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केदारनाथ आपदा के 6 साल, भीषण त्रासदी को याद कर आज भी होती है सिहरन

Sun, 16 Jun 2019 06:03 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sun, 16 Jun 2019 06:03 AM IST
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Six years of Kedarnath disaster, the horrific tragedy in Uttarakhand
केदारनाथ त्रासदी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

केदारनाथ आपदा को आज पांच साल पूरे हो गए। उस भीषण त्रासदी को याद करके आज भी लोग सिहर जाते हैं। सोलह व सत्रह जून को बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिलों में भारी तबाही मचाई। आपदा से उत्तराखंड को जान-माल की भारी क्षति हुई। पर्यटन कारोबार की कमर टूट गई। जानकारों का मानना है कि आपदा के जख्मों को पूरी तरह से भरने में अब भी कई साल लग जाएंगे। राहत और पुनर्निर्माण के मरहम से हालात सुधारने के प्रयास जारी हैं। मगर पर्यावरण सरोकारों से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकारों ने जख्म तो भरे हैं पर आपदा से सबक नहीं सीखा है।

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भीषण थी वह त्रासदी

सोलह जून 2103 की वह आपदा बेहद भीषण थी। आपदा में 4,400 से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए। 4,200 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूट गया। इनमें 991 स्थानीय लोग अलग-अलग जगह पर मारे गए। 11,091 से ज्यादा मवेशी बाढ़ में बह गए या मलबे में दबकर मर गए। ग्रामीणों की 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई। 2,141 भवनों का नामों-निशान मिट गया। 100 से ज्यादा बड़े व छोटे होटल ध्वस्त हो गए। यात्रा मार्ग में फंसे 90 हजार यात्रियों को सेना ने और 30 हजार लोगों को पुलिस ने बाहर निकाला। आपदा में नौ नेशनल हाई-वे, 35 स्टेट हाई-वे और 2385 सड़कें 86 मोटर पुल, 172 बड़े और छोटे पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए।

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आपदा से पहले गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग रामबाड़ा और गरुड़चट्टी से होकर गुजरता था, लेकिन मंदाकिनी नदी के उफनती लहरों ने रामबाड़ा का अस्तित्व ही खत्म कर दिया और इसी के साथ यह रास्ता भी तबाही की भेंट चढ़ गया। इसके बाद 2014 से यात्रा का रास्ता बदल दिया गया और चट्टी सूनी हो गई। 2017 में केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों ने जोर पकड़ा तो गरुड़चट्टी को संवारने की कवायद भी शुरू हुई। अक्टूबर 2018 में रास्ता तैयार कर लिया गया।

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पुननिर्माण पर 2300 करोड़ खर्च


आधिकारिक सूत्रों की माने तो विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक वित्त पोषित उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट के तहत 2700 करोड़ रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए। इनमें से 2,300 करोड़ रुपये की राशि से सड़कों, पुलों, पहाडियों के ट्रीटमेंट, बेघर लोगों के आवासों का निर्माण किया गया। प्रोजेक्ट के तहत 2,382 भवनों का निर्माण किया गया।

केदारघाटी में पुनर्निर्माण पर खास फोकस


प्रदेश में काबिज रही सरकारों ने केदारघाटी में पुनर्निर्माण पर खास फोकस किया। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के मुताबिक पुनर्निर्माण अभियान में केदारनाथ मंदिर और उसके परिसर को उसके पुराने स्वरूप लाने का कामयाब कोशिश हुई। 



अक्टूबर 2017 में केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों के शिलान्यास को पहुंचे मोदी ने चट्टी को आबाद करने की इच्छा जताई थी। केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में शुमार है। पीएमओ समय-समय पर पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति पर रिपोर्ट भी लेता है।

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