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आंध्र प्रदेश के दिशा अधिनियम की तर्ज पर महाराष्ट्र विधानसभा में शक्ति विधेयक पेश
Mon, 14 Dec 2020 08:54 PM IST
गौरव पाण्डेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 14 Dec 2020 08:54 PM IST
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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महाराष्ट्र सरकार ने महिला अत्याचार के खिलाफ आंध्र प्रदेश के दिशा अधिनियम की तर्ज पर शक्ति विधेयक पेश किया है। बीते दिनों राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इस विधेयक के तहत दुष्कर्म, तेजाब हमले और सोशल मीडिया पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने जैसे अपराधों के लिए मृत्यु दंड और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने समेत कठोर दंड दिया जाएगा। सुनवाई की प्रक्रिया भी 30 दिन के अंदर पूरी होगी।
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सोमवार को महाराष्ट्र विधानमंडल का दो दिवसीय सत्र आरंभ हुआ। राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने विधानमंडल के दो दिवसीय सत्र के पहले दिन महाराष्ट्र शक्ति आपराधिक कानून (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, 2020 और महाराष्ट्र विशिष्ट विशेष अदालत (शक्ति कानून के तहत महिलाओं और बच्चों के विरूद्ध अपराधों के वास्ते) विधेयक पेश किए। पहले विधेयक में सख्त सजा के लिए आईपीसी, आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं में संशोधन का प्रावधान है जबकि दूसरा इस कानून के तहत सुनवाई के लिए राज्य के हर जिले में कम से कम एक विशेष अदालत की स्थापना के लिए है।
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यह विधेयक मंगलवार को सदन से पारित हो सकता है। विधेयक में सीआरपीसी से जुड़े प्रस्तावित संशोधन जांच की अवधि दो महीने से घटाकर 15 दिन करने, सुनवाई की अवधि दो महीने से घटाकर 30 दिन करने और अपील की अवधि छह माह से 45 दिन करने के लिए की गई है। इससे पहले भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष चित्रा वाघ ने इसका विस्तृत अध्ययन करने के बाद सदन में पेश करने की मांग की थी। लेकिन सरकार ने विपक्ष की मांग पर गौर किए बिना विधेयक पेश कर दिया है।
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