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नोटबंदी के बाद महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा को मिला जनादेश
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, मुंबई
Updated Tue, 29 Nov 2016 12:07 AM IST
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देवेंद्र फड़णवीस
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के ऐलान के बाद महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा को जबर्दस्त सफलता मिली है। महाराष्ट्र निकाय चुनावों में भाजपा ने 610 सीटें जीती हैं। वहीं सर्वाधिक 52 नगराध्यक्ष चुने गए हैं। इस चुनाव को नोटबंदी के पक्ष में जनता के जनादेश के रूप में देखा जा रहा है। निकाय चुनाव के नतीजे ने जता दिया है कि नोटबंदी पर विरोधियों की टीका-टिप्पणी के बावजूद जनता पर इसका विशेष प्रभाव नहीं पड़ा है।
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दो साल पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते केंद्र और राज्य में सत्ता हासिल करने वाली बीजेपी के लिए निकाय चुनाव काफी अहम माना जा रहा था। खासकर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नेतृत्व कसौटी पर था। महाराष्ट्र के 25 जिलों के 147 नगर परिषदों और 18 नगर पंचायतों के लिए रविवार को मतदान हुआ था और सोमवार को वोटों की गिनती शुरू हुई। हालांकि शुरुआती रुझान भाजपा के पक्ष में नहीं रहे लेकिन दोपहर के बाद भाजपा की सीटों की संख्या अचानक बढ़ने लगी।
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महाराष्ट्र में नगर परिषद और नगर पंचायतों की 3,706 सीटों पर हुए चुनाव में शाम तक 2501 सीटों के नतीजे सामने आए। जिसमें भाजपा ने 610 सीटें और गठबंधन के साझीदार शिवसेना ने 402 सीटें जीती हैं। कांग्रेस ने 408 सीटों पर जीत हासिल की है। एनसीपी को 482 सीटें मिली हैं जबकि राज ठाकरे की एमएनएस ने 12 सीटों पर कब्जा किया है। बसपा को 4 सीटें और अन्य को 583 सीटें मिली हैं।
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नगर परिषद अध्यक्ष का भी चुनाव साथ-साथ हुए हैं। पहली बार नगर परिषद अध्यक्ष का सीधा चुनाव हुआ है जिसमें 52 सीट पर भाजपा नेता विजयी घोषित किए गए हैं। वहीं, शिवसेना के 24 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है जबकि कांग्रेस के 21 और एनसीपी के 19 और अन्य ने 25 सीटों पर कब्जा जमाया है। नतीजों से संकेत साफ है कि जनता ने मोदी सरकार की नोटबंदी को समर्थन दिया है। निकाय चुनाव में भाजपा-शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था जबकि कांग्रेस-एनसीपी अकेले मैदान में उतरी थी। इसका खामियाजा उन्हें चुनाव में भुगतना पड़ा है।
फडणवीस ने जीता विदर्भ, भाई से हार गई पंकजा
फाइल फोटोः पंकजा मुंडे
- फोटो : ANI
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राज्य के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार के विदर्भ में बीजेपी के सबसे ज्यादा 17 नगराध्यक्ष चुनकर आए हैं। वहीं, खानदेश में 7, पश्चिम महाराष्ट्र में 5 और कोंकण में बीजेपी के 2 नगराध्यक्ष चुने गए हैं। लेकिन, महाराष्ट्र के लोक नेता रहे दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष रावसाहेब दानवे पाटिल के लिए यह चुनाव बड़ा झटका साबित हुआ है।
पंकजा को बीड जिले के पर्ली नगरपालिका में चचेरे भाई एनसीपी नेता धनंजय मुंडे से मात खानी पड़ी। यहां 33 में से एनसीपी ने 27 सीटें जीत ली। साथ की नगराध्यक्ष भी एनसीपी का चुना गया। वहीं, कोंकण में कांग्रेस नेता नारायण राणे ने वापसी की है। यह शिवसेना के लिए झटका है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के कराड नगरपालिका में कांग्रेस ने 16 सीटें जीती लेकिन, नगराध्यक्ष बीजेपी का चुना गया।
महाराष्ट्र में राज ठाकरे से बड़े ओवैसी
महाराष्ट्र में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) से असदुद्दीन ओवैसी की एमआईएम बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। निकाय चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने 40 सीटें जीती जबकि मनसे को 12 सीट ही मिली हैं, मनसे का एक नगराध्यक्ष भी चुना गया है।
पंकजा को बीड जिले के पर्ली नगरपालिका में चचेरे भाई एनसीपी नेता धनंजय मुंडे से मात खानी पड़ी। यहां 33 में से एनसीपी ने 27 सीटें जीत ली। साथ की नगराध्यक्ष भी एनसीपी का चुना गया। वहीं, कोंकण में कांग्रेस नेता नारायण राणे ने वापसी की है। यह शिवसेना के लिए झटका है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के कराड नगरपालिका में कांग्रेस ने 16 सीटें जीती लेकिन, नगराध्यक्ष बीजेपी का चुना गया।
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महाराष्ट्र में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) से असदुद्दीन ओवैसी की एमआईएम बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। निकाय चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने 40 सीटें जीती जबकि मनसे को 12 सीट ही मिली हैं, मनसे का एक नगराध्यक्ष भी चुना गया है।