Shiv Sena Rift: उद्धव बोले- मेरा धनुष-बाण छीन लिया, मगर प्रभु श्रीराम मेरे साथ; शाह ने कही यह बात
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मुंबई में कहा कि उन्होंने मेरा धनुष-बाण छीन लिया, मगर अब खुद प्रभु राम मेरे साथ आ गए। मैंने कल रास्ते पर उतरकर चुनौती दी है कि अगर आप में हिम्मत है तो आप चुराया हुआ धनुष-बाण लेकर सामने आइए और मैं मेरी मशाल लेकर आता हूं फिर देखते हैं क्या होता है।
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चुनाव आयोग ने 17 फरवरी को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दे दी थी। शिंदे गुट को 'धनुष और तीर' चुनाव चिह्न आवंटित करने का आदेश भी दिया गया था। इसके बाद से ही उद्धव ठाकरे और संजय राउत भाजपा और शिंदे गुट पर निशाना साध रहे हैं।
इस बीच महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मुंबई में कहा कि उन्होंने मेरा धनुष-बाण छीन लिया, मगर अब खुद प्रभु राम मेरे साथ आ गए। मैंने कल रास्ते पर उतरकर चुनौती दी है कि अगर आप में हिम्मत है तो आप चुराया हुआ धनुष-बाण लेकर सामने आइए और मैं मेरी मशाल लेकर आता हूं फिर देखते हैं क्या होता है।
#WATCH | ...Someone who visited Pune yesterday asked how things were going in Maharashtra. Then, the same person said ' Very well, Mogambo Khush Hua'...: Uddhav Thackeray after losing Shiv Sena name, symbol pic.twitter.com/4ApPxlCDfi
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) February 19, 2023
चुनाव आयोग के आदेश पर मुगैम्बो खुश हुआ: उद्धव
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि सभी पार्टियों को अपनी आंखे खुली रखने और सतर्क रहने की जरूरत है। जो शिवसेना के साथ हुआ, जिस तरह से हमारे साथ व्यवहार किया गया, वह आपके साथ भी हो सकता है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आप मेरे पिता का चेहरा चाहते हैं, लेकिन उनके बेटे का नहीं। मैं आपके साथ आने को तैयार था। जब मैं अपने पिता को दिए वादों को पूरा करना चाहता था, तब आपने मुझे धोखा दिया, तो मैं क्या करता? मैं कभी मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता था, लेकिन कांग्रेस और राकांपा ने मुझे मुख्यमंत्री बनने को कहा। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का नाम लिए बिना कहा कि चुनाव आयोग के आदेश पर मुगैम्बो खुश हुआ।
इससे पहले शनिवार को अपने समर्थकों के साथ बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा था ति प्रधानमंत्री को लगता है कि शिवसेना को खत्म कर देंगे लेकिन शिवसेना कभी खत्म नहीं होगी। उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि उन्हें बालासाहेब ठाकरे का चेहरा चाहिए, उन्हें चुनाव चिन्ह चाहिए लेकिन शिवसेना का परिवार नहीं। पीएम नरेंद्र मोदी को महाराष्ट्र आने के लिए बाला साहेब ठाकरे के चेहरे की जरूरत है, राज्य के लोग जानते हैं कौन सा चेहरा असली है और कौन नहीं। शिंदे गुट को चुनौती देते हुए ठाकरे ने कहा कि मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि अगर वे मर्द हैं तो चोरी का 'धनुष-बाण' लेकर भी हमारे सामने आएं, हम 'मशाल' लेकर चुनाव लड़ेंगे।' यह हमारी परीक्षा है, युद्ध शुरू हो गया है। बैठक में पार्टी नेता और प्रवक्ताओं समेत शिवसेना उद्धव बालासाहेब गुट के सभी बड़े नेता शामिल हुए थे। यह बैठक ठाकरे के निवास मातोश्री में हुई।
सभी विचारधाराओं को भूल गए उद्धव: अमित शाह
वहीं, कोल्हापुर में आयोजित विजय संकल्प रैली के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्धव पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि 2019 में उद्धव ठाकरे ने हमारे साथ प्रचार किया, लेकिन जब चुनाव के नतीजे आए, तो वे सभी विचारधाराओं को भूल गए और शरद पवार के पैरों पर गिर गए और उन्हें सीएम बनाने का अनुरोध किया। भाजपा को सत्ता का लालच नहीं है और हम अपनी विचारधाराओं को कभी नहीं भूलेंगे।
गृह मंत्री ने कहा कि 2024 में देश में फिर से एक बार चुनाव होने वाला है। हम और हमारे साथी दल शिवसेना, महाराष्ट्र में चुनाव लड़ेंगे और सामने सारे इकट्ठा होकर लड़ने वाले हैं। हम यहां की सभी 48 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे। ये चुनाव भाजपा की सरकार फिर से बनाने का नहीं, ये चुनाव फिर से एक बार मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाने का चुनाव नहीं है, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आने वाले चुनाव में भाजपा की जीत महान भारत की रचना का चुनाव है।
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य के मंत्री चंद्रकांत पाटिल के साथ आज कोल्हापुर के अंबाबाई मंदिर में पूजा अर्चना की।
शिवसेना से ठाकरे परिवार का नियंत्रण खत्म!
बता दें कि शुक्रवार को चुनाव आयोग ने 'शिवसेना' नाम और इसका चुनाव चिन्ह 'धनुष और तीर' एकनाथ शिंदे गुट को देने का फैसला किया है। साल 1966 में बाल ठाकरे द्वारा बनाई गई शिवसेना पर अब ठाकरे परिवार का नियंत्रण खत्म माना जा रहा है। छह महीने पहले एकनाथ शिंदे ने चुनाव आयोग में याचिका दाखिल की थी। जिस पर अब तीन सदस्यों वाले आयोग ने एकनाथ शिंद के पक्ष में फैसला सुनाया है।