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शीला दीक्षित 16 जनवरी को संभाल सकती हैं पद, कांग्रेस को खड़ा करने की चुनौती
Mon, 14 Jan 2019 04:47 PM IST
अमित मंडल
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Mon, 14 Jan 2019 04:47 PM IST
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sheela dixit
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर हाल ही में नियुक्त की गईं शीला दीक्षित 16 जनवरी को अपना पदभार ग्रहण कर सकती हैं। इस मौके पर पार्टी के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको, पूर्व दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन, जेपी अग्रवाल, अरविंदर सिंह लवली और अन्य वरिष्ठ नेताओं के उपस्थित रहने की संभावना है।
जानकारी के मुताबिक शीला दीक्षित जल्द ही अपनी नई टीम की घोषणा कर सकती हैं। उन्होंने एक बयान में यह कह दिया है कि वे दो या तीन बार विधायक रहे कांग्रेस के लोगों के अनुभव को इस्तेमाल करना चाहती हैं। इससे संकेत मिलता है कि उनकी नई टीम में उनके पुराने वफादार साथियों के शामिल रह सकते है।
मंगत राम सिंघल को कोषाध्यक्ष के रुप में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इनके अलावा डॉ. एके वालिया, जयकिशन, मतीन अहमद, राजकुमार चौहान और बलराम तंवर को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। संगठन के मुताबिक दिल्ली की सात लोकसभा सीटों के लिहाज से सात महासचिव और सत्तर विधानसभा सीटों के 70 सचिव बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा 14 जिलों में उपाध्यक्ष बनाए जा सकते हैं।
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हालांकि दिल्ली की राजनीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली की जनता का विश्वास उस स्तर पर बनाकर नहीं रख सके हैं जैसा कि उनकी राजनीति के उफान के समय हुआ करता था। केंद्र की सत्तारुढ़ मोदी सरकार के पास भी 2014 की लोकप्रियता नहीं बची है।
वहीं कम से कम दिल्ली के विकास के लिए लोग आज भी शीला दीक्षित को ही याद करते हैं। ऐसे में अगर वे अपनी मजबूत रणनीति के साथ जमीन पर उतरती हैं तो दिल्ली में पार्टी की वापसी हो सकती है।
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जानकारी के मुताबिक शीला दीक्षित जल्द ही अपनी नई टीम की घोषणा कर सकती हैं। उन्होंने एक बयान में यह कह दिया है कि वे दो या तीन बार विधायक रहे कांग्रेस के लोगों के अनुभव को इस्तेमाल करना चाहती हैं। इससे संकेत मिलता है कि उनकी नई टीम में उनके पुराने वफादार साथियों के शामिल रह सकते है।
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मंगत राम सिंघल को कोषाध्यक्ष के रुप में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इनके अलावा डॉ. एके वालिया, जयकिशन, मतीन अहमद, राजकुमार चौहान और बलराम तंवर को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। संगठन के मुताबिक दिल्ली की सात लोकसभा सीटों के लिहाज से सात महासचिव और सत्तर विधानसभा सीटों के 70 सचिव बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा 14 जिलों में उपाध्यक्ष बनाए जा सकते हैं।
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नई टीम में युवाओं को दिए जा सकते हैं भरपूर मौके
नई टीम में युवाओं को भी भरपूर मौके दिये जाएंगे। कांग्रेस ने शीला दीक्षित को ऐसे समय में पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी है जब दिल्ली में उसकी स्थिति काफी नाजुक है। इस समय पार्टी के दिल्ली से एक भी सांसद या विधायक नहीं हैं। पार्टी का आधार वोट बैंक खिसककर आम आदमी पार्टी के साथ जा चुका है। ऐसे में उनके सामने गंभीर चुनौती है।हालांकि दिल्ली की राजनीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली की जनता का विश्वास उस स्तर पर बनाकर नहीं रख सके हैं जैसा कि उनकी राजनीति के उफान के समय हुआ करता था। केंद्र की सत्तारुढ़ मोदी सरकार के पास भी 2014 की लोकप्रियता नहीं बची है।
वहीं कम से कम दिल्ली के विकास के लिए लोग आज भी शीला दीक्षित को ही याद करते हैं। ऐसे में अगर वे अपनी मजबूत रणनीति के साथ जमीन पर उतरती हैं तो दिल्ली में पार्टी की वापसी हो सकती है।