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मुंबई: पटोले के इस्तीफे से शिवसेना खफा, फिर भी सामना में लिखा- पवार के नजरिये में दम है
Sat, 06 Feb 2021 07:49 PM IST
योगेश साहू
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: योगेश साहू
Updated Sat, 06 Feb 2021 07:49 PM IST
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शिवसेना नेता संजय राउत
- फोटो : ANI
कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख के पद पर बालासाहेब थोराट की जगह नाना पटोले को नियुक्त करने और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष पद से पटोले के इस्तीफे को लेकर लगता है प्रदेश सरकार में उसकी सहयोगी शिवसेना खुश नहीं है और शनिवार को पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में उसने इसके संकेत भी दिए।
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सामना के संपादकीय में शिवसेना ने यह भी कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के उस कथित रुख में भी दम है कि तीनों गठबंधन सहयोगी विधानसभा अध्यक्ष के पद को लेकर अब विचार-विमर्श के बाद फैसला लेंगे।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए पटोले ने इस हफ्ते की शुरूआत में विधानसभा अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि राज्य में एक मार्च से विधानसभा का बजट सत्र शुरू होना है। राज्य में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है।
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सामना के संपादकीय में कहा गया है कि कांग्रेस को पांच साल के लिए विधानसभा अध्यक्ष का पद दिया गया था न कि बीच में ही इस पद पर चुनाव कराने के लिए जिससे बचा जाना चाहिए था।
शिवसेना ने कहा कि राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि तीनों दल साथ बैठेंगे और फैसला करेंगे कि विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए क्या करना है। एक बात निश्चित है कि पवार के नजरिये में दम है।
इसमें कहा गया कि यद्यपि संगठनात्मक बदलाव कांग्रेस का अंदरूनी मामला है फिर भी इस बात को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है कि फैसलों का सरकार पर असर न हो।
शिवसेना ने कहा कि दो साल पहले, स्थिति ऐसी थी कि कोई भी नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान लेने को तैयार नहीं था। थोराट ने यह जिम्मेदारी ली और विधानसभा चुनावों में पार्टी को उम्मीद से ज्यादा सीटें मिलीं।
सामना में कहा गया कि संकट के समय थोराट ने जिम्मेदारी ली। नागपुर में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने दो सीटें जीतीं। अगर गांधियों (कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के संभावित संदर्भ में) कुछ रैलियों को संबोधित किया होता तो विदर्भ में कांग्रेस की सीटों की संख्या बढ़ सकती थी।
शिवसेना ने कहा कि पटोले के चयन से लगता है कि कांग्रेस ज्यादा आक्रामक चेहरे के पक्ष में है लेकिन अत्यधिक आक्रामकता भी अच्छी नहीं। संपादकीय में किसानों व मजदूरों के लिये काम करने वाले सीधे-बेलाग और आक्रामक नेता के तौर पर पटोले की तारीफ की गई है लेकिन सुझाव भी दिया कि तीन दलों वाली सरकार के सुचारू कामकाज के लिये संयम अहम है।