एसआईआर: हरियाणा-उत्तराखंड समेत कई राज्यों में बढ़ी अंतिम मतदाता सूची की तारीख, जानें कहां कितना बदला शेड्यूल
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण में शामिल कई राज्यों में अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बढ़ा दी गई है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बदलाव हुआ है। यहां अंतिम सूची सात सितंबर के बजाय चार नवंबर को जारी होगी। दिल्ली और कर्नाटक में 20 दिन, तेलंगाना में 18 दिन और ओडिशा में 15 दिन की देरी हुई है। आंध्र प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में भी 11 दिन की बढ़ोतरी की गई है। तीसरे चरण में 16 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण में शामिल कई राज्यों ने अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की तारीख आगे बढ़ा दी है। अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए राज्यों ने अंतिम सूची जारी करने की तारीख 11 से 28 दिन तक आगे बढ़ाई गई है। निर्वाचन आयोग ने 14 मई को 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के तीसरे चरण की शुरुआत की थी। यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से 36.73 करोड़ मतदाताओं को शामिल करते हुए शुरू की गई थी।
तीसरे चरण में शामिल हैं ये राज्य
एसआईआर के तीसरे चरण में दिल्ली, ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, नागालैंड, त्रिपुरा और दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव शामिल हैं।
अंतिम सूची जारी करने की नई तारीखें
- महाराष्ट्र में अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख सबसे अधिक आगे बढ़ाई गई है। यहां अंतिम सूची 7 सितंबर के बजाय अब 4 नवंबर को जारी की जाएगी।
- कर्नाटक और दिल्ली में अंतिम सूची जारी करने की तारीख 20 दिन आगे बढ़ाकर 27 अक्तूबर कर दी गई है।
- तेलंगाना में 18 दिन की बढ़ोतरी की गई है। अब अंतिम मतदाता सूची 19 अक्तूबर को जारी की जाएगी।
- ओडिशा में 15 दिन की देरी हुई है। यहां अंतिम सूची की तारीख 6 सितंबर से बढ़ाकर 21 सितंबर कर दी गई है।
- आंध्र प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में अंतिम सूची जारी करने की तारीख 11-11 दिन आगे बढ़ाई गई है।
एसआईआर के दूसरे चरण में भी बदला था कार्यक्रम
एसआईआर के दूसरे चरण के दौरान भी अलग-अलग कारणों से कार्यक्रम में कई बार बदलाव किया गया था। बिहार में एसआईआर की तैयारी के दौरान निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने दावा किया था कि उसके जमीनी स्तर के कर्मचारियों को बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के कई नागरिक मिले हैं। हालांकि, बाद में निर्वाचन आयोग ने ऐसे लोगों की कोई संख्या या प्रमाण साझा नहीं किया, जो मतदाता सूची में शामिल होने के योग्य नहीं थे। विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग के इन दावों को एसआईआर की आड़ में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के अनुरूप नहीं रहने वाले मतदाताओं को निशाना बनाने की कोशिश करार दिया था।