प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने किया भावुक ट्वीट, लिखा- 'आपकी बेटी के तौर पर जन्म को सौभाग्य मानती हूं'
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन के बाद उनका परिवार शोकाकुल है। प्रणब मुखर्जी के निधन पर बेटी शर्मिष्ठा ने भावुक ट्वीट कर पिता को अलविदा कहा। उन्होंने ट्वीट में लिखा 'मैं सबको नमन करती हूं। बाबा आपके पसंदीदा कवि की पंक्तियों के जरिए सबको आपका आखिरी गुड बाय कह रही हूं। आपने राष्ट्रसेवा में लोगों की सेवा में अपना जीवन बिताया। आपकी बेटी के तौर पर जन्म को मैं अपना सौभाग्य मानती हूं।'
प्रणब मुखर्जी ऐसी शख्सियत थे जिनके जाने के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। प्रणब मुखर्जी के परिवार में दो पुत्र और एक पुत्री हैं। प्रणब मुखर्जी अपनी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी के बेहद करीब थे।
“সবারে আমি প্রনাম করে যাই”
— Sharmistha Mukherjee (@Sharmistha_GK) August 31, 2020
I bow to all🙏
Baba, taking the liberty to quote from your favourite poet to say your final goodbye to all.
You have led a full, meaningful life in service of the nation, in service of our people.
I feel blessed to have been born as your daugher. pic.twitter.com/etYfZXzZ1j
सोमवार शाम को हुआ प्रणब मुखर्जी का निधन
प्रणब मुखर्जी का सोमवार शाम 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर बेटे अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट कर दी थी। कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन्हें 10 अगस्त को दिल्ली कैंट स्थित आर्मी रिसर्च ऐंड रेफरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उनके दिमाग में बने खून के थक्के को हटाने के लिए उनकी ब्रेन सर्जरी की गई थी, जिसके बाद से ही वह जीवन रक्षक प्रणाली पर थे।
जुलाई 2012 से जुलाई 2017 तक रहे देश के 13वें राष्ट्रपति
कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे प्रणब मुखर्जी को पिछले साल ही मोदी सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से विभूषित किया था। जुलाई 2012 से जुलाई 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे मुखर्जी 2018 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय नागपुर में एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता हिस्सा लिया था। इससे कांग्रेस असहज भी हुई थी।
एक दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के मिराती गांव में जन्मे प्रणब मुखर्जी ने 1969 में कांग्रेस के जरिए सियासत की दुनिया में कदम रखा था। उसी साल वह राज्यसभा के लिए चुने गए। उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता था।