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Sitamarhi Project: सीतामढ़ी में लगेगी मां सीता की 251 फीट ऊंची प्रतिमा, क्षेत्र के पर्यटन में होगी वृद्धि

Tue, 28 Feb 2023 03:22 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 28 Feb 2023 03:22 PM IST
सार

Sitamarhi Project: प्रदर्शनी में पहुंचे सीतामढ़ी से सांसद सुनील कुमार पिंटू ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण ज़ोरों पर है, तो वहीं रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में माता सीता के प्राकट्य-क्षेत्र सीतामढ़ी में माता सीताजी की 251 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना के साथ भव्य मंदिर निर्माण के लिए प्रयास तेजी से जारी है...

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Sitamarhi Project: 251 feet tall statue of Goddess Sita will be installed in Sitamarhi
रामायण रिसर्च काउंसिल के कार्यों की जानकारी देते हुए सीतामढ़ी से सांसद सुनील कुमार पिंटू और अन्य - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के बनने से उत्तर प्रदेश के पर्यटन में वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा है। उसी तरह सीतामढ़ी में माता सीता की 251 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित होने से इस क्षेत्र के पर्यटन में बड़ा विकास होने की उम्मीद लगाई जा रही है। यही कारण है कि इस मामले से जुड़े बिंदुओं पर लोगों को जानकारी देने के लिए दिल्ली के प्रगति मैदान में नक्षत्र प्रदर्शनी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इसके द्वारा लोगों को पूरे सीतामढ़ी प्रोजेक्ट की जानकारी दी जा रही है।

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प्रदर्शनी में पहुंचे सीतामढ़ी से सांसद सुनील कुमार पिंटू ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण ज़ोरों पर है, तो वहीं रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में माता सीता के प्राकट्य-क्षेत्र सीतामढ़ी में माता सीताजी की 251 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना के साथ भव्य मंदिर निर्माण के लिए प्रयास तेजी से जारी है। प्रतिमा के चारों ओर वृत्ताकार रूप से 108 ऐसी प्रतिमाओं का निर्माण होना है, जिनसे माताजी के जीवन दर्शन का उल्लेख हो सके।

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उन्होंने कहा कि प्रतिमाओं का दर्शन नौका विहार करते हुए किया जा सके, क्षेत्र को इस तरह से विकसित किया जाएगा। सीतामढ़ी में राघोपुर बखरी स्थित क्षेत्र में शोध केंद्र, अध्ययन केंद्र, डिजिटल लाइब्रेरी जैसे कई कार्यों को भी प्रारंभ किया जाएगा। जानकारी दी गई कि उक्त संबंधित स्थल पर रामायण के सभी प्रमुख पात्रों की प्रतिमाएं दिव्य रूप में स्थापित होगी, वहीं विभिन्न राज्यों में स्थापित प्रमुख देवी-देवताओं के लोकप्रिय प्रतिमाओं को उसी रूप में वहां स्थापित किया जाएगा।

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क्षेत्र में पहली बार माता सीताजी भगवती के रूप में स्थापित होंगी। इसके लिए 51 शक्ति-पीठों, इंडोनेशिया, बाली, अशोक वाटिका से मिट्टी एवं जल लाकर और नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में माता बगलामुखी सिद्ध पीठ से ज्योति लाकर माता सीताजी को भगवती के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों के प्रमुख मंदिरों से भी मिट्टी एवं जल लाकर माताजी के गर्भ-गृह को विकसित किया जाएगा।  

रामायण रिसर्च काउंसिल संस्था के सचिव पिताम्बर मिश्र ने बताया कि सीतामढ़ी में माता सीताजी के प्रतिमा की स्थापना और भव्य मंदिर निर्माण के लिए एक समिति श्रीभगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति गठित की गई है। इस समिति के अध्यक्ष सीतामढ़ी के स्थानीय सांसद पिंटू हैं, तो अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष कामेश्वर चौपाल को बनाया गया है, जो रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य भी हैं। इस समिति में भारत के हर राज्य से एक सदस्य और विश्व के ऐसे देश जहां अधिक सनातनी रहते हैं, उन देशों से एक-एक नाम शामिल किए जाने हैं।

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