SIR Row: 'कांग्रेस नेतृत्व-कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाने के लिए विवाद गढ़ते हैं राहुल', राजीव चंद्रशेखर का तंज
भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'आज राजनीति में हर कोई जानता है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची हर राजनीतिक दल के पास जांच के लिए उपलब्ध होती है। राहुल गांधी को इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि वह हर समय छुट्टी पर रहते हैं।'
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को लेकर सियासत जोरों पर है। राहुल गांधी चुनाव आयोग और भाजपा में मिलीभगत का दावा कर रहे हैं। भाजपा इन आरोपों को फर्जी बता रही है। इसी क्रम में केरल भाजपा प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने कहा, 'राहुल गांधी का संवैधानिक संस्थाओं, सरकार और भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाफ कहानियां गढ़ने और आरोप लगाने का पुराना रिकॉर्ड है। हमने 2019 में पुलवामा में यह देखा था। हमने 2008 में मुंबई हमले के दौरान भी यह देखा था। वे हमेशा कहानियां गढ़ते हैं।'
उन्होंने कहा, 'आपको आज ही पूछना चाहिए कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं। मैं आपको अपनी थ्योरी बताता हूं। कांग्रेस पार्टी आज बहुत असंतुष्ट पार्टी है। राहुल गांधी के नेतृत्व में बार-बार हार के बाद कांग्रेस पार्टी उथल-पुथल में है। कांग्रेस पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी ये विवाद गढ़ते हैं।'
भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'आज राजनीति में हर कोई जानता है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची हर राजनीतिक दल के पास जांच के लिए उपलब्ध होती है। राहुल गांधी को इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि वह हर समय छुट्टी पर रहते हैं। इसके लिए हम दोषी नहीं हैं, भारत के लोग दोषी नहीं हैं। अब तक वह ईवीएम को दोष दे रहे थे। अब उन्होंने ईवीएम को छोड़ दिया है, अब वे मतदाता सूची की ओर जा रहे हैं।'
राहुल के आरोप?
इससे पहले दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया था कि भारत के चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना तीसरा कार्यकाल मिला। राहुल गांधी ने कहा, 'नरेंद्र मोदी सिर्फ 25 सीटों के अंतर से प्रधानमंत्री बने। चुनाव आयोग भाजपा को भारत में चुनावी व्यवस्था को नष्ट करने में मदद कर रहा है। चुनाव आयोग हमें महादेवपुर (कर्नाटक विधानसभा क्षेत्र) में आंकड़े नहीं दे रहा है। अगर हम अन्य लोकसभा सीटों पर भी ऐसा करें, तो हमारे लोकतंत्र की सच्चाई सामने आ जाएगी।'
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
आरोपों पर चुनाव आयोग ने पलटवार किया था। चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा था कि अगर कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता अपने विश्लेषण पर विश्वास करते हैं और मानते हैं कि चुनाव आयोग पर उनके आरोप सही हैं, तो उन्हें शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। अगर राहुल ऐसा नहीं करते हैं, तो इसका मतलब होगा कि उन्हें अपने विश्लेषण, निष्कर्षों और बेतुके आरोपों पर विश्वास नहीं है। ऐसी स्थिति में उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। इसलिए उनके पास दो विकल्प हैं- या तो शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर करें या चुनाव आयोग पर बेतुके आरोप लगाने के लिए देश से माफी मांगें।