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दावा: शिवसेना ने मुंबई को महिलाओं के लिए सुरक्षित शहर बताया, सामना के संपादकीय में भाजपा पर भी तंज
Mon, 13 Sep 2021 03:34 PM IST
प्रशांत कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: प्रशांत कुमार झा
Updated Mon, 13 Sep 2021 03:34 PM IST
सार
शिवसेना के मुखपत्र सामना ने लिखा है कि मुंबई लड़कियों और महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित जगह है। सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ अपराध की हालिया घटनाएं राज्य की संस्कृति पर एक धब्बा है और लोगों में गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन मुंबई की घटना की तुलना उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या से करना पूरी तरह से गलत है।
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मुंबई पुलिस (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
देश की आर्थिक राजधानी के नाम से मशहूर मुंबई महिलाओं के लिए तो इन दिनों सुरक्षित नहीं है। बीते चार दिनों में मुंबई में महिलाओं के साथ दरिंदगी और मारपीट की तीन घटनाएं सामने आई हैं। इसमें जघन्य घटना तो मुंबई के साकीनाका इलाके में 32 साल की महिला के साथ दुष्कर्म की है। वहीं, शिवसेना ने दावा किया है कि मुंबई दुनिया में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहर है। शिवसेना ने कहा कि इसको लेकर किसी के मन में संदेह नहीं होना चाहिए।
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शिवसेना के मुखपत्र सामना ने लिखा है कि मुंबई लड़कियों और महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित जगह है। सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ अपराध की हालिया घटनाएं राज्य की संस्कृति पर एक धब्बा है और लोगों में गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन मुंबई की घटना की तुलना उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या से करना पूरी तरह से गलत है।
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संपादकीय में दावा किया गया कि हाथरस मामले के दोषियों को सत्ताधारी दल का समर्थन था और दोषियों की गिरफ्तारी में देरी हुई थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार ने सबूत मिटाने के लिए आनन-फानन में पीड़िता के शव को जला दिया था। शिवसेना ने लिखा है कि योगी सरकार ने कहा था कि हाथरस में कोई बलात्कार नहीं हुआ, जो गलत साबित हुआ। उसने कहा कि जिस तत्परता के साथ राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम साकीनाका पहुंची, वह हाथरस मामले में नहीं दिखाई दी।
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हाथरस और कठुआ मामले में आरोपियों को बचाया गया-दावा
संपादकीय के अनुसार, कठुआ (2018 में जम्मू-कश्मीर में एक नाबालिग लड़की की) बलात्कार मामले के आरोपी को बचाने के लिए एक विशेष राजनीतिक दल के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए, जबकि साकीनाका घटना में पुलिस ने 10 मिनट में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। शिवसेना ने कहा कि ऐसे मामलों का एकमात्र समाधान विकृत मानसिकता पर अंकुश लगाना है।
शिवसेना ने कहा कि राज्य सरकार ने साकीनाका पीड़िता की दो बेटियों की शिक्षा और आजीविका का ख्याल रखने का फैसला किया है। क्या यह संवेदनशील होने का संकेत नहीं है? उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने मुंबई के पुलिस आयुक्त हेमंत नगराले की इस टिप्पणी का भी बचाव किया कि पुलिस अपराध के सभी घटनाओं पर मौजूद नहीं हो सकती है। पार्टी ने कहा कि अन्य सभी राज्यों और शहरों की पुलिस इससे सहमत होगी। इसने कहा कि साकीनाका बलात्कार पीड़िता और आरोपी एक-दूसरे को जानते थे और कहा कि डॉक्टर और पुलिस ने पीड़िता के इलाज के लिए बेहतर प्रयास किए लेकिन पीड़िता की जान नहीं बचाई जा सकी।
शिवसेना का भाजपा सरकार पर तंज
शिवसेना ने कहा कि अब, मामले को न्यायपालिका पर छोड़ दें। अपराधी को हाथरस और कठुआ (मामलों) के विपरीत निश्चित रूप से फांसी पर लटकाया जाएगा क्योंकि आरोपी के समर्थन में कोई भी सामने नहीं आया है। किस मुद्दे व प्रकरण पर राजनीति करनी है, इसका भान रखना ही चाहिए। संपादकीय में राज्य के नेताओं से संबंधित कई मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा किए जाने की ओर इशारा करते हुए व्यंग्यात्मक रूप से कहा गया है कि पुलिस को अपना काम करने दें, लेकिन अगर कोई साकीनाका (मामले) की फाइल ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को सौंपना चाहता है, तो कोई क्या कर सकता है।