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ShivSena in Saamana: 'चार बार मुख्यमंत्री रहा, राज्यपाल ने कभी पेड़ा नहीं खिलाया', सामना में पवार के सहारे शिवसेना का वार
Mon, 04 Jul 2022 08:27 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Mon, 04 Jul 2022 08:27 AM IST
सार
एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तो देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। आज विधानसभा में बहुमत परीक्षण भी होना है। इस बीच शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर वार किया है। लिखा है, महाराष्ट्र में सरकार बदलने से हमारे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी सबसे ज्यादा खुश हैं।
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एकनाथ शिंदे व देवेंद्र फडणवीस को मिठाई खिलाते राज्यपाल
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
महाराष्ट्र में लंबी चली सियासी उठापटक के बीच नई सरकार का गठन हो चुका है। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री तो देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। आज विधानसभा में बहुमत परीक्षण भी होना है। इस बीच शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर वार किया है। सामना में शिवसेना ने एनसीपी चीफ शरद पवार के हवाले से लिखा है कि वह कहते हैं कि 'मैं चार बार मुख्यमंत्री रहा, लेकिन राज्यपाल ने कभी पेड़ा नहीं खिलाया।'
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राज्यपाल अंग्रेजों की तरह खुश
सामना में शिवसेना ने लिखा, महाराष्ट्र में सरकार बदलने से हमारे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी सबसे ज्यादा खुश हैं। अंग्रेजों ने जब क्रांतिकारी भगत सिंह को फांसी दी थी, तब वे खुश थे। उन्हीं अंग्रेजों की तरह राज्यपाल भी खुश हैं। आगे लिखा है, उद्धव ठाकरे जब मुख्यमंत्री बने थे तब राज्यपाल खुश नहीं थे। या फिर राजभवन स्थित पेड़े की दुकान बंद हो गई थी।
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क्या है पूरा मामला
दरअसल, सियासी ड्रामे के बीच बागी विधायक एकनाथ शिंदे और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस पिछले दिनों राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान दोनों की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश किया गया था, जिसके बाद राज्यपाल ने दोनों नेताओं को मिठाई खिलाई। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद शरद पवार का बयान सामने आया कि मैं चार बार मुख्यमंत्री रह चुका हूं, लेकिन राज्यपाल ने एक बार भी पेड़ा नहीं खिलाया।
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भगवाधारी विधायक जुगनू भी नहीं
शिवसेना ने सामना में लिखा, शिवसेनाप्रमुख का स्मारक चेतना और ऊर्जा का सूर्य है। ये भगवाधारी विधायक उसके आगे जुगनू भी नहीं हैं। शिवसेना में रहने के दौरान तेज, रुआब, हिम्मत, सम्मान व स्वाभिमान था। 'कौन आया, रे कौन आया, शिवसेना का बाघ आया' ऐसी गर्जना की जाती थी, लेकिन वैसा कोई दृश्य अब देखने को नहीं मिला। विधायकों के चेहरे उतरे हुए थे, उनका पाप उनके मन को कचोट रहा था, ऐसा उनके चेहरों से साफ प्रतीत हो रहा था।