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Mission: चंद्रयान बस शुरुआत, शुक्रयान, गगनयान और आदित्य एल-1 से ऐसे सैटेलाइट बाजार में बजेगा देश का डंका

Wed, 23 Aug 2023 03:45 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 23 Aug 2023 03:45 PM IST
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सार
वैज्ञानिकों का कहना है कि अब स्पेस मिशन के लिए समूची दुनिया में भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा को और मजबूती से न सिर्फ बड़ा आकाश मिल रहा है, बल्कि दुनिया के वह देश जो स्पेस मिशन में आगे बढ़ना चाहते हैं वह भारत की मदद भी लेने की योजना बना रहे हैं।
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Shukrayan, Gaganyaan and Aditya L-1 will strike India in such satellite market
चंद्रयान 3 - फोटो : social media

विस्तार

अगले कुछ ही घंटे के भीतर समूची दुनिया भारत के मिशन चंद्रयान की चंद्रमा पर होने वाली लैंडिंग को देखेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी सफलता और असफलता दोनों ही दशाओं में भारत के स्पेस मिशन का समूची दुनिया में डंका बजने जा रहा है। दरअसल, महज 12 साल के भीतर चंद्रमा पर भेजे जाने वाले अपने तीनों मिशन चंद्रयान के माध्यम से भारत ने पूरी दुनिया के देशों के स्पेस मिशन में न सिर्फ अलग कामयाबी हासिल की है, बल्कि बहुत बड़ा बूस्टर भी पाया है। 

वैज्ञानिकों का कहना है कि अब स्पेस मिशन के लिए समूची दुनिया में भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा को और मजबूती से न सिर्फ बड़ा आकाश मिल रहा है, बल्कि दुनिया के वह देश जो स्पेस मिशन में आगे बढ़ना चाहते हैं वह भारत की मदद भी लेने की योजना बना रहे हैं। इस कड़ी में मिशन गगनयान, शुक्रयान और आदित्य एल-1 अभियान देश को स्पेस मिशन में पहली पंक्ति में खड़ा कर रहा है।

वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ संदीप सहजपाल कहते हैं कि चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के साथ ही यह तय हो गया था कि भारत अब स्पेस मिशन में दुनिया के सबसे ताकतवर देश की श्रेणी में पहुंच गया है। वह कहते हैं कि देश के लिए आज का दिन इसलिए भी सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि महज 12 साल के भीतर तीसरे चंद्रयान को चंद्रमा पर भेजने वाले वैज्ञानिकों ने यह साबित कर दिया कि उनके पास क्षमता और टेक्नोलॉजी की कोई कमी नहीं है। 

संदीप सहजपाल कहते हैं कि मिशन चंद्रयान के माध्यम से भारत अब समूची दुनिया के सैटेलाइट बाजार में अपना दबदबा भी कायम करने वाला है। उनका तर्क है कि दुनिया के चार मुल्कों को छोड़कर ज्यादातर देश अभी भी स्पेस मिशन में आगे बढ़ने के लिए बड़ी मशक्कत कर रहे हैं। ऐसे देश अब भारत को बहुत बड़ी उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं।

डॉ संदीप सहजपाल कहते हैं कि अभी भी दुनिया के बहुत से ऐसे देश हैं जहां पर स्पेस मिशन को लेकर सिर्फ शुरुआती प्रयास ही किए जा रहे हैं। क्योंकि भारत ने स्पेस मिशन में अपनी बड़ी कामयाबियां हासिल की हैं। इसलिए दुनिया के ऐसे देश भारत एक सैटेलाइट के बहुत बड़े बाजार के तौर पर भी देख रहे हैं। यही नहीं भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा और धड़ाधड़ लांच होने वाले स्पेस मिशन और बड़े प्रोजेक्ट से उनकी प्रतिभा का भी अंदाजा हो रहा है। 

वह कहते हैं कि यही वजह है कि दुनिया के विकसित देश भी आज भारत के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर बड़ी कामयाबियां हासिल करना चाहते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक जापान की स्पेस एजेंसी इसरो के साथ मिलकर चंद्रमा पर एक और बड़ा मिशन लॉन्च करने जा रही है। 

अंतरिक्ष वैज्ञानिक संदीप सहजपाल कहते हैं कि आने वाला वक्त अंतरिक्ष में भारत का होने वाला है। वह कहते हैं जिस तरीके से भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक लगातार स्पेस मिशन को लांच कर रहे हैं वह बताता है कि किस तरह आने वाले दिनों में अंतरिक्ष में इसरो के वैज्ञानिकों और उनके सैटेलाइट की चर्चा होने वाली है। मिशन चंद्रयान और आदित्य एल-1 के बाद जल्द ही भारत वीनस मिशन की भी तैयारी में है। 

सहजपाल कहते हैं कि यह वह स्पेस मिशन है जो भारत को हमेशा पहली पंक्ति में खड़ा करने वाले हैं। हालांकि, भारत के पहले वीनस (शुक्र) मिशन को अभी तक की योजना के मुताबिक दिसंबर 2024 की किसी भी तारीख को लॉन्च करने का था। वैज्ञानिकों के मुताबिक कुछ जरूरी बदलाव के चलते इस मिशन को थोड़ा आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

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