{"_id":"6026dc1ad1aecd08dc2de446","slug":"soldiers-continue-retreating-in-pangog-so-area-in-eastern-ladakh","type":"story","status":"publish","title_hn":"पैंगोंग के बाद डेपसांग के जटिल मसले के भी बातचीत से सुलझने की उम्मीद","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पैंगोंग के बाद डेपसांग के जटिल मसले के भी बातचीत से सुलझने की उम्मीद
Sat, 13 Feb 2021 01:21 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, दिल्ली
पीटीआई, दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 13 Feb 2021 01:21 AM IST
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भारत और चीन की सेना(फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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सेना और सरकार के रणनीतिकार यकीन जता रहे हैं कि पैंगोंग झील में भारत और चीन की सेना के पीछे हटने की सहमति के बाद डेपसांग के पुराने और जटिल मसले को भी बातचीत से ही सुलझा लिया जाएगा। लिलाजा कोर कमांडर से पहले ब्रिगेडियर स्तर पर बातचीत की अलग से तैयारी की जा रही है। संभव है कि पैंगोंग के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से सेनाओं के पूरी तरह हटने से पहले ही डेपसांग पर बातचीत शुरू हो जाए।
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पूर्वी लद्दाख में पैंगोग त्सो (झील) इलाके में सैनिकों को पीछे हटाने के लिए चीन के साथ समझौते के बाद बीजिंग और भारत की सेनाएं इस इलाके में सैनिकों की संख्या को लगातार कम कर रही हैं और बख्तरबंद वाहनों को पीछे ले जा रही हैं।
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सेना के सूत्रों ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने बताया कि पैंगोंग के दक्षिण तट पर टकराव के बिंदु से युद्धक टैंक और बख्तरबंद वाहनों को हटाया जा रहा है जबकि उत्तरी तट के क्षेत्रों से जवानों को वापस बुलाया जा रहा है।
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सूत्रों ने यह भी बताया कि बख्तरबंद वाहनों की वापसी का काम लगभग पूरा हो गया है और दोनों पक्षों द्वारा बनाए गए अस्थायी ढांचों को अगले कुछ दिन में गिराया जाएगा। इस संबंध में एक सूत्र ने कहा कि पीछे हटने की प्रक्रिया में वक्त लगेगा क्योंकि दोनों ही पक्ष सैनिकों और सैन्य वाहनों को वापस बुलाने की सत्यापन प्रक्रिया एक साथ कर रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि जवानों और बख्तरबंद वाहनों की वापसी केवल टकराव के बिंदु वाले स्थानों से ही हो रही है जहां दोनों ओर के जवान बिलकुल आमने-सामने थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया था कि चीन के साथ पैंगोंग झील के उत्तरी एवं दक्षिणी किनारों पर सेनाओं के पीछे हटने का समझौता हो गया है और भारत ने इस बातचीत में कुछ भी खोया नहीं है।
राजनाथ सिंह ने बताया कि पैंगोंग झील क्षेत्र में चीन के साथ सेनाओं के पीछे हटने का जो समझौता हुआ है, उसके अनुसार दोनों पक्ष अग्रिम तैनाती चरणबद्ध तरीके से हटाएंगे। सीमा पर नौ महीने तक गतिरोध जारी रहने के बाद यह सफलता मिली है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन अपनी सेना की टुकडि़यों को उत्तरी किनारे में फिंगर आठ के पूर्व की की तरफ रखेगा। इसी तरह भारत भी अपनी सेना की टुकडि़यों को फिंगर तीन के पास अपने स्थाई ठिकाने धन सिंह थापा पोस्ट पर रखेगा। उन्होंने कहा कि इसी तरह की कार्रवाई दक्षिणी किनारे वाले क्षेत्र में भी दोनों पक्षों द्वारा की जाएगी।
