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Hindi News ›   India News ›   Social Media: Disputed content will have to be removed in 72 hours, tech companies will have to ensure this

Social Media : सोशल मीडिया से 72 घंटों में हटानी होगी विवादित सामग्री, टेक कंपनियों को ये सुनिश्चित करना होगा

Sat, 29 Oct 2022 06:05 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 29 Oct 2022 06:05 AM IST
सार

संशोधन के तहत, ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपने नियमों, विनियमों, गोपनीयता नीति और उपयोगकर्ता समझौते की जानकारी अपने उपयोगकर्ताओं को अंग्रेजी के अलावा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में देनी होगी।

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Social Media: Disputed content will have to be removed in 72 hours, tech companies will have to ensure this
social media new - फोटो : istock

विस्तार

सोशल मीडिया कंपनियों पर नकेल कसने के लिए पैनल गठन की अधिसूचना के मुताबिक, टेक कंपनियों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल एप या दोनों पर सेवा नियमों और निजता नीति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। प्रस्तावित बदलावों में इंटरमीडियरी कंपनियों के लिए भारतीय संविधान द्वारा नागरिक अधिकारों का सम्मान करना भी जरूरी होगा। शिकायतों के निस्तारण के लिए 72 घंटे की व्यवस्था होगी। 

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मतलब इंटरमीडियरी टेक कंपनी को आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के संबंध में मिली शिकायत के प्राप्त होने पर उसके बारे में प्राथमिक कार्रवाई 72 घंटे के भीतर करनी होगी। किसी अन्य तरह की शिकायत पर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई करनी होगी, जिससे आपत्तिजनक कंटेंट वायरल न हो सके।
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टेक कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उसके कंप्यूटर रिसोर्स का उपयोग करने वाला व्यक्ति किसी भी ऐसी सामग्री को न होस्ट करें, न वितरित करें, न प्रदर्शित करें और न अपलोड करे, न प्रकाशित करें और न शेयर करें, जो किसी दूसरे व्यक्ति की हो और जिस पर यूजर का अधिकार न हो।
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अश्लील, अपमानजनक, बाल यौन शोषण, दूसरे की निजता भंग करने वाली, जाति-वर्ण-जन्म के आधार पर उत्पीड़न करने वाली या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए प्रेरित करने वाली, अथवा देश के किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाली कंटेट का प्रचार नहीं किया जाए।

22 भारतीय भाषाओं में भी देनी होगी जानकारी
संशोधन के तहत, ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपने नियमों, विनियमों, गोपनीयता नीति और उपयोगकर्ता समझौते की जानकारी अपने उपयोगकर्ताओं को अंग्रेजी के अलावा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में देनी होगी। यह सुनिश्चित भी करना होगा कि उनकी सेवाएं उपयोगकर्ताओं को मिलती रहे। इसमें निजता और पारदर्शिता का खास ध्यान रखा जाए। 


ये हैं भारतीय भाषाएं
हिंदी, असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलगु, उर्दू, बोडो, संथाली, मैथिली और डोगरी।

ऑनलाइन यूजर्स के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी
देश का कानून सर्वोपरि है। आईटी कानून में संशोधन का मकसद ऑनलाइन यूजर्स के अधिकारों की सुरक्षा करना है। -अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय आईटी मंत्री

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