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Manipur: नदी में डूबने से चार बच्चों की मौत, राज्य में जारी हिंसा के बाद से राहत शिविरों में रहे थे सभी
Wed, 20 Mar 2024 01:41 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: श्वेता महतो
Updated Wed, 20 Mar 2024 01:41 PM IST
सार
मंगलवार की दोपहर करीब दो बजे चार बच्चे नदी में नहाने गए थे। जब बच्चे काफी देर तक वापस नहीं लौटे, तब उनके परिवार ने उन्हें ढूंढना शुरू किया। पुलिस को इसकी जानकार दी गई, जिसके बाद पुलिस भी बच्चों को ढूंढने में लग गई।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मणिपुर के चुराचांदपुर में परिवार के साथ राहत शिविरों में रहने वाले चार बच्चों की नदी में डूबकर मौत हो गई। मरने वाले बच्चों में तीन लड़की और एक लड़क शामिल है। इन सभी बच्चों की उम्र चार से नौ वर्ष के बीच है।
मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के कारण ये सभी तुइबुओंग में ईसीए कनान राहत शिविर में रह रहे थे। मंगलवार की दोपहर करीब दो बजे चारो बच्चे नदी में नहाने गए थे। जब बच्चे काफी देर तक वापस नहीं लौटे, तब उनके परिवार ने उन्हें ढूंढना शुरू किया। पुलिस को इसकी जानकार दी गई, जिसके बाद उन्होंने भी बच्चों को ढूंढना शुरू किया। पुलिस ने बताया कि बुधवार की सुबह छह बजे बच्चों का शव नदी में मिला।
तीन मई को शुरू हुआ था जातीय संघर्ष
मणिपुर में मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में राज्य के पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था। जिसके बाद तीन मई को जातीय हिंसा भड़क गई थी। मणिपुर की आबादी में मैतेई समुदाय की हिस्सेदारी करीब 53 फीसदी है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी नगा और कुकी 40 फीसदी से थोड़ा अधिक हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं। बता दें कि मणिपुर में जारी हिंसा में अबतक 160 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
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मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के कारण ये सभी तुइबुओंग में ईसीए कनान राहत शिविर में रह रहे थे। मंगलवार की दोपहर करीब दो बजे चारो बच्चे नदी में नहाने गए थे। जब बच्चे काफी देर तक वापस नहीं लौटे, तब उनके परिवार ने उन्हें ढूंढना शुरू किया। पुलिस को इसकी जानकार दी गई, जिसके बाद उन्होंने भी बच्चों को ढूंढना शुरू किया। पुलिस ने बताया कि बुधवार की सुबह छह बजे बच्चों का शव नदी में मिला।
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तीन मई को शुरू हुआ था जातीय संघर्ष
मणिपुर में मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में राज्य के पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था। जिसके बाद तीन मई को जातीय हिंसा भड़क गई थी। मणिपुर की आबादी में मैतेई समुदाय की हिस्सेदारी करीब 53 फीसदी है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी नगा और कुकी 40 फीसदी से थोड़ा अधिक हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं। बता दें कि मणिपुर में जारी हिंसा में अबतक 160 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
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