सीता लेट नहीं पाती, मिया से उठा नहीं जाता

पुनीत शर्मा/अमर उजाला, मथुरा Updated Sun, 09 Oct 2016 02:56 AM IST
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हथिनी सीता और मिया
हथिनी सीता और मिया - फोटो : Amar Ujala

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सर्कस वालों ने दो हथनियों को अपने इशारे पर नचाने के लिए जगह-जगह गहरे जख्म बना डाले। पैर की हड्डियां तोड़ दी गईं। अब पचपन साल की हथिनी सीता बैठ नहीं पाती है, जबकि 43 साल की मिया से बैठकर उठा नहीं जा रहा है।
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सीता और मिया की कराह और दर्द को जानना है तो मथुरा से तीस किलोमीटर दूर दिल्ली-आगरा हाईवे किनारे चुरमुरा में एलिफेंट कंजरवेशन एंड केयर सेंटर पर जाइए। यूं तो यहां 20 हाथी हैं। लेकिन, सीता और मिया की कहानी वाकई दर्द भरी है। 
55 साल की हथिनी सीता के आगे वाले दोनों पैर टूट गए हैं। मुड़ नहीं सकते। कोई मूवमेंट नहीं होता। जिसके कारण वह बैठ ही नहीं पाती है। इनकी देखरेख करने वालों का कहना है कि पिछले तीन महीने से हमने सीता को लेटे हुए नहीं देखा है। आराम न मिल पाने के कारण वह चिड़चिड़ी भी हो गई है। अगर कोई उसकी सूंड़ पर प्यार करने के लिए हाथ फेरता है तो आंसू निकलने लगते हैं आंख से। 
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