ज्ञात हो कि चीनी सेना ने फिंगर-4 और फिंगर-8 के बीच के क्षेत्रों में बंकरों समेत कई विभिन्न निर्माण कार्यों का अंजाम दिया था और फिंगर-4 से आगे भारतीय सेना की गश्त बाधित कर दी थी। भारतीय सेना ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। चीन के साथ नौ दौर की सैन्य वार्ता में भारत ने पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-4 से फिंगर-8 के बीच चीनी सेनाओं को हटाए जाने पर जोर दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि 'इस बात पर भी सहमति हो गई है कि पैंगोंग झील से पूर्ण तरीके से सेनाओं के पीछे हटने के 48 घंटे के अंदर वरिष्ठ कमांडर स्तर की बातचीत हो तथा बाकी बचे हुए मुद्दों पर भी हल निकाला जाए।' रक्षा मंत्री ने कहा कि 'समझौते पर बुधवार से अमल शुरू कर दिया गया।' उन्होंने शुक्रवार को कहा कि अन्य लंबित समस्याओं को अगली वार्ताओं में उठाया जाएगा।
डेपसांग पर कोर कमांडर से पहले ब्रिगेडियर स्तर की बातचीत के तैयारी
सेना और सरकार के कूटनीतिक रणनीतिकार यकीन जता रहे हैं कि पैंगोंग झील में भारत और चीन की सेना के पीछे हटने की सहमति के बाद डेपसांग के पुराने और जटिल मसले को भी बातचीत से ही सुलझा लिया जाएगा।
इसके लिए कोर कमांडर से पहले ब्रिगेडियर स्तर पर बातचीत की अलग से तैयारी की जा रही है। संभव है कि पैंगोंग केउत्तरी और दक्षिणी किनारे से दोनों सेनाओं के पूरी तरह हटने से पहले ही डेपसांग पर बातचीत का सिलसिला शुरु हो जाए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एलान के मुताबिक पैंगोंग में सेनाओं के पूर्व स्थिति में जाने के 48 घंटे के भीतर भारत और चीन के कोर कमांडर बातचीत करेंगे। सेना के अनुमान के मुताबिक पूरी प्रक्रिया में पंद्रह दिन से एक महीने का वक्त लग सकता है।
दरअसल सामरिक लिहाज से पैंगोंग से भी ज्यादा महत्वपूर्ण डेपसांग भारत के लिए करीब एक दशक से सिरदर्द बना हुआ है। चीन की पिपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने 2002 और 2013 मेें समझौते और आपसी यकीन को धता बताते हुए कुल करीब 1000 वर्ग कि लोमीटर जमीन को विवाद में फंसा रखा है।
पैंगोंग पर हुए मौजूदा सहमति में झील के फिंगर एरिया के साथ डेपसांग केपेट्रोलिंग प्लाइंट (पीपी)- 10,11,12,12ए,13 और 17ए पर गश्त लगाने पर अनिश्चिकालीन रोक भारतीय सेना को रास नहीं आ रहा।
सेना चाहती है कि इन इलाकों में गश्त जल्द से जल्द शुरु हो। सेना सूत्रों के मुताबिक डेपसांग के वाई जंक्शन पर पीएलए ने इन्फेंट्री ब्रिगेड और टैंग रेजिमेंट लगा रखा है। जिससे भारतीय सेना की अति अहम ठिकाने दौलत बेग ओल्डी में तक आवाजाही सीधे चीनी सेना की नजर में है। 2013 में इस इलाके में 20 दिन तक गंभीर तनातनी और आमने सामने की स्थिति रही थी। बातचीत के बाद गतिरोध तो कम हुआ लेकिन ठोस समाधान अबतक नहीं निकला है।
भारत-चीन तनाव कम करने के लिए शांतिपूर्ण समाधान की कोशिश कर रहे : अमेरिका
अमेरिका ने पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील में सेनाएं हटाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और चीन शांतिपूर्ण समाधान की कोशिश कर रहे हैं। हम स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को संसद में पैंगोंग झील के उत्तरी व दक्षिण किनारों से सेना वापसी को लेकर समझौते की घोषणा की थी।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, हम सीमा पर सेना की वापसी की खबरों पर निकटता से नजर रख रहे हैं। हम तनवा करने के जारी प्रयासों की सराहना करते हैं। दोनों पक्ष विवाद के समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं, ऐसे में हम स्थिति पर नजर रखेंगे।
इससे पहले अमेरिकी सांसद व प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के सदस्य माइकल मैकॉल ने सेना वापस बुलाने के फैसले का स्वगात किया।
उन्होंने कहा, अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए भारत को मजबूती से खड़ा रहते देखना सराहनीय है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पूर्वी व दक्षिण चीन सागर से लेकर मेकोंग और हिमालय में लगातार क्षेत्रीय आक्रामकता का 21वीं सदी में कोई स्थान नहीं है।