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Monsoon: हर साल जलाशयों में घुल रहा 70 हजार टन रसायन, तेज बारिश में खेतों से बहकर आसपास का पानी प्रदूषित

Fri, 14 Jul 2023 06:03 AM IST
जलज मिश्रा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 14 Jul 2023 06:03 AM IST
सार

हानिकारक रसायन न केवल खेतों के आसपास की मिट्टी और पानी को प्रदूषित करते हैं बल्कि नदियों और महासागरों तक भी पहुंच जाते हैं। यह जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और मीठे पानी के स्रोतों को प्रदूषित करते हैं। 

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seventy thousand tons of chemicals dissolve from Fields in water reservoirs due to heavy Rains
Monsoon - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मानसूनी बारिश में हर साल 70,000 टन हानिकारक रसायन खेतों से जलाशयों में पहुंच जाते हैं। इनमें से कुछ महासागरों में पहुंच रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए बहुत घातक है। 

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एक अध्ययन से पता चला है कि यह हानिकारक रसायन न केवल खेतों के आसपास की मिट्टी और पानी को प्रदूषित करते हैं बल्कि नदियों और महासागरों तक भी पहुंच जाते हैं। यह जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और मीठे पानी के स्रोतों को प्रदूषित करते हैं।  नेचर जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर लगभग 70,000 टन संभावित हानिकारक रसायन हर साल जलाशयों में पहुंच जाते हैं। ये निष्कर्ष 92 सामान्य कीटनाशकों के भौगोलिक वितरण के विश्लेषण पर आधारित हैं।

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सिडनी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सिविल इंजीनियरिंग के अध्ययन के प्रमुख लेखक फेडेरिको मैगी के अनुसार कागज पर, ताजे जलमार्गों में 0.5 प्रतिशत का निक्षालन बहुत अधिक नहीं लग सकता है, लेकिन पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालने के लिए केवल थोड़ी मात्रा में कीटनाशकों की आवश्यकता होती है। अध्ययन में कहा गया है कि लगभग 13,000 किलोमीटर लंबी नदियों में रासायनिक सांद्रता कई जलीय पौधों और अकशेरुकी जीवों के लिए सुरक्षा सीमा से अधिक है। अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि कीटनाशकों के उपयोग को कम करना और निगरानी को मजबूत करना है। शोधकर्ताओं के अनुसार, कीटनाशकों के प्रदूषण को कम करने का लक्ष्य और विषाक्तता को कम करने सहित जोखिम को कम करने पर केंद्रित होना चाहिए, क्योंकि कम मात्रा में उपयोग किए जाने पर भी कुछ जीवों को बहुत जहरीले कीटनाशकों से उच्च जोखिम होता है।

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