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बंगाल में अनलॉक 1.0 के पहले दिन ही उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

Tue, 02 Jun 2020 03:10 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 02 Jun 2020 03:10 AM IST
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Social distancing norms flouted across west Bengal on first day of Unlock 1.0
west bengal unlock1.0 - फोटो : social media

पश्चिम बंगाल में अनलॉक 1.0 के पहले दिन ही सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आईं। बसों की भारी भड़कम संख्या, बस स्टैंडों पर कार्यालय जाने वालों की लंबी कतारें और महत्वपूर्ण जंक्शनों पर ट्रैफिक की अव्यवस्था ने पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण के खतरे को कई गुणा और बढ़ा दिया है। राज्य में 271 नए मामले आने से सरकार की चिंता बढ़ा दी है। वहीं राजधानी कोलकाता में  भी 54 नए मामले सामने आए।

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राज्य में इस भीड़ के बढ़ने का कारण कुछ हद तक निजी बसों को बताया जा रहा है जो कि सरकार के दिशा-निर्देशों का धड़ल्ले से उल्लंघन करते नजर आईं। लेकिन इनमें से अधिकतर निजी बसें सरकारी नियमों के कारण रोड पर उतरने से भी परहेज कर रहे हैं। क्योंकि सरकार ने बसों को सीट भर ही यात्रियों को बैठाने की अनुमति दी है।  हालांकि ऑटो-रिक्शा वाले ज्यादातर सरकारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते नजर आ रहे थे लेकिन वे यात्रियों से दोगुना किराया वसूल रहे हैं।
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यात्री सरकारी दिशा-निर्देशों का नहीं कर रहे पालन
अनलॉक 1.0 में भी सरकार ने सार्वजनिक परिवहन में बस की सवारी करने के लिए मास्क और दस्ताने अनिवार्य कर दिए हैं, लेकिन ज्यादातर लोग मास्क जरूर पहने हुए थे पर किसी ने दस्ताने नहीं पहन रखे थे। वहीं फेरी सेवाओं की शुरुआत भी सोमवार से हुई, लेकिन यहां भीड़ कम दिखाई दी।
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इन सब के बीच बाजारों में भी काफी भीड़ नजर आ रही थी। सेंट्रल कोलकाता, बुर्राबाजार, पोस्टा, कैनिंग स्ट्रीट और रवींद्र सरानी जैसे व्यापारिक जिलों के बाजारों में भीड़ देखी गई।

सोशल मीडिया पर लोगों ने अनलॉक 1.0 के पहले दिन का अनुभव किया साझा
वहीं दो महीने से अधिक समय के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने पहली बार अपने कार्यालय जाने के अनुभव को साझा किया।  लोगों ने कहा कि सड़कों पर स्थिति पूरी तरह से भयावह है। लंबा ट्रैफिक जाम, बसों में भीड़, ऑटो और कैब में अनुमति से अधिक यात्री, बाइक पर बच्चे, बिना हेलमेट और मास्क के अधिकांश लोग यात्रा कर रहे थे। 

हुगली जिले के सेरामपुर में एक लेखिका ने एक ऐसा ही अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि  मोटरबाइक द्वारा सेरामपुर से हिंद मोटर की यात्रा करते समय, मैंने सभी निजी बसों  में  भीड़ देखा और  कई लोग दरवाजे से भी लटके नजर आ रहे थे। प्रत्येक जगह सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही थी।  

पश्चिम बंगाल में  सरकार के दिशा निर्देश के अनुसार निजी कार्यालय 8 जून से अब 50% कर्मचारियों के साथ काम कर सकते हैं। लेकिन अगर ये कर्मचारी  भी यात्रा करना शुरू करेंगे तो भीड़ के और ज्यादा बढ़ने की संभावना है। 

जनजीवन पटरी पर लाने की कोशिश

कोरोना वायरस के चलते दो महीने से ज्यादा समय से जारी लॉकडाउन में छूट के बाद पश्चिम बंगाल में राजधानी कोलकाता समेत ज्यादातर इलाकों में जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है। राज्य सरकार ने कुछ शर्तों और ढेर सारी रियायतों के साथ राज्य में जारी लॉकडाउन को 15 जून तक बढ़ा दिया है।

सरकार ने सोमवार से तमाम धार्मिक स्थलों को खोलने का फैसला किया है। इसके साथ ही सिनेमा और टेलीविजन धारावाहिकों की भी सशर्त शूटिंग की अनुमति दे दी गई है। चाय और जूट उद्योग में भी पहली जून से सौ फीसदी मजदूरों के साथ काम शुरू हो गया है।

इस बीच, अगले दो सप्ताह में पांच लाख प्रवासियों की संभावित वापस से संक्रमण तेजी से फैलने का अंदेशा है। बीते चार दिनों के दौरान लगभग रोजाना नए तीन सौ से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर मामले राजधानी कोलकाता के हैं। इसके अलावा अब उन तमाम जिलों में भी नए मरीज सामने आने लगे हैं जहां हाल तक एक भी मरीज नहीं था।

सरकारी आंकड़ों में बताया गया है कि मई के पहले सप्ताह से राज्य की स्थिति में गिरावट का दौर शुरू हुआ था। चार मई को जहां 23 में से सात जिलों में कोरोना का एक भी मामला नहीं था, वहीं अब बीते एक सप्ताह के दौरान कालिम्पोंग को छोड़ कर बाकी तमाम जिलों में नए मामले सामने आए हैं।

कोलकाता में प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर व चर्च रहा बंद

इस बीच, राज्य में सोमवार को अधिकतर धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए, लेकिन कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर और कैथड्रल चर्च को फिलहाल बंद ही रखा गया है। सोमवार को कालीघाट मंदिर के कपाट बंद रहे और श्रद्धालुओं ने मंदिर के बाहर से ही पूजा की। इसी तरह, कैथड्रल चर्च को जनता के लिए बंद रखा गया, लेकिन कर्मचारियों व साफ सफाई के लिए इसे खोला गया।

वहीं, सियालदाह के चर्च ऑफ आवर लेडी ऑफ डलर्स में एक बार दस लोगों को ही प्रार्थना की अनुमति दी गई। इस बीच, बंगाल इमाम संघ ने लोगों से घरों से ही इबादत करने की अपील की है। संघ ने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए फिलहाल मस्जिदों को खोलने की आवश्यकता नहीं है।  

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