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सुप्रीम कोर्ट: गुजरात दंगों पर एसआईटी ने कहा, हमारी जांच पर जकिया जाफरी के अलावा किसी ने उंगली नहीं उठाई

Thu, 09 Dec 2021 03:44 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 09 Dec 2021 03:44 PM IST
सार

गुजरात दंगों की जांच करने वाली एसआईटी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जकिया जाफरी की याचिका का विरोध किया। अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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SIT tells Supreme Court that nobody raised finger in our investigation of 2002 Gujarat riots except petition by Zakia Jafri
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

साल 2002 में गुजरात में हुए दंगों की जांच करने वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हमारी जांच पर किसी ने उंगली नहीं उठाई सिवाय उस याचिका के जो जाकिया जाफरी ने दायर की है। जाफरी ने अपनी याचिका में राज्य में हुई इस हिंसा में बड़ी साजिश होने का आरोप लगाया है।  

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गुजरात दंगों में एसआईटी की ओर से तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को क्लीन चिट दी गई है। एसआईटी के इस कदम को जकिया जाफरी ने चुनौती दी है। जकिया के पति और कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में हिंसा के दौरान मौत हो गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुरक्षित रखा फैसला
न्यायाधीश एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने जकिया जाफरी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। एसआईटी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि मामले में शीर्ष अदालत को निचली अदालत और गुजरात हाईकोर्ट के फैसलों के अनुरूप ही निर्णय लेना चाहिए।
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रोहतगी ने कहा कि अन्यथा यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के कुछ उद्देश्यों की वजह से अंतहीन अभ्यास की तरह यूं ही चलता रहेगा। तीस्ता सीतलवाड़ इस मामले में दूसरी याचिकाकर्ता हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ में न्यायाधीश खानविलकर के अलावा दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार भी थे।

पूर्व की सुनवाई में एसआईटी ने कही थी ये बात
इस याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि जकिया जाफरी ने लगभग 12 हजार पन्नों की विरोध याचिका दायर की है और इसे शिकायत मानने के लिए कहा है। रोहतगी ने कहा था कि ऐसा करके जकिया इस मामले को गर्म रखना चाहती हैं और यह एक दुर्भावनापूर्ण संकेत है।


रोहतगी ने पीठ से कहा कि यही कारण है कि इन दंगों में राज्य सरकार का हाथ होने की बात कही जा रही है। इस पर पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा कि यह राज्य की ओर से प्रायोजित दंगा था। इसके बाद इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार के लिए स्थगित कर दी गई।

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