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Vikram-1: रॉकेट विक्रम-1 के तीसरे चरण का स्काईरूट ने किया सफल परीक्षण, इस साल के आखिर में लांच करने की है योजना
Thu, 19 May 2022 10:11 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 19 May 2022 10:11 PM IST
सार
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर विक्रम-1 के तीसरे चरण के टेस्ट को कलाम-100 नाम दिया गया। विक्रम-1 रॉकेट के इंजन के तीसरे चरण के टेस्ट को 5 मई को नागपुर में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
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रॉकेट
- फोटो : twitter.com/SpaceX
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विस्तार
अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने रॉकेट विक्रम-1 के तीसरे चरण का सफल परीक्षण नागपुर में किया। यह देश का पहला निजी तौर पर निर्मित सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है। विक्रम-1 को इस साल के अंत तक लॉन्च किए जाने की योजना है। स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ और सह संस्थापक पवन कुमार चंदाना ने सफल टेस्ट के बारे में बृहस्पतिवार को एलान किया। उन्होंने कहा कि पूर्ण अवधि के स्टेज चरण का टेस्ट हमारे व्हीकल विक्रम-1 के लिए एक अहम मील का पत्थर है। इसके सफल परीक्षण ने हमारा आत्मविश्वास बढ़ाया है।
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पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया तीसरे टेस्ट का नाम
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर विक्रम-1 के तीसरे चरण के टेस्ट को कलाम-100 नाम दिया गया। विक्रम-1 रॉकेट के इंजन के तीसरे चरण के टेस्ट को 5 मई को नागपुर में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। रॉकेट इंजन ने स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान पूर्ण अवधि को सफलतापूर्वक पूरा किया। तीसरे चरण का बर्न टाइम 108 सेकंड था।
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स्काईरूट के सह संस्थापक नागा भारत डाका ने कहा कि कलाम-100 इस साइज के क्लास रॉकेट चरण में सर्वश्रेष्ठ है। इसने बेहतर प्रदर्शन देने के लिए सभी कार्बन कंपोसाइट संरचना का इस्तेमाल किया। सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड के मनीष नुआल ने कहा कि हम इस रॉकेट के सफल परीक्षण का हिस्सा बनकर काफी गौरवान्वित हैं।
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लॉन्च व्हीकल है विक्रम-1
विक्रम-1 एक छोटा लॉन्च व्हीकल है जो 225 किलोग्राम तक के पेलोड को अंतरिक्ष में 500 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जा सकेगा। इसका उद्देश्य छोटे सैटेलाइट को लॉन्च करना है। इसका नाम भारतीय अंतरिक्ष अभियान के जनक कहे जाने वाले विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। कंपनी विक्रम सीरीज के तीन लॉन्च व्हीकल बना रही है। विक्रम-2 रॉकेट का पेलोड 450 किलोग्राम और विक्रम-3 का पेलोड 580 किलोग्राम होगा।
2018 में हुई थी स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना
इसरो के पूर्व इंजीनियरों ने चंदाना और डाका ने 2018 में स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड नामक स्टार्टअप बनाया था। चंदाना आईआईटी खड़गपुर और डाका आईआईटी मद्रास से पढ़े हैं। इसरो में चंदाना ने देश के सबसे बड़े रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 जैसे अहम प्रोजेक्ट पर काम किया जबकि डाका ने इसरो में फ्लाइट कंप्यूटर इंजीनियर के तौर पर तमाम अहम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयरों पर काम किया। स्काईरूट पहला ऐसा स्टार्टअप है जिसने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ रॉकेट बनाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।