फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Sheikh Hasina Undelivered Speech Had Big Charge Against US

Sheikh Hasina: ‘अगर मैं अमेरिका को...’, बांग्लादेश छोड़ने से पहले संबोधन में क्या कहना चाहती थीं हसीना? जानें

Sun, 11 Aug 2024 03:56 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Sun, 11 Aug 2024 03:56 PM IST
सार

बांग्लादेश छोड़ने से पहले शेख हसीना जनता को संबोधित करना चाहती थीं। उन्होंने कहा, ‘अगर में अमेरिका को सेंट मार्टिन द्वीप सौंपकर बंगाल की खाड़ी पर राज करने की अनुमति देती, तो मैं सत्ता में बनी रह सकती थी।’

विज्ञापन
Sheikh Hasina Undelivered Speech Had Big Charge Against US
शेख हसीना - फोटो : ANI

विस्तार

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़ने से पहले जनता को संबोधित करना चाहतीं थीं। खासतौर पर वे उन प्रदर्शनकारियों के नाम संदेश देना चाहतीं थीं, जिनके वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना के आवास में तोड़फोड़ कर दी और इस वजह से उच्च सुरक्षा अधिकारियों ने पूर्व पीएम को तत्काल देश छोड़ने की सलाह दी। मीडिया रिपोर्ट्स में इसका दावा किया गया है। हालांकि, उनके बेटे साजिब वाजेद जॉय ने इन रिपोर्ट्स को सिरे से नकार दिया है।

विज्ञापन


शेख हसीना ने साझा की ये खास बातें 
अब भारत में 76 वर्षीय शेख हसीना में भारत में अपने करीबी सहयोगियों से यह खास बातें साझा की हैं। अपने पत्र में शेख हसीना ने अमेरिका पर बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की योजना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो अपने संबोधन में ये बातें कहेंगीं। शेख हसीना ने कहा, ‘मैंने इसलिए इस्तीफा देने का फैसला लिया क्योंकि मैं और लोगों को मरते हुए नहीं देखना चाहती थी। वे छात्रों की लाश पर चढ़कर सत्ता हासिल करना चाहते थे लेकिन मैंने इसकी इजाजत नहीं दी। इस वजह से मैंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।’ 
विज्ञापन


अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप 
शेख हसीना ने इसके बाद अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'अगर मैं अमेरिका को सेंट मार्टिन द्वीप को को सौंपकर बंगाल की खाड़ी पर राज करने की अनुमति देती, तो मैं सत्ता में बनी रह सकती थी। मैं अपने देश के लोगों से प्रार्थना करती हूं कि ऐसे अतिवादियों के झांसे में ना आएं।’ आपको बता दें कि सेंट मार्टिन द्वीप तीन वर्ग किलोमीर का क्षेत्र है और बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्व का क्षेत्र है। यह बांग्लादेश के सुदूर दक्षिण में स्थित है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


‘मैं देश में रहती तो और लोगों की मौत हो सकती थी’
शेख हसीना ने आगे कहा, ‘अगर मैं देश में रहती तो और भी लोगों की मौत हो सकती थी। इस वजह में मैंने देश छोड़ने का फैसला लिया। आप लोग मेरी ताकत हैं। आप लोग मुझे नहीं चाहते थे इस वजह से मुझे देश छोड़ना पड़ा।’ शेख हसीना ने अपने संदेश में अपनी पार्टी के सहयोगियों से आगे कहा कि आवामी लीग ने हमेशा वापसी की है। उन्होंने कहा, ‘उम्मीद मत छोड़िए। मैं जल्द वापस लौटूंगी। मैं हार गई लेकिन बांग्लादेश की जनता जीत गई। वो लोग जिनके लिए मेरे पिता और मेरे परिवार के सदस्यों ने जान दे दी।’ आपको बता दें कि बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बीच आवामी लीग की नेता को इस्तीफा देना पड़ा था। शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में 400 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

शेख हसीना और अमेरिका के रिश्तों में तनातनी
शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान अमेरिका और बांग्लादेश के बीच संबंधों में तनातनी देखने को मिली थी। अमेरिका ने यहां तक कह दिया था कि बांग्लादेश में जनवरी में हुए चुनाव निष्पक्ष नहीं थे। आपको बता दें कि जनवरी में हुए चुनाव में आवामी लीग सत्ता में लौटी थी। बांग्लादेश छोड़ने से कुछ महीने पहले ही शेख हसीना ने बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार गिराने के लिए साजिशें रची जा रही हैं। उन्होंने अमेरिका पर बांग्लादेश और म्यांमार से बाहर एक नया ईसाई देश बनाने की साजिश करने का आरोप लगाया था। इस वर्ष मई के महीने में शेख हसीना ने कहा था, 'अगर मैं किसी खास देश को बांग्लादेश में हवाई अड्डा बनाने की अनुमति देती तो इस तरह की साजिशें नहीं रची जाती।’



शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद अमेरिका ने बांग्लादेश में लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान पर जोर देने का आह्वान किया था। अमेरिका ने कहा, ‘हम अनुरोध करते हैं कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक समावेशी रूप से अंतरिम सरकार का गठन किया जाए। बांग्लादेश की जनता और अमेरिका के बीच महत्वपूर्व संबंध हैं।’ 


अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने क्या कहा था?
इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा था, ‘हम शांतिपूर्ण रूप से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हिंसा का विरोध करते हैं। हम इस मामले पर बेहद करीब से नजर बनाए हुए हैं। हमें प्रदर्शन के दौरान लोगों की मौत की जानकारी मिली है। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से चलने दें।’

शेख हसीना ने ‘रजाकार’ पर दिया स्पष्टीकरण
शेख हसीना ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी भी प्रदर्शनकारी छात्रों को रजाकार नहीं कहा कहा। आपको बता दें कि बांग्लादेश-पाकिस्तान विभाजन के दौरान पूर्वी पाकिस्तान में रजाकार नाम की एक क्रूर सेना पाकिस्तान की तरफ से गठित की गई थी। दरअसल रजाकार शब्द का अर्थ हिंदी में सहायक होता है, और पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बंटवारे के खिलाफ कई पाकिस्तानी समर्थकों ने इस तरह की सेना बनाई थी। जिन्होंने बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान बांग्लादेशियों के खिलाफ जमकर अत्याचार किया था। इस वजह से बांग्लादेश में रजाकार शब्द एक बेहद ही अपमानजनक शब्द है। शेख हसीना ने कहा कि उन्होंने कभी भी प्रदर्शनकारी छात्रों को रजाकार नहीं कहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed