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सोलर रेडिएशन: 9-14 नवंबर के बीच दिखी थीं असामान्य सौर गतिविधियां, समय रहते बड़ा खतरा टला
Sun, 30 Nov 2025 04:47 AM IST
लव गौर
अमर उजाला नेटवर्क/ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क/ब्यूरो
Published by: लव गौर
Updated Sun, 30 Nov 2025 04:47 AM IST
सार
ईएसए के मुताबिक, धरती की ओर बढ़ता सीएमई तीव्र इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तूफान के साथ छह घंटे तक पीक पर रहा। अगर किसी खास स्थिति में विमान ऐसी ही किसी सौर गतिविधि की चपेट में आ जाएं, तो उनका कंट्रोल सिस्टम प्रभावित हो सकता है।
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विशेषज्ञों ने कहा-समय रहते ए-320 के सॉफ्टवेयर अपडेट करने से बड़ा खतरा टला
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
मैक्सिको से अमेरिका जा रहे जेटब्लू एयरलाइंस के ए-320 विमान के 30 अक्तूबर को सोलर रेडिएशन की चपेट में आने की घटना ने दुनिया पर मंडराते एक बड़े खतरे को टाल दिया। दरअसल, सौर विज्ञानियों ने इस घटना के बाद 9 से 14 नवंबर के बीच सूरज की असामान्य गतिविधियां दर्ज की थी। ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सॉफ्टवेयर समय पर अपडेट न किया जाना बड़े खतरे को दावत दे सकता था।
यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) के मुताबिक, सूर्य भौतिकी विज्ञानियों ने 9 से 14 नवंबर के बीच सूर्य पर तेज फ्लेयर्स (लपटें फूटने) की दुर्लभ शृंखला देखी। इसने अंतरिक्ष के मौसम को काफी प्रभावित किया। इस दौरान एक तेज एक-क्लास फ्येयर रिकॉर्ड किया गया, जिसके तुरंत बाद एक कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) हुआ जो 1,500 किमी/सेकंड की स्पीड से धरती की ओर बढ़ा। डेनमार्क, स्वीडन जैसे कई नार्डिक देशों में तेज रोशनी वाली सौर गतिविधियां इंसानी आंखों से देखी जा सकती थीं।
ईएसए के मुताबिक, धरती की ओर बढ़ता सीएमई तीव्र इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तूफान के साथ छह घंटे तक पीक पर रहा। अगर किसी खास स्थिति में विमान ऐसी ही किसी सौर गतिविधि की चपेट में आ जाएं, तो उनका कंट्रोल सिस्टम प्रभावित हो सकता है। एलिवेट एलरॉन कंप्यूटर पूरी तरह ठीक से काम न करे तो पायलट के लिए विमान की गति और दिशा को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि फ्लेयर्स की दिशा धरती की तरफ हो तो टेलीकम्युनिकेशन और जीपीएस-बेस्ड नेविगेशन सर्विस बाधित हो सकती। यही नहीं, हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो सिग्नल भी खराब कर सकते हैं।
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11 नवंबर को हुआ था रेडियो ब्लैकआउट
ईएसए के मुताबिक, 11 नवंबर के आसपास एक खास एक्टिव सोलर रीजन देखा गया। इससे चार सोलर फ्लेयर्स और उतनी ही संख्या में सीएमई उत्पन्न हुए, जिनमें तीन का रुख पृथ्वी की ओर था। इस सौर गतिविधि की वजह से यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में 30 से 60 मिनट तक रेडियो ब्लैकआउट हो गया था।
अमेरिका-चीन सबसे ज्यादा प्रभावित
सॉफ्टवेयर अपडेट की वजह से अमेरिका और चीन में विमान सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं। दुनिया की सबसे बड़ी ए-320 ऑपरेटर अमेरिकन एयरलाइंस ने कहा कि उसके 480 विमानों में से 340 को ठीक करने की जरूरत है, जिनमें ज्यादातर को ठीक होने में 24 से 48 घंटे लग सकते हैं। चीन के पास भी ए-320 विमानों की अच्छी-खासी संख्या है। एयर फ्रांस ने शनिवार को अपनी 35 उड़ानों को रद्द किया।
ये भी पढ़ें: Airbus Software: 'ठीक हो चुके हैं 90 फीसदी से अधिक प्लेन', A320 विमान के सॉफ्टवेयर अपडेट पर बोला DGCA
एयरबस सॉफ्टवेयर मामला गंभीर दिक्कत
उड्डयन मामलों के विशेषज्ञ हर्षवर्धन के मुताबिक, एयरबस ए-320 विमानों में सॉफ्टवेयर का मामला एक गंभीर तकनीकी दिक्कत से जुड़ा था। उन्होंने कहा, अच्छी बात है कि इसका पता चल गया। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाता तो बड़ी तबाही का कारण बन सकता था। उन्होंने कहा कि यह समस्या जल्द सुलझा ली जाएगी लेकिन इस पर अभी नजर बनाए रखी जानी चाहिए।
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यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) के मुताबिक, सूर्य भौतिकी विज्ञानियों ने 9 से 14 नवंबर के बीच सूर्य पर तेज फ्लेयर्स (लपटें फूटने) की दुर्लभ शृंखला देखी। इसने अंतरिक्ष के मौसम को काफी प्रभावित किया। इस दौरान एक तेज एक-क्लास फ्येयर रिकॉर्ड किया गया, जिसके तुरंत बाद एक कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) हुआ जो 1,500 किमी/सेकंड की स्पीड से धरती की ओर बढ़ा। डेनमार्क, स्वीडन जैसे कई नार्डिक देशों में तेज रोशनी वाली सौर गतिविधियां इंसानी आंखों से देखी जा सकती थीं।
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ईएसए के मुताबिक, धरती की ओर बढ़ता सीएमई तीव्र इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तूफान के साथ छह घंटे तक पीक पर रहा। अगर किसी खास स्थिति में विमान ऐसी ही किसी सौर गतिविधि की चपेट में आ जाएं, तो उनका कंट्रोल सिस्टम प्रभावित हो सकता है। एलिवेट एलरॉन कंप्यूटर पूरी तरह ठीक से काम न करे तो पायलट के लिए विमान की गति और दिशा को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि फ्लेयर्स की दिशा धरती की तरफ हो तो टेलीकम्युनिकेशन और जीपीएस-बेस्ड नेविगेशन सर्विस बाधित हो सकती। यही नहीं, हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो सिग्नल भी खराब कर सकते हैं।
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11 नवंबर को हुआ था रेडियो ब्लैकआउट
ईएसए के मुताबिक, 11 नवंबर के आसपास एक खास एक्टिव सोलर रीजन देखा गया। इससे चार सोलर फ्लेयर्स और उतनी ही संख्या में सीएमई उत्पन्न हुए, जिनमें तीन का रुख पृथ्वी की ओर था। इस सौर गतिविधि की वजह से यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में 30 से 60 मिनट तक रेडियो ब्लैकआउट हो गया था।
अमेरिका-चीन सबसे ज्यादा प्रभावित
सॉफ्टवेयर अपडेट की वजह से अमेरिका और चीन में विमान सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं। दुनिया की सबसे बड़ी ए-320 ऑपरेटर अमेरिकन एयरलाइंस ने कहा कि उसके 480 विमानों में से 340 को ठीक करने की जरूरत है, जिनमें ज्यादातर को ठीक होने में 24 से 48 घंटे लग सकते हैं। चीन के पास भी ए-320 विमानों की अच्छी-खासी संख्या है। एयर फ्रांस ने शनिवार को अपनी 35 उड़ानों को रद्द किया।
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एयरबस सॉफ्टवेयर मामला गंभीर दिक्कत
उड्डयन मामलों के विशेषज्ञ हर्षवर्धन के मुताबिक, एयरबस ए-320 विमानों में सॉफ्टवेयर का मामला एक गंभीर तकनीकी दिक्कत से जुड़ा था। उन्होंने कहा, अच्छी बात है कि इसका पता चल गया। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाता तो बड़ी तबाही का कारण बन सकता था। उन्होंने कहा कि यह समस्या जल्द सुलझा ली जाएगी लेकिन इस पर अभी नजर बनाए रखी जानी चाहिए।