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महाराष्ट्र चुनावः पवार ने दिखाया पावर, ‘गठबंधन’ में डाली जान
Fri, 25 Oct 2019 06:11 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Fri, 25 Oct 2019 06:11 AM IST
सार
- अब कांग्रेस नहीं एनसीपी है बिग ब्रदर
- भाजपा को नहीं जीतने दिया पश्चिम महाराष्ट्र का किला
- पिछले विधान सभा चुनाव में जहां 41 सीटों पर एनसीपी सिमट गई थी इस बार 55 सीटों के करीब पहुंची है
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शरद पवार
- फोटो : ANI
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विस्तार
महाराष्ट्र चुनाव में भले ही भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने विजय हासिल की हो लेकिन दिल जीतने का काम मराठा दिग्गज शरद पवार ने किया। उनकी सहयोगी कांग्रेस ने राज्य में लड़ने से पहले ही हार स्वीकार कर ली थी, ऐसे समय में एनसीपी प्रमुख पवार ने भाजपा-शिवसेना को जमकर टक्कर दी। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि पवार ने अपनी पार्टी के साथ कांग्रेस की नैया पार लगा दी। पवार के राजनीती करने का अंदाज अलग है, एक बार फिर यह साबित हो गया।
पवार ने अपने दम पर भाजपा-शिवसेना की जीत को बड़ा आकार नहीं लेने दिया। उनके नेतृत्व से तय हो गया है कि राज्य में अब कांग्रेस नहीं बल्कि एनसीपी गठबंधन में बिग ब्रदर की भूमिका में होगा। विश्लेषक मान रहे हैं कि कांग्रेस ने अपने अंदरूनी विवादों को भूल और पवार को सामने रखकर चुनाव लड़ा होता तो महाराष्ट्र विधानसभा की तस्वीर काफी अलग होती।
भाजपा ने चुनाव से पहले ही घेरने के लिए कांग्रेस-एनसीपी में सेंध लगानी शुरू कर गई थी। एनसीपी के तीस से ज्यादा नेता भाजपा या शिवसेना में शामिल हो गए, इनमें से कई उनके भरोसेमंद और कई बरसों से साथ थे। मगर पवार ने प्रचार में इन नेताओं की कमी खलने नहीं दी। यही वजह है कि 2014 में जहां एनसीपी जीती थी, उनमें से अधिकतर पर वापस लौटी है।
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पवार ने अपने दम पर भाजपा-शिवसेना की जीत को बड़ा आकार नहीं लेने दिया। उनके नेतृत्व से तय हो गया है कि राज्य में अब कांग्रेस नहीं बल्कि एनसीपी गठबंधन में बिग ब्रदर की भूमिका में होगा। विश्लेषक मान रहे हैं कि कांग्रेस ने अपने अंदरूनी विवादों को भूल और पवार को सामने रखकर चुनाव लड़ा होता तो महाराष्ट्र विधानसभा की तस्वीर काफी अलग होती।
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भाजपा ने चुनाव से पहले ही घेरने के लिए कांग्रेस-एनसीपी में सेंध लगानी शुरू कर गई थी। एनसीपी के तीस से ज्यादा नेता भाजपा या शिवसेना में शामिल हो गए, इनमें से कई उनके भरोसेमंद और कई बरसों से साथ थे। मगर पवार ने प्रचार में इन नेताओं की कमी खलने नहीं दी। यही वजह है कि 2014 में जहां एनसीपी जीती थी, उनमें से अधिकतर पर वापस लौटी है।
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जितने हमले हुए उतने मजबूत हुए पवार
एनसीपी प्रमुख शरद पवार
- फोटो : एएनआई