जवाब: कृषि कानूनों पर शरद पवार बोले, खारिज करने के बजाए विवादास्पद भाग में हो संशोधन
शरद पवार से जब पूछा गया कि क्या किसानों की मांग को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव लाएगी? इस पर उन्होंने कहा कि पूरे कानून को खारिज करने के बजाए उस हिस्सों में संशोधन कर सकते हैं जिसको लेकर किसानों को आपत्ति है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने विवादास्पद कृषि कानूनों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कृषि कानूनों को पूरी तरह खारिज करने के बजाए इसके उस हिस्सों में संशोधन किया जाना चाहिए जिससे किसानों को इससे दिक्कत है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों का एक समूह केंद्र से पारित कृषि कानून के अलग-अलग पहलुओं का अध्ययन कर रहा है।
शरद पवार से जब पूछा गया कि क्या कृषि कानून के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार प्रस्ताव लाएगी। इस पर उन्होंने कहा, "पूरे बिल को खारिज कर देने के बजाए हम उस हिस्से में संशोधन कर सकते हैं जिसे लेकर किसानों को आपत्ति है, उन्होंने कहा कि इस बिल से संबंधित सभी पक्षों से विचार करने के बाद ही इसे विधानसभा में लाया जाएगा। शरद पवार ने कहा कि मंत्रियों का एक समूह इस कानून पर विचार कर रहा है। अगर ये समूह किसानों के हक में जरूरी बदलाव लेकर आता है तो इन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव लाने की जरूरत नहीं है।
Had a discussion with Balasaheb Thorat on this. As Centre has cleared the Bills, before passing these, States should discuss the contentious points & decide. I don't think it'll come up in the 2-day State Assembly session. If it comes, should be discussed: NCP chief on Farm Laws pic.twitter.com/h6hxeS12b1
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 1, 2021
6 महीनों से जारी है किसानोें का आंदोलन
शरद पवार ने कहा कि राज्यों को अपने यहां इस कानून को पास करने से पहले इसके विवादित पहलुओं पर विचार करना चाहिए तभी इस पर फैसला लिया जाना चाहिए। पवार ने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि महाराष्ट्र विधानसभा के दो दिनों के सत्र में इस पर कोई चर्चा की जाएगी। एनसीपी प्रमुख ने कहा कि यदि ये आता है तो इस पर विचार किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि केंद्र के द्वारा पास किए गए कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली में पिछले साल 26 नवंबर से किसानों का प्रदर्शन चल रहा है। किसान गाजीपुर बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।