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अफगानिस्तान के हिंदू व सिख किसी अफगानी से कम देशभक्त नहीं - अब्दाली

Wed, 04 Jul 2018 07:23 AM IST
गुंजन कुमार, नई दिल्ली
गुंजन कुमार, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Jul 2018 07:23 AM IST
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shaida mohammad abdali says Hindus and Sikhs of Afghanistan are less patriotic than any Afghan
शायदा मोहम्मद अब्दाली
पाकिस्तान के इशारे पर तालिबान अफगानिस्तान में रह रहे हिंदू और सिखों को जानबूझ कर निशाना बना रहा है। दो दिन पहले मारे गए सिख और हिंदू सिर्फ वहां रह रहे भारतीयों के ही नेता नहीं थे बल्कि अफगानिस्तान की राजनीति में बढ़ चढ़ हिस्सा ले रहे थे। वह किसी भी अफगानी से कम देशभक्त नहीं थे। वहां के सिखों और हिंदुओं पर हमला अफगानिस्तान की देशभक्ति पर हमला है। ये बातें भारत में अफगानिस्तान के राजदूत डा शायदा मोहम्मद अब्दाली कहीं।
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अमर उजाला से खास बातचीत में अब्दाली ने कहा कि अफगानिस्तान बड़े देशों की आपसी प्रतिस्पर्धा का दंश झेल रहा है। अफगानिस्तान की समस्या उसकी अपनी नहीं है। अब्दाली ने चेताया कि अफगानिस्तान में आतंकवाद का जो खेल चल रहा है उससे पूरी दुनिया प्रभावित होगी। यह हैरानी की बात  है कि सब जानते बूझते हुए पूरी दुनिया अफगानिस्तान के हालात पर चुप क्यों है। अफगानिस्तान की स्थिति से भारत को सबसे ज्यादा चिंतित होने की जरूरत है। इससे निबटने के लिए भारत को बहुत कुछ करना होगा। अब्दाली के मुताबिक इसके निबटने के लिए सिर्फ भारत और अफगानिस्तान नहीं बल्कि पूरी दुनिया को मिलकर कुछ ऐसा करना होगा जो आज तक नहीं किया गया है।
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वहीं अब्दाली ने माना कि 90 के दशक तक वहां दो लाख से ज्यादा हिंदू और सिख थे। यह अफसोस की बात है कि अब अफगानिस्तान में इनकी संख्या एक से दो हजार ही रह गई है। यह बड़े सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है।
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आतंक का असली खिलाड़ी पाकिस्तान :

अफगानिस्तान के सिख और हिंदुओं की हत्या की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली है। लेकिन अब्दाली का मानना है कि यह सिर्फ नाम का उलट फेर है। असल खिलाड़ी पाकिस्तान है, जिसके हाथ में आतंकवाद की चाबी है। वह उस हर नेता को निशाना बनता है, जो राजनीति के सहारे अमन चैन लाने की कोशिश करते हैं। यह आतंकवाद का कोई नया रुप नहीं। बल्कि बड़े सधे हुए सुनियोजित तरीके से नाम बदल कर की जाने वाली करतूत है।


पूरी ताकत होने पर ही तालिबान से समझौता संभव :

अब्दाली ने माना कि तालिबान के साथ शांति समझौता तभी संभव है, अफगानिस्तान के पास पूरी ताकत हो। अफगानिस्तान इसके लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उस के पास फिलहाल उतनी ताकत नहीं। इसके लिए भारत समेत दुनिया के आतंकवाद प्रभावित देशों को एक मंच पर आना होगा। सिर्फ एक देश पाकिस्तान को काबू कर दुनिया भर को आतंकवाद के दंश से बचाया जा सकता है। अफगानिस्तान इस प्रायोजित आतंकवाद की कीमत चुका रहा है। अगर पूरी दुनिया एक साथ आने को तैयार है तो अफगानिस्तान और बड़ी कीमत चुकाने को तैयार है।
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