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शबाना आजमी बोलीं- ट्रिपल तलाक संविधान के खिलाफ, 24 इस्लामिक देशों ने पहले ही किया खारिज
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Tue, 14 Aug 2018 08:56 AM IST
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शबाना आजमी
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पूर्व सांसद और फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा कि ट्रिपल तलाक हमारे संविधान के खिलाफ है। इसे मुस्लिम महिलाओं के शोषण के लिए कुछ लोगों ने गढ़ लिया है। केंद्र सरकार ने इसके खिलाफ जो कानून बनाया है उसका हम स्वागत करते हैं। दुनिया में 50 से ज्यादा इस्लामिक देशों में से 24 ने ट्रिपल तलाक को अपने संविधान से निकाल दिया है। भारत में जो लोग इसे खत्म करने का विरोध कर रहे हैं वे गलत हैं। भारत धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान ने यहां सबको बराबरी का अधिकार दिया है।
मोहम्मद हसन डिग्री कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत में शबाना आजमी ने कहा कि ट्रिपल तलाक बीते कई दशकों से मुस्लिम महिलाओं का शोषण करता चला आ रहा था। ऐसा कानून जो महिलाओं का शोषण करें उसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। निर्भया कांड के बाद जस्टिस वर्मा ने जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, उसमें सख्त कानून के साथ समाज को जागरूक करने की बात भी कही गई थी। इसके बाद संसद ने बलात्कार के कानून में बदलाव कर सख्त कानून बनाया। बावजूद इसके दुष्कर्म की घटनाएं रुक नहीं रही हैं, जो चिंता का विषय है। ऐसे में हम सबको मिलकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
अक्सर यह देखने में आता है कि आरोपी कानून के लचीलेपन की वजह से छूट जाते है, इसलिए ऐसे मामलों की फास्टट्रैक कोर्ट में सुनवाई की जाय और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं लागू कर रही है। जरूरत है उसे ठीक से लागू कराने और उनके प्रति महिलाओं को जागरूक करने की है।
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मोहम्मद हसन डिग्री कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत में शबाना आजमी ने कहा कि ट्रिपल तलाक बीते कई दशकों से मुस्लिम महिलाओं का शोषण करता चला आ रहा था। ऐसा कानून जो महिलाओं का शोषण करें उसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। निर्भया कांड के बाद जस्टिस वर्मा ने जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, उसमें सख्त कानून के साथ समाज को जागरूक करने की बात भी कही गई थी। इसके बाद संसद ने बलात्कार के कानून में बदलाव कर सख्त कानून बनाया। बावजूद इसके दुष्कर्म की घटनाएं रुक नहीं रही हैं, जो चिंता का विषय है। ऐसे में हम सबको मिलकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
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अक्सर यह देखने में आता है कि आरोपी कानून के लचीलेपन की वजह से छूट जाते है, इसलिए ऐसे मामलों की फास्टट्रैक कोर्ट में सुनवाई की जाय और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं लागू कर रही है। जरूरत है उसे ठीक से लागू कराने और उनके प्रति महिलाओं को जागरूक करने की है।
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