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केंद्र पर हमलावर शिवसेना: ओबीसी कोटा को लेकर उठाए सवाल, कहा- हमें क्यों बदनाम किया?

Fri, 24 Sep 2021 05:08 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 24 Sep 2021 05:08 PM IST
सार

महाराष्ट्र में सत्ताधारी दल शिवसेना ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर हमला बोला है और सवाल उठाया है कि जब केंद्र का भी यही रुख है तो फिर इसे लेकर राज्य सरकार पर सवाल क्यों उठाए गए और बदनाम किया गया। दूसरी ओर भाजपा ने जाति जनगणना की मांग करने वाले विपक्षी दलों को निशाने पर लिया। पढ़िए पूरा मामला...

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Shiv Sena attacks Centre over OBC quota issue here is all you need to know in Hindi
BJP Shivsena - फोटो : BJP Shivsena

विस्तार

केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया था। इसमें केंद्र ने कहा था कि पिछड़ी जातियों की जनगणना करना प्रशासनिक रूप से कठिन और बोझिल है। इसके एक दिन बाद शुक्रवार को महाराष्ट्र में सत्ताधारी शिवसेना ने सवाल उठाया कि अगर केंद्र ने अपना रुख साफ कर दिया है तो क्यों इस पूरे समय ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार को बदनाम किया गया। 

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इसके साथ ही अपने मुखपत्र 'सामना' में संपादकीय में शिवसेना ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को उस अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने के लिए धन्यवाद दिया, जो राज्य में कुछ उप-चुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले ओबीसी कोटा बहाल करने की कोशिश करता है। बता दें कि एक दिन पहले पार्टी ने कहा था कि गैर भाजपा शासित राज्यों में राज्यपाल मदमस्त हाथियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं और लोकतंत्र को अपने पैरों तले कुचल रहे हैं।
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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से गुरुवार को कहा था कि पिछड़ी जातियों की जाति आधारित गणना करना प्रशासनिक रूप से कठिन और बोझिल काम है। ऐसी जानकारी को जनगणना के दायरे से बाहर करना एक सचेत नीतिगत निर्णय है। साथ ही शीर्ष अदालत में दाखिल एक हलफनामे में केंद्र ने कहा था कि 2011 में सामाजिक-आर्थिक वर्ग में हुई जाति गणना व जाति जनगणना (एसईसीसी 2011) में कई गलतियां थीं। 
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यह हलफनामा महाराष्ट्र सरकार की ओर से दाखिल एक याचिका के जवाब में दाखिल किया गया था। इसमें अदालत से केंद्र व अन्य संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि एसईसीसी 2011 का मूल डाटा उपलब्ध कराया जाए जो कई बार मांगने के बाद भी मुहैया नहीं कराया गया है।

शिवसेना ने सवाल उठाया, 'अगर केंद्र ने राज्यों के साथ ओबीसी वर्ग का अनुभवजन्य डाटा साझा नहीं करने का फैसला किया है तो पिछले कई महीनों से इसी मुद्दे को लेकर एमवीए सरकार की छवि क्यों धूमिल की जा रही है? क्यों ओबीसी वर्ग का इस्तेमाल एक मोहरे की तरह राज्य सरकार को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है?' पार्टी ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी वर्ग को आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए इस डाटा की जरूरत है।

जाति जनगणना की मांग पर भाजपा ने विपक्ष को निशाने पर लिया

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने जाति जनगणना की मांग को लेकर विपक्षी दलों पर हमला बोला। भगवा दल ने सवाल उठाया कि यह मांग करने वाली विपक्षी पार्टियां बताएं कि उन्होंने अपने संगठनों और चयनित प्रतिनिधियों में विभिन्न सामाजिक समूहों को कितना प्रतिनिधित्व दिया है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे लेकर समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और बहुजन समाज पार्टी को निशाने पर लिया। वहीं, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख के बारे में पूछे जाने पर त्रिवेदी ने कहा कि केंद्र ने तकनीकी आधार पर अपनी स्थिति तय की है।

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