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Maharashtra: 'शिवाजी महाराज का मंदिर महिमा मंडन का हकदार, औरंगजेब की कब्र नहीं', विवाद के बीच बोले CM फडणवीस
Mon, 17 Mar 2025 06:49 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 17 Mar 2025 06:49 PM IST
सार
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को ठाणे में छत्रपति शिवाजी महाराज के मंदिर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान राम के दर्शन हनुमानजी के बिना अधूरे हैं, उसी तरह छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान के बिना कोई भी तीर्थयात्रा पूरी नहीं होती।
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छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर में पूजा करते सीएम देवेंद्र फडणवीस।
- फोटो : PTI
विस्तार
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को ठाणे में छत्रपति शिवाजी महाराज के मंदिर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि केवल छत्रपति शिवाजी महाराज का मंदिर ही महिमा मंडन का हकदार है, न कि औरंगजेब की कब्र। जिस तरह भगवान राम के दर्शन हनुमानजी के बिना अधूरे हैं, उसी तरह छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान के बिना कोई भी तीर्थयात्रा पूरी नहीं होती। सीएम ने कहा कि शिवाजी महाराज की कोशिशों के कारण ही हम अपने देवताओं की स्वतंत्र रूप से पूजा करने में सक्षम हैं। उन्होंने स्वराज्य, भगवान, हमारे देश और हमारे धर्म के लिए लड़ाई लड़ी।
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फडणवीस ने महाराष्ट्र में ऐतिहासिक स्मारकों खास तौर पर औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर कहा कि सरकार औरंगजेब की कब्र को संरक्षित स्थल घोषित करने के लिए बाध्य है। इसका संरक्षण श्रद्धा के बजाय ऐतिहासिक रिकॉर्ड के लिए जरूरी है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार को औरंगजेब के उत्पीड़न के इतिहास के बावजूद उसकी कब्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी पड़ रही है। मैं आश्वासन देता हूं कि अगर उनकी विरासत को महिमामंडित करने का कोई प्रयास किया जाता है, तो यह सफल नहीं होगा। फडणवीस ने कहा कि भले ही शिवाजी की मृत्यु कम उम्र में हो गई थी, लेकिन समाज के लिए उनके योगदान ने लोगों को उनकी विरासत का अनुसरण करने में मदद की है। महाराष्ट्र उम्मीदों पर खरा उतरा है और यह राज्य के लोगों के सोच से स्पष्ट है।
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यह भी पढें: महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र पर रार, विहिप की धमकी; कांग्रेस का आरोप- ध्यान भटकाने की कोशिश
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छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर।
- फोटो : PTI
उत्तर प्रदेश सरकार ने आगरा किले में मांगी जगह
सीएम ने कहा कि राज्य सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज के 12 किलों को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता देने के लिए यूनेस्को को एक प्रस्ताव सौंपा है। इसके अलावा संगमेश्वर महल को अपने नियंत्रण में लेने और विकसित करने की योजना बना रही है। यहां शिवाजी महाराज के पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज को धोखे से पकड़ लिया गया था। हमने उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह ऐतिहासिक स्मारक स्थापित करने के उद्देश्य से आगरा किले में एक कोठरी का कब्जा महाराष्ट्र सरकार को दे, जहां शिवाजी महाराज को कभी कैद किया गया था।
यह भी पढ़ें: सपकाल के बयान से सियासी हंगामा, औरंगजेब से की फडणवीस की तुलना; महायुति ने की कार्रवाई की मांग
2500 वर्ग फुट में फैला है मंदिर
ठाणे के भिवंडी क्षेत्र में निर्मित शिवाजी महाराज को समर्पित राज्य के पहले मंदिर का निर्माण डॉ. राजू चौधरी के नेतृत्व में शिवक्रांति प्रतिष्ठान ट्रस्ट ने किया है। मंदिर में शिवाजी महाराज की मूर्ति प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाई है। मंदिर 2,500 वर्ग फुट में फैला है। डॉ. राजू चौधरी ने कहा कि शिवाजी महाराज का मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक और शैक्षिक केंद्र भी है। यह शिवाजी महाराज के दृष्टिकोण, शासन और सैन्य उपलब्धियों के बारे में जागरूकता फैलाने और संरक्षित करने में मदद करेगा।
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सीएम ने कहा कि राज्य सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज के 12 किलों को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता देने के लिए यूनेस्को को एक प्रस्ताव सौंपा है। इसके अलावा संगमेश्वर महल को अपने नियंत्रण में लेने और विकसित करने की योजना बना रही है। यहां शिवाजी महाराज के पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज को धोखे से पकड़ लिया गया था। हमने उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह ऐतिहासिक स्मारक स्थापित करने के उद्देश्य से आगरा किले में एक कोठरी का कब्जा महाराष्ट्र सरकार को दे, जहां शिवाजी महाराज को कभी कैद किया गया था।
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2500 वर्ग फुट में फैला है मंदिर
ठाणे के भिवंडी क्षेत्र में निर्मित शिवाजी महाराज को समर्पित राज्य के पहले मंदिर का निर्माण डॉ. राजू चौधरी के नेतृत्व में शिवक्रांति प्रतिष्ठान ट्रस्ट ने किया है। मंदिर में शिवाजी महाराज की मूर्ति प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाई है। मंदिर 2,500 वर्ग फुट में फैला है। डॉ. राजू चौधरी ने कहा कि शिवाजी महाराज का मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक और शैक्षिक केंद्र भी है। यह शिवाजी महाराज के दृष्टिकोण, शासन और सैन्य उपलब्धियों के बारे में जागरूकता फैलाने और संरक्षित करने में मदद करेगा।
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