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LS-RS Seats: लोकसभा-राज्यसभा की सीटों में जनसंख्या आधारित बदलाव की तैयारी, कांग्रेस नेता ने कही यह बड़ी बात
Sun, 31 Jul 2022 09:06 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 31 Jul 2022 09:06 PM IST
सार
पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि अगर जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और राज्यसभा की सीटों में बदलाव किया जाता है तो दक्षिणी राज्य इसका विरोध करेंगे।
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जयराम रमेश (फाइनॉल फोटो)
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विस्तार
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि कई दक्षिणी राज्य जिन्होंने परिवार नियोजन उपायों को सफलतापूर्व लागू किया है, वे 2031 की जनगणना के बाद लोकसभा में सीटों की संख्या में जनसंख्या आधारित परिवर्तनों पर आपत्ति जताएंगे और यह देश के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी।
नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों के लिए एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम में जयराम रमेश ने उच्च सदन की भूमिका और भारतीय लोकतंत्र में इसके योगदान के बारे में बात की।
राज्यसभा के जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका की सीनेट की तुलना अक्सर राज्यसभा से की जाती है, लेकिन दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर है, क्योंकि जनसंख्या की परवाह किए बिना सभी राज्यों के सीनेट में दो प्रतिनिधि हैं।
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'जर्मनी एकमात्र देश जहां जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व'
रमेश ने कहा, "जर्मनी के अलावा ऐसा कोई देश नहीं है जहां राज्यों को जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व दिया जाता हो।" पूर्व केंद्रीय मंत्री ने शनिवार को कहा कि राज्यसभा में जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व संविधान निर्माताओं द्वारा दी गई एक नई पद्धति है।
'सबसे बड़ा मुद्दा 2026 में क्या होगा'
उन्होंने कहा, "देश के सामने सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि 2026 में क्या होगा, क्योंकि आशंका है कि दक्षिणी राज्यों केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां जनसंख्या कम होना शुरू हो जाएगा, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और राजस्थान में जनसंख्या बढ़ेगी।"
'सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी जनसंख्या प्रतिनिधित्व'
रमेश ने कहा, "अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक संशोधन लाई जो कहती है कि 2026 तक कोई परिसीमन नहीं होगा, यानी लोकसभा और राज्यसभा की सीटों की संख्या 2026 तक समान रहेगी और उसके बाद 2031 में पहली जनगणना के अनुसार, सांसदों की संख्या को बदल दिया जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा, "लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि यह देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी क्योंकि भारत के कई दक्षिणी राज्यों, पश्चिमी राज्यों और हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ उत्तरी राज्यों में परिवार नियोजन के कदम उठाए गए हैं, लेकिन मध्य भारत, उत्तर प्रदेश,बिहार और ओडिशा में अगले दस वर्षों में जनसंख्या बढ़ेगी। तो लोकसभा और राज्यसभा में इसे कैसे प्रतिबिंबित किया जाए, यह हमारे सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है।"
कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि वर्तमान सरकार संविधान में संशोधन कर सकती है, हालांकि वर्तमान संविधान 2026 के बाद की गई पहली जनगणना के आधार पर परिसीमन की बात करता है।
परिवार नियोजन को लागू करने वाले राज्य जताएंगे आपत्ति
रमेश ने कहा, "अब इस सरकार के लिए संशोधन करना संभव है। भले ही केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, जैसे राज्य आपत्ति करें।" उन्होंने कहा, "पंजाब इससे प्रभावित है। परिवार नियोजन को लागू करने में सफल होने वाले सभी राज्य आपत्ति करेंगे। दक्षिणी राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से यह कहा है।"
राज्यसभा को खत्म करने की बात के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि उनकी पार्टी के एक सदस्य मनीष तिवारी ने एक अखाबर में एक लेख लिखा था जिसमें कहा गया था कि राज्यसभा की क्या जरूरत है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यह चर्चा चलती रहती है। आज सरकार के पास दोनों सदनों में बहुमत है, लेकिन कई बार सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं होता है, यहां तक कि इस सरकार के पास पहले भी बहुमत नहीं था। जब सरकारों के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं होता है तो उन्हें लगता है कि इसे हटा दिया जाना चाहिए, लेकिन यह कितनी गंभीर मामला है, मैं नहीं कह सकता।"
