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कर्नाटक: आंतरिक आरक्षण के लिए एससी समुदायों का सर्वेक्षण करेगी सिद्धारमैया सरकार, आयोग की रिपोर्ट स्वीकार

Thu, 27 Mar 2025 10:31 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 27 Mar 2025 10:31 PM IST
सार

कर्नाटक सरकार ने जस्टिस एचएन नागमोहन दास आयोग की अंतरिम रिपोर्ट स्वीकार ली है। इसके साथ ही सरकार ने राज्य में अनुसूचित जातियों (एससी) के बीच आंतरिक आरक्षण तय करने के लिए सर्वे कराने का फैसला किया है।

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Siddaramaiah government will survey SC communities for internal reservation, accepts commission's report
सिद्धारमैया, मुख्यमंत्री, कर्नाटक - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने गुरुवार को जस्टिस एचएन नागमोहन दास आयोग की अंतरिम रिपोर्ट स्वीकार करते हुए राज्य में अनुसूचित जातियों (एससी) के बीच आंतरिक आरक्षण तय करने के लिए सर्वे कराने का फैसला किया। सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की एकल सदस्यीय आयोग ने गुरुवार को  मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद मंत्रिमंडल की बैठक हुई। सरकार पर एससी समुदायों और सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की ओर से से आंतरिक आरक्षण को जल्द लागू करने का दबाव है, जिसके लिए अनुभवजन्य आंकड़ों की जरूरत है। मंत्रिमंडल ने आयोग की सिफारिश के आधार पर डाटा जुटाने का निर्णय लिया है।
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यह आंतरिक आरक्षण 101 अनुसूचित जातियों के लिए निर्धारित 17 प्रतिशत आरक्षण को विभाजित करने के उद्देश्य से है। कानून और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने कहा, मंत्रिमंडल ने जस्टिस नागमोहन दास आयोग की अंतरिम रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। आंतरिक आरक्षण प्रक्रिया को तेज करने के लिए आयोग से नए सर्वे की निगरानी करने का अनुरोध किया गया है। 
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आयोग ने सर्वे के लिए 40 दिन का समय सुझाया है, जिसमें तैयारी के लिए 5-10 दिन और लग सकते हैं। इसलिए आयोग का कार्यकाल दो महीने बढ़ाने का फैसला हुआ है, ताकि 60 दिनों में रिपोर्ट पूरी हो सके। गौरतलब है कि एससी लेफ्ट सहित कुछ समुदायों का आरोप है कि प्रभावशाली उप-जातियां ही अधिक लाभ ले रही हैं, जबकि कई समुदाय हाशिए पर हैं। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
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आयोग ने की चार प्रमुख सिफारिशें
पाटिल ने बताया कि आयोग ने चार प्रमुख सिफारिशें की हैं, जिनमें कर्नाटक में एससी की उप-जातियों के वैज्ञानिक वर्गीकरण के लिए नया सर्वे और डाटा संग्रह, उन्नत तकनीक से 30-40 दिनों में सर्वे पूरा करना, सर्वे के लिए प्रश्नावली तैयार करना, और संसाधन जुटाने व कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए उच्च-स्तरीय समिति गठित करना शामिल है। सर्वे से प्राप्त डाटा के आधार पर आरक्षण का बंटवारा होगा।

सामाजिक कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा ने कहा कि उन्नत तकनीक से 40-45 दिनों में सर्वे संभव है। राज्य में 6,000 पंचायतें और 300 से अधिक शहरी स्थानीय निकाय हैं, और अधिकारियों की टीम इसे तेजी से करेगी। मुख्य सचिव इसकी निगरानी करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और कांग्रेस आंतरिक आरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

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