एक बार फिर से इसे अपने व्यक्तिगत संज्ञान में लाएं ताकि आपकी ओर से उचित कार्रवाई और कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि जब खबर मिली कि जेल अधिकारी व्यक्तिगत रूप से यासीन मलिक को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के लिए व्यक्तिगत रूप से ला रहे हैं, तो हर कोई हैरान रह गया।
आजीवन कारावास की सजा काट रहा यासीन
आतंकी फंडिंग मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे यासीन मलिक को जम्मू अदालत के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया था। यह मामला जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। हालांकि जस्टिस दत्ता के खुद को सुनवाई से अलग करने के कारण मामले में सुनवाई तो नहीं हुई लेकिन जज इस बात से हैरान थे कि मलिक व्यक्तिगत रूप से पेश कैसे हुआ जबकि उसकी शारीरिक उपस्थिति का कोई आदेश पारित ही नहीं किया गया था। मलिक को सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों की निगहबानी में उच्च सुरक्षा वाली जेल वैन में तिहाड़ से शीर्ष अदालत परिसर में लाया गया।
वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हो मलिक
जस्टिस सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो मलिक वर्चुअल माध्यम से न्यायालय को संबोधित कर सकता है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा, हम तैयार हैं, लेकिन उसने इन्कार कर दिया। अन्यथा यह सबसे सरल माध्यम है। पीठ ने आदेश दिया कि मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें जस्टिस दत्ता सदस्य नहीं हों।
क्या है मामला
पीठ 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के 1989 के अपहरण मामले में जम्मू की एक निचली अदालत के 20 सितंबर, 2022 के आदेश के खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई कर रही थी। निचली अदालत ने मलिक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने और गवाहों से जिरह करने की अनुमति दी थी। सीबीआई ने यासीन मलिक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए इसका विरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील पर 24 अप्रैल को नोटिस जारी किया था, जिसके बाद जेल में बंद यासीन मलिक ने 26 मई को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर अपने मामले की पैरवी के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति मांगी थी। सहायक रजिस्ट्रार ने 18 जुलाई को मलिक के अनुरोध को स्वीकार किया और कहा कि शीर्ष अदालत आवश्यक आदेश पारित करेगी। हालांकि तिहाड़ जेल अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से इस फैसले को गलत समझा कि मलिक को मामले पर बहस करने के लिए शीर्ष अदालत के सामने पेश किया जाना है।