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Politics: 'दिल्ली की सत्ता की उठापटक के जाल से सावधान रहें', शिवसेना UBT ने सीएम विजय को भविष्य के लिए चेताया
Tue, 12 May 2026 03:43 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 12 May 2026 03:43 PM IST
सार
तमिलनाडु में विजय की जीत पर शिवसेना (यूबीटी) ने खुशी जताई है। पार्टी ने विजय को भ्रष्टाचार और नशे के खिलाफ सख्त रहने की सलाह दी। साथ ही, स्टालिन को भाजपा के प्रभाव से बचने और 'इंडिया' गठबंधन के बदलते समीकरणों के बीच सतर्क रहने को कहा है।
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थलापति विजय
- फोटो : इंस्टाग्राम
विस्तार
शिवसेना (यूबीटी) ने कहा है कि तमिलनाडु चुनाव के बाद वहां ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने शानदार जीत हासिल की है। इस जीत ने डीएमके और एआईएडीएमके के वर्षों पुराने वर्चस्व को खत्म कर दिया है।
पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि राज्य में जश्न का माहौल है, लेकिन आगे का रास्ता कठिन है। विजय की सरकार के पास बहुमत कम है। दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के प्रभाव के बीच स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। विजय ईसाई धर्म से हैं, लेकिन उन्होंने सभी धर्मों का नेता बनने और नागरिकों की सुरक्षा का संकल्प लिया है।
पूरा देश यह देखना चाहता है कि क्या विजय शासन की जटिलताओं के बीच अपनी 'आम आदमी' वाली छवि बचा पाएंगे। उनके शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रवाद की झलक दिखी। कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम' से हुई और समापन राज्य गीत के साथ हुआ। विजय ने खुद को कोई राजकुमार नहीं बल्कि एक आम आदमी बताया है। उन्होंने तमिलनाडु के आठ करोड़ लोगों को अपना परिवार घोषित किया है।
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ये भी पढ़ें: बंगलूरू: कर्नाटक के जिलेटिन मिलने की जांच करेगी NIA, पीएम के सभा स्थल के नजदीक मिली थी संदिग्ध सामग्री
मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों और विधायकों को भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया है। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस विभाग में एक अलग विंग बनाने को मंजूरी दी है। राज्य पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, इसलिए उन्होंने वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहली फाइल 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की थी।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने दावा किया कि नई सरकार के गठन से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है। कांग्रेस पार्टी ने विजय को सरकार बनाने में मदद की, जिससे कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन की डीएमके पार्टी नाराज हो गई। जिसकी वजह से डीएमके ने 'इंडिया' गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया है।
शिवसेना (यूबीटी) ने संपादकीय में कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने नए प्रशासन को शुभकामनाएं देकर शालीनता बनाए रखी। उद्धव ठाकरे गुट ने स्टालिन को भाजपा से दूर रहने की सलाह दी है। साथ ही शिवसेना ने स्टालिन को सलाह दी है कि वे मोदी और शाह के जाल में न फंसें और भाजपा से दूरी बनाए रखें।
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पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि राज्य में जश्न का माहौल है, लेकिन आगे का रास्ता कठिन है। विजय की सरकार के पास बहुमत कम है। दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के प्रभाव के बीच स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। विजय ईसाई धर्म से हैं, लेकिन उन्होंने सभी धर्मों का नेता बनने और नागरिकों की सुरक्षा का संकल्प लिया है।
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पूरा देश यह देखना चाहता है कि क्या विजय शासन की जटिलताओं के बीच अपनी 'आम आदमी' वाली छवि बचा पाएंगे। उनके शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रवाद की झलक दिखी। कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम' से हुई और समापन राज्य गीत के साथ हुआ। विजय ने खुद को कोई राजकुमार नहीं बल्कि एक आम आदमी बताया है। उन्होंने तमिलनाडु के आठ करोड़ लोगों को अपना परिवार घोषित किया है।
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मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों और विधायकों को भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया है। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस विभाग में एक अलग विंग बनाने को मंजूरी दी है। राज्य पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, इसलिए उन्होंने वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहली फाइल 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की थी।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने दावा किया कि नई सरकार के गठन से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है। कांग्रेस पार्टी ने विजय को सरकार बनाने में मदद की, जिससे कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन की डीएमके पार्टी नाराज हो गई। जिसकी वजह से डीएमके ने 'इंडिया' गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया है।
शिवसेना (यूबीटी) ने संपादकीय में कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने नए प्रशासन को शुभकामनाएं देकर शालीनता बनाए रखी। उद्धव ठाकरे गुट ने स्टालिन को भाजपा से दूर रहने की सलाह दी है। साथ ही शिवसेना ने स्टालिन को सलाह दी है कि वे मोदी और शाह के जाल में न फंसें और भाजपा से दूरी बनाए रखें।
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