उन्होंने आगे कहा, अगर आप इस सरकार को देकें तो कई वरिष्ठ मंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री राज्यसभा से हैं।
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नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों के लिए एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम में जयराम रमेश ने उच्च सदन की भूमिका और भारतीय लोकतंत्र में इसके योगदान के बारे में बात की।
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राज्यसभा के जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका की सीनेट की तुलना अक्सर राज्यसभा से की जाती है, लेकिन दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर है, क्योंकि जनसंख्या की परवाह किए बिना सभी राज्यों के सीनेट में दो प्रतिनिधि हैं।
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'जर्मनी एकमात्र देश जहां जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व'
रमेश ने कहा, "जर्मनी के अलावा ऐसा कोई देश नहीं है जहां राज्यों को जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व दिया जाता हो।" पूर्व केंद्रीय मंत्री ने शनिवार को कहा कि राज्यसभा में जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व संविधान निर्माताओं द्वारा दी गई एक नई पद्धति है।
'सबसे बड़ा मुद्दा 2026 में क्या होगा'
उन्होंने कहा, "देश के सामने सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि 2026 में क्या होगा, क्योंकि आशंका है कि दक्षिणी राज्यों केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां जनसंख्या कम होना शुरू हो जाएगा, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और राजस्थान में जनसंख्या बढ़ेगी।"
'सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी जनसंख्या प्रतिनिधित्व'
रमेश ने कहा, "अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक संशोधन लाई जो कहती है कि 2026 तक कोई परिसीमन नहीं होगा, यानी लोकसभा और राज्यसभा की सीटों की संख्या 2026 तक समान रहेगी और उसके बाद 2031 में पहली जनगणना के अनुसार, सांसदों की संख्या को बदल दिया जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा, "लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि यह देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी क्योंकि भारत के कई दक्षिणी राज्यों, पश्चिमी राज्यों और हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ उत्तरी राज्यों में परिवार नियोजन के कदम उठाए गए हैं, लेकिन मध्य भारत, उत्तर प्रदेश,बिहार और ओडिशा में अगले दस वर्षों में जनसंख्या बढ़ेगी। तो लोकसभा और राज्यसभा में इसे कैसे प्रतिबिंबित किया जाए, यह हमारे सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है।"
कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि वर्तमान सरकार संविधान में संशोधन कर सकती है, हालांकि वर्तमान संविधान 2026 के बाद की गई पहली जनगणना के आधार पर परिसीमन की बात करता है।
परिवार नियोजन को लागू करने वाले राज्य जताएंगे आपत्ति
रमेश ने कहा, "अब इस सरकार के लिए संशोधन करना संभव है। भले ही केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, जैसे राज्य आपत्ति करें।" उन्होंने कहा, "पंजाब इससे प्रभावित है। परिवार नियोजन को लागू करने में सफल होने वाले सभी राज्य आपत्ति करेंगे। दक्षिणी राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से यह कहा है।"
राज्यसभा को खत्म करने की बात के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि उनकी पार्टी के एक सदस्य मनीष तिवारी ने एक अखाबर में एक लेख लिखा था जिसमें कहा गया था कि राज्यसभा की क्या जरूरत है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यह चर्चा चलती रहती है। आज सरकार के पास दोनों सदनों में बहुमत है, लेकिन कई बार सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं होता है, यहां तक कि इस सरकार के पास पहले भी बहुमत नहीं था। जब सरकारों के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं होता है तो उन्हें लगता है कि इसे हटा दिया जाना चाहिए, लेकिन यह कितनी गंभीर मामला है, मैं नहीं कह सकता।"
उन्होंने आगे कहा, अगर आप इस सरकार को देकें तो कई वरिष्ठ मंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री राज्यसभा से हैं।