Bihar: शिवानंद तिवारी का नीतीश कुमार पर हमला, कहा- जरा भी गैरत होगी तो महागठबंधन का साथ नहीं छोड़ेंगे
शिवानंद तिवारी ने कहा कि अभी जो चर्चा, अफवाह या हवा चल रही है, इसकी जिम्मेदार कांग्रेस है। उसे समझना चाहिए नीतीश कुमार की पहल पर ही विपक्षी एकता शुरू हुई थी। इंडिया गठबंधन के लिए नीतीश कुमार ने प्रयास किया था। लेकिन कांग्रेस पार्टी अपनी हेकड़ी से बाज नहीं आती।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश कल गणतंत्र दिवस मनाएगा और पटना की राजनीति में आज बड़ी हलचल है। हवा बह रही है कि नीतीश कुमार पिछले साल दूसरी बार महागठबंधन में लौटे थे। इंडिया गठबंधन का हिस्सा बने थे और अब साथ छोड़ सकते हैं। इस सवाल और संभावनाओं पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के करीबी, वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत की। शिवानंद तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार में जरा भी गैरत होगी तो वह महागठबंधन का साथ नहीं छोड़ेंगे। अगर छोड़ दिया तो इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा। इसके साथ शिवानंद तिवारी ने यह भी जोड़ा कि चौपाए को तो खूंटे से बांधा जा सकता है, लेकिन दो पाए को कौन बांध पाया है?
तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार जाना ही चाहेंगो तो कौन रोक पाएगा। शिवानंद तिवारी बिहार में अपने मूल्य की राजनीति करने वाले नेताओं में जाने जाते हैं। वह कहते हैं कि उन्होंने लालू प्रसाद यादव की तुलना में नीतीश कुमार के साथ अधिक काम किया है। लालू प्रसाद का साथ छोड़कर समता पार्टी में नीतीश के साथ आए थे। नीतीश ने ही मुझे पहली बार विधायक बनाया। राज्यसभा में भेजा। इसलिए वह नीतीश के मिजाज को बखूबी समझते हैं। नीतीश भी मूल्यों की राजनीति करते हैं। शिवानंद ने कहा कि जहां तक मेरा मानना है कि नीतीश कुमार लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के साथ बने रहेंगे। लोकसभा चुनाव 2024 में सब मिलकर लड़ेंगे और बिहार की जनता भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए को कड़ा जवाब देगी।
कांग्रेस की जड़ में शरारत है, नीतीश के परिवार का कटाक्ष कांग्रेस के लिए था
शिवानंद तिवारी ने कहा कि अभी जो चर्चा, अफवाह या हवा चल रही है, इसकी जिम्मेदार कांग्रेस है। उसे समझना चाहिए नीतीश कुमार की पहल पर ही विपक्षी एकता शुरू हुई थी। इंडिया गठबंधन के लिए नीतीश कुमार ने प्रयास किया था। लेकिन कांग्रेस पार्टी अपनी हेकड़ी से बाज नहीं आती। सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण उसे नीतीश कुमार को संगठन का संयोजक बनाने की खुद पहल करनी चाहिए थी। राजनीति के क्षेत्र में मौजूदा राष्ट्रीय नेताओं में नीतीश कुमार की छवि है। लेकिन यहां कांग्रेस ने राजनीतिक बदमाशी की। मुझे लगता है कि कर्पूरी ठाकुर के जन्मशती वर्ष में नीतीश कुमार का परिवारवाद का तंज कांग्रेस के लिए था। शिवानंद कहते हैं कि वह मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य को विवादास्पद मानते हैं। लेकिन कांग्रेस को आप देखिए तो वहां सोनिया, राहुल प्रियंका के अलावा कौन है? यह राजद पर नहीं था। लेकिन भाजपा के लिए अंध भक्ति दिखा रही मीडिया ने इससे राष्ट्रीय जनता दल को जोड़ दिया। मेरे विचार में रोहिणी आचार्य का ट्वीट भी सही नहीं था। लोगों ने नीतीश कुमार के तंज को समझने में जल्दबाजी की है।
शिवानंद तिवारी का कहना है कि नीतीश कुमार 2015 में राजद के साथ महागठबंधन के बैनर तले थे। तब भी लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की यही स्थिति थी। 2022 में फिर साथ आए तो स्थिति वही रही। कोई बदलाव नहीं हुआ था। इसलिए नीतीश कुमार का परिवारवाद पर राजनीतिक कटाक्ष राजद और लालू प्रसाद के परिवार पर नहीं था। यदि ऐसा होता तो 2022 में नीतीश आए ही क्यों?
बिहार के जनमानस में लालू प्रसाद और नीतीश दोनों का दबदबा
कर्पूरी ठाकुर का जन्मशती वर्ष था। बिहार में तीन कार्यक्रम आयोजित हुए। एक कार्यक्रम नीतीश कुमार की जद(यू) का, दूसरा लालू प्रसाद की अध्यक्षता में राजद ने और तीसरा भाजपा ने आयोजित किया था। शिवानंद तिवारी कहते हैं कि तीनों कार्यक्रमों को आप देखेंगे तो पाएंगे कि भाजपा का कार्यक्रम इसके मुकाबले में कहीं नहीं था। आशय यह कि अभी भाजपा चाहे जितना हुंकार भरे, लेकिन नीतीश कुमार और लालू प्रसाद की तुलना में वह कहीं नहीं ठहरती।
शिवानंद तिवारी कहते हैं कि नीतीश कुमार उनके पास आए थे। तब उनकी बात हुई थी। कुछ समय पहले भी बात हुई। नीतीश अपनी कहते रहे और शिवानंद ने अपनी कहा। तिवारी कहते हैं कि नीतीश और लालू प्रसाद की आपस में कोई गलतफहमी नहीं है। अभी हाल में दोनों नेता मिले थे। आपसी सहमति से ही मंत्रालय बदला गया। इसलिए जहां तक मेरा प्रश्न है, मैं(शिवानंद तिवारी) अभी नीतीश के द्वारा राजद का साथ छोड़ देने की कल्पना भी नहीं कर सकता। आखिर कौन सा मुंह लेकर जाएंगे एनडीए में और कौन सी इज्जत बची रह जाएगी?
इतिहास माफ नहीं करेगा?
शिवानंद तिवारी कहते हैं कि वह नीतीश कुमार से बात करना चाहते हैं। कोशिश में हैं। जाना चाहेंगे तो चले ही जाएंगे। कर्पूरी ठाकुर कहते थे कि जनहित में किसी से गठबंधन या सहयोग लेने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन नीतीश का इस तरह से साथ छोडऩा कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा से तालमेल नहीं बना पाएगा। नीतीश कुमार जिस जातिगत जनगणना के पक्षधर थे, उसका भाजपा और प्रधानमंत्री ने विरोध किया था। प्रधानमंत्री ने जाति व्यवस्था का विरोध किया था। उन्होंने युवा, महिला, किसान और गरीब को ही जातियां बताया था। अयोध्या में जिस तरह से राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई और राम मंदिर का कार्यक्रम चल रहा है, वह ब्राह्मणवाद को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भाजपा नेता थे तो वह आडवाणी की रथयात्रा के सारथी थे। यह रथयात्रा मंडल कमीशन के विरोध में हिन्दुत्व और उन्माद को भड़काने के लिए हुई थी। मुझे लगता है नीतीश कुमार इन सभी पहलुओं पर गौर करके इंडिया गठबंधन में बने रहेंगे।