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लोक माझे संगति: 'पृथ्वीराज चव्हाण की कांग्रेस नेतृत्व से नजदीकी ठीक नहीं थी'; किताब में शरद पवार ने खोले राज
Wed, 03 May 2023 07:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 03 May 2023 07:03 PM IST
सार
पवार ने किताब में कहा है कि जब पृथ्वीराज चाव्हाण प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उनका मुख्य लक्ष्य राकांपा थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके शासनकाल में एनसीपी नेताओं को निशाना बनाने और उनके बारे में संदेह पैदा करने का जानबूझकर प्रयास किया गया था। इसके चलते कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे।
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शरद पवार और पृध्वीराज चव्हाण।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले देश के कद्दावर नेता शरद पवार ने अपनी आत्मकथा में राज्य के पूर्व सीएम रहे दिवंगत नेता विलासराव देशमुख की जमकर तारीफ की है। उन्होंने विलासराव देशमुख को महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने की परिपक्वता का श्रेय दिया है। इसमें उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण का भी जिक्र किया है। पवार ने कहा है कि गठबंधन सरकार को चलाने और दोबारा सरकार बनाने को लेकर उन्हें पृथ्वीराज चव्हाण की क्षमता पर संदेह था और 2014 में ऐसा हुआ भी। पृथ्वीराज चव्हाण ने तब भाजपा के हाथों सत्ता गंवा दी।
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अपनी आत्मकथा‘लोक माझे संगति’ में पवार ने लिखा है कि विलासराव देशमुख ने जब कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया उस समय कामकाज सहज और आपसी समझ पर आधारित था। विलासराव देशमुख के बाद उनके उत्तराधिकारी सुशील कुमार शिंदे और अशोक चव्हाण ने उनकी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया। बाद में जब पृथ्वीराज चाव्हाण प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उनका मुख्य लक्ष्य राकांपा थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके शासनकाल में एनसीपी नेताओं को निशाना बनाने और उनके बारे में संदेह पैदा करने का जानबूझकर प्रयास किया गया था। इसके चलते कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे।
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पवार ने किताब में कहा है कि 2011-12 की एक आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि उस दौरान राकांपा नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया गया और उन पर सवाल उठाए गए कि 2001-2010 के बीच सिंचाई पर 70,000 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद सिंचाई क्षमता में केवल 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस कार्यप्रणाली के कारण उस समय निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो गई थी। इस कारण चुनावों में भी कांग्रेस और एनसीपी को नुकसान हुआ।
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उन्होंने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा खराब प्रदर्शन के बावजूद उस साल महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी कार्यशैली में सुधार का कोई संकेत नहीं दिया। पवार ने कहा कि पृथ्वीराज चव्हाण की गिनती भले ही एक साफ छवि वाले नेता की रही, लेकिन उन्हें संदेह था कि क्या चव्हाण सभी को साथ लेकर चलने में सक्षम होंगे।
अपनी किताब में पवार ने अतीत को याद करते हुए यह भी लिखा है कि पृथ्वीराज चव्हाण के माता-पिता आनंदराव और प्रेमलताई पार्टी में यशवंतराव चव्हाण के विरोधी खेमे में थे और मेरे यशवंतराव चव्हाण के साथ अच्छे संबंध थे। इस कारण भी पृथ्वीराज चव्हाण के परिवार के साथ मेरे संबंध अच्छे नहीं थे। भले ही हमारे बीच कोई मतभेद या संघर्ष नहीं था बावजूद इसके हमारे बीच स्वस्थ और खुली वार्ता नहीं होती थी।
उन्होंने कहा कि पृथ्वीराज चव्हाण का परिवार दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के करीबी के रूप में जाना जाता था। इस कारण मुझे हमेशा लगता था कि यह निकटता महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार चलाने के लिए अच्छी नहीं थी। गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद भले ही एनसीपी और कांग्रेस के बीच सकारात्मक शुरुआत हुई थी, लेकिन बाद में वह भूल गए कि एनसीपी एक सहयोगी थी।