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धर्मस्थल मामला: एसआईटी ने तीन कार्यकर्ताओं को भेजा समन, हाजिर न होने पर जारी होगा गिरफ्तारी वारंट
Sat, 25 Oct 2025 03:52 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 25 Oct 2025 03:52 PM IST
सार
कर्नाटक के धर्मस्थल में कथित तौर पर शवों को दफनाने के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने तीन कार्यकर्ताओं को समन भेजा है। एसआईटी सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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जांच में जुटी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कर्नाटक के धर्मस्थल मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने तीन कार्यकर्ताओं महेश शेट्टी थिमरोडी, टी. जयंत और गिरीश मट्टनावर को सोमवार को हाजिर होने के लिए समन जारी किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अगर ये तीनी कार्यकर्ता एसआईटी के सामने उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ गिरफ्तार वारंट जारी किया जाएगा। धर्मस्थल में कथित रूप से कई लोगों के शवों को गोपनीय तरीके से दफनाया गया था। मामले में एसआईटी की जांच अब सबूतों से छेड़छाड़ल जैसे गंभीर पहलुओं तक पहुंच गई है।
एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच अपने निर्णायण चरण में पहुंच चुकी है और लगभग पूरी होने वाली है। यह मामला अगस्त 2025 में तब शुरू हुआ, जब मंदिर में 1995 से 2014 तक सफाईकर्मी रहे चिनैया ने शिकायत दर्ज कराई कि 2002 से 2014 के बीच मंदिर परिसर में 200 से अधिक अज्ञात शवों को गोपनीय तरीके से दफनाया गया था।
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चिनैया का आरोप था कि इन शवों में वे लोग थे जिनकी सड़क हादसे, हत्या और संदिग्ध परिस्थितियो में मौत हुई थी। कई शवों को कथित तौर पर बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट या पुलिस जांच के दफनाया गया था ताकि गड़बड़ियों को छिपाया जा सके। उसने एक इंसानी खोपड़ी को सबूत के रूप में पेश किया, जिसके बारे में उसका दावा था कि यह उसी स्थान से मिली है। इस खुलासे से लाखों श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश फैला और राज्य सरकार ने तत्काल प्रनब मोहंती की अगुवाई में एसआईटी गठित की। जांच में पता चला कि चिनैया के इन तीनों कार्यकर्ताओं से करीबी संबंध थे, जो सभी 'जस्टिस फॉर सौजन्या' अभियान से जुड़े हैं। यह अभियान 2012 में उडुपी की किशोरी सौजन्या के दुष्कर्म और हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर चल रहा है।
तीनों कार्यकर्ता कौन हैं?
महेश शेट्टी थिमरोडी इस अभियान के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। उन्होंने शिकायत दर्ज होने से पहले कुछ दिनों तक चिनैया को कथित रूप से अपने उजिरे स्थित आवास पर ठहराया था। एसआईटी ने 26 अगस्त को उनके घर पर छापेमारी कर 44 सामान जब्त किए, जिनमें लैपटॉप, 25 वीडियो क्लिप और 21 अतिरिक्त रिकॉर्डिंग वाले मोबाइल फोन शामिल थे। थिमरोडी को सितंबर में रायचूर जिले से निष्कासित किया गया था, क्योंकि उन पर एक पत्रकार पर हमले सहित कुछ अन्य मामलों में आरोप लगे थे। एसआईटी अब यह जांच कर रही है कि उन्होंने इस मामले को सार्वजनिक रूप से सामने लाने में क्या भूमिका निभाई थी।
ये भी पढ़ें: ‘बेबस यात्री NDA की छल वाली नीतियों का सबूत’, बिहार जाने वाली ट्रेनों में भीड़ को लेकर भड़के राहुल गांधी
वहीं, टी. जयंत जो बंगलूरू के सामाजिक कार्यकर्ता हैं और थिमरोडी के सहयोगी भी हैं। उन्होंने कथित रूप से चिनैया को उसकी गिरफ्तारी के बाद तीन दिन अपने पास रखा और फिर उसे गिरीश मट्टनावर और झूठी गवाही के आरोप में फंसी सुजाता भट्ट के साथ खोपड़ी लेकर दिल्ली भेजा। जयंत ने एसआईटी के सामने माना कि उसने मट्टनावर के कहने पर ऐसा किया, लेकिन उसका कोई साजिश करने का इरादा नहीं था। उसने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग देगा और आरोपों का सामना करेगा।
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एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच अपने निर्णायण चरण में पहुंच चुकी है और लगभग पूरी होने वाली है। यह मामला अगस्त 2025 में तब शुरू हुआ, जब मंदिर में 1995 से 2014 तक सफाईकर्मी रहे चिनैया ने शिकायत दर्ज कराई कि 2002 से 2014 के बीच मंदिर परिसर में 200 से अधिक अज्ञात शवों को गोपनीय तरीके से दफनाया गया था।
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चिनैया का आरोप था कि इन शवों में वे लोग थे जिनकी सड़क हादसे, हत्या और संदिग्ध परिस्थितियो में मौत हुई थी। कई शवों को कथित तौर पर बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट या पुलिस जांच के दफनाया गया था ताकि गड़बड़ियों को छिपाया जा सके। उसने एक इंसानी खोपड़ी को सबूत के रूप में पेश किया, जिसके बारे में उसका दावा था कि यह उसी स्थान से मिली है। इस खुलासे से लाखों श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश फैला और राज्य सरकार ने तत्काल प्रनब मोहंती की अगुवाई में एसआईटी गठित की। जांच में पता चला कि चिनैया के इन तीनों कार्यकर्ताओं से करीबी संबंध थे, जो सभी 'जस्टिस फॉर सौजन्या' अभियान से जुड़े हैं। यह अभियान 2012 में उडुपी की किशोरी सौजन्या के दुष्कर्म और हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर चल रहा है।
तीनों कार्यकर्ता कौन हैं?
महेश शेट्टी थिमरोडी इस अभियान के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। उन्होंने शिकायत दर्ज होने से पहले कुछ दिनों तक चिनैया को कथित रूप से अपने उजिरे स्थित आवास पर ठहराया था। एसआईटी ने 26 अगस्त को उनके घर पर छापेमारी कर 44 सामान जब्त किए, जिनमें लैपटॉप, 25 वीडियो क्लिप और 21 अतिरिक्त रिकॉर्डिंग वाले मोबाइल फोन शामिल थे। थिमरोडी को सितंबर में रायचूर जिले से निष्कासित किया गया था, क्योंकि उन पर एक पत्रकार पर हमले सहित कुछ अन्य मामलों में आरोप लगे थे। एसआईटी अब यह जांच कर रही है कि उन्होंने इस मामले को सार्वजनिक रूप से सामने लाने में क्या भूमिका निभाई थी।
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