{"_id":"574bc79e4f1c1bf551108afc","slug":"since-last-6-years-there-was-no-judge-of-the-supreme-court-gone-from-scheduled-caste","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिछले 6 साल में सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंचा कोई अनुसूचित जाति का जज","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
पिछले 6 साल में सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंचा कोई अनुसूचित जाति का जज
टीम डिजिटल/ अमर उजाला,नई दिल्ली
Updated Mon, 30 May 2016 11:10 AM IST
विज्ञापन
11 मई 2010 को रिटायर होने वाले भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन अभी तक सुप्रीम कोर्ट के आखिरी वो जज साबित हो रहे हैं जो अनूसूचित जाति के थे। इसके साथ मौजूदा समय में सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीशों में कोई भी अनुसूचित जाति से नहीं है। यहां यह बात गौर करने वाली है कि देश की कुल जनसंख्या में 16 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति की है। कुछ ऐसे ही हालात अनुसूचित जनजातियों की भी है। इस तरह से देखा जाए तो बीते 6 साल से कोई भी अनुसूचित जाति का न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट नहीं गया है।
विज्ञापन
बात केवल यहीं तक सीमित नहीं है बल्कि सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों के नाम की सिफारिश करने वाले कोलेजियम ने बीते 10 साल में केवल 3 महिला उम्मीदवारों का चुनाव किया। जिनमें से दो न्यायाधीश ज्ञान सुधा मिश्रा और न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। तीसरी न्यायाधीश आर.बानुमठी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम मुख्य न्यायाधीश सहित 4 अन्य न्यायाधीश शामिल होते हैं। विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा रखे गए विवरणों को देखने से यह साफ दिखता है कि कि कोलेजियम ने जजों को आगे बढ़ाने में नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया।
विज्ञापन
इसी माह की शुरुआत में हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीशों एएम खानविल्कर (मध्य प्रदेश) डी वाई चंद्रचूड़ (इलाहाबाद) और अशोक भूषण (केरल ) को न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाले कोलेजियम की सिफारिश पर सर्वोच्च न्यायालय का जज बनाया गया है। हालांकि कोलेजियम ने इन न्यायाधीशों की नियुक्ति में उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज किया है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय गए तीन न्यायाधीशों से मणिपुर हाईकोर्ट के एल के महापात्र, बॉम्बे हाईकोर्ट से डीएच बाघेला और कलकत्ता हाईकोर्ट से मंजुला चेल्लू वरिष्ठता सूची में आगे हैं। हाईकोर्ट के जजों की वरिष्ठता उनकी नियुक्ति के दिन से तय की जाती है।
विज्ञापन