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सवर्ण आरक्षण: शिवसेना ने बताया मोदी सरकार की चाल, कहा- आरक्षण तो दिया, नौकरियां कहां से लाओगे

Thu, 10 Jan 2019 01:19 PM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, मुंबई
न्यूज डेस्क, मुंबई Published by: Nilesh Kumar Updated Thu, 10 Jan 2019 01:19 PM IST
सार

  • सवर्ण गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने पर शिवसेना ने दी प्रतिक्रिया
  • शिवसेना के मुखपत्र सामना में संपादकीय लेख के माध्यम से की आलोचना
  • कहा— महाराष्ट्र में भी दिया है आरक्षण, पर नौकरियां ही नहीं है

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Shivsena said reservation for upper caste is modi government's funda, where are job
नरेंद्र मोदी-उद्धव ठाकरे

विस्तार

सवर्ण गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने को संसद से मंजूरी मिलने के एक दिन बाद शिवसेना ने गुरुवार को आश्चर्य जताते हुए कहा कि आरक्षण दे देने के बाद नौकरियां कहां से आएंगी। गुरुवार को शिवसेना ने आश्चर्य व्यक्त किया कि नौकरियां कहां से आएंगी। पार्टी ने साथ ही चेतावनी दी कि अगर यह एक चुनावी चाल है तो यह महंगा साबित होगी।

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शिवसेना ने कहा कि मराठा समुदाय को भी महाराष्ट्र में आरक्षण दिया गया है लेकिन सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि नौकरियां कहां है। मालूम हो कि संसद ने बुधवार को सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है।
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शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के एक संपादकीय में कहा है कि जब सत्ता में बैठे लोग रोजगार और गरीबी दोनों मोर्चो पर विफल होते हैं तब वे आरक्षण का कार्ड खेलते हैं। लेख में  पूछा गया है कि अगर यह वोट के लिए लिया गया निर्णय है तो यह महंगा साबित होगा। 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद रोजगार का क्या होगा और नौकरी कहां से मिलेगी।

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हर साल 80-90 लाख रोजगार की जरुरत

केंद्र और महाराष्ट्र और महाराष्ट्र दोनों जगह सत्ताधारी भाजपा के एनडीएम गठबंधन में शामिल पार्टी शिवसेना ने कहा कि भारत में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी हर महीने 13 लाख बढ़ रही है। 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों को नौकरी देना अपराध है लेकिन बाल श्रम लगातार जारी है।


सामना में कहा गया है कि देश में रोजगार की दर को संतुलित बनाए रखने के लिए हर साल 80 से 90 लाख नए रोजगारों की जरूरत है, लेकिन यह गणित कुछ समय से असंतुलित है।

सामना ने अपने मराठी संस्करण में कहा है कि पिछले दो सालों में नौकरी के अवसर बढ़ने के बजाय कम हुए हैं। नोटबंदी एवं जीएसटी लागू किये जाने के कारण करीब 1.5 करोड़ से लेकर दो करोड़ नौकरियां गई हैं। युवा लाचार दिख रहे हैं। 

प्रधानमंत्री के पकौड़ा तलने वाले बयान पर ली चुटकी

शिवसेना ने दावा किया कि 2018 में रेलवे में 90 लाख नौकरियों के लिए 2.8 करोड़ लोगों ने आवेदन किया। इसके अलावा मुंबई पुलिस में 1,137 पदों के लिए चार लाख से अधिक लोगों ने आवेदन किया और कई आवेदक आवश्यक योग्यता से अधिक शैक्षणिक योग्यता रखते थे।



सामना के लेख में पकौड़ा तलने वाले बयान पर भी चुटकी ली गई है। कहा गया है कि सरकार के 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद क्या योग्य युवा कुछ हासिल कर पाएंगे। युवाओं को पकौड़ा तलने की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री को आखिरकार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देना पड़ा।

(इनपुट: भाषा)